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बार-बार जलती इमारतें, इंदिरापुरम से अनाज मंडी तक, दिल्ली-एनसीआर के अग्निकांड

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक हाईराइज सोसायटी में लगी आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, लेकिन इस घटना ने दिल्ली‑एनसीआर में बार‑बार होने वाले आग के बड़े हादसों की डरावनी यादें ताजा कर दीं. सवाल यही है कि क्या ये घटनाएं अलग‑थलग हादसे हैं या लापरवाही से बना एक खतरनाक पैटर्न.

बार-बार जलती इमारतें, इंदिरापुरम से अनाज मंडी तक, दिल्ली-एनसीआर के अग्निकांड
  • इंदिरापुरम में एक बहुमंजिला इमारत की 11वीं मंजिल से शुरू हुई आग पर दमकल विभाग ने दो घंटे में नियंत्रण पाया
  • दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में आग लगने की कई घटनाओं में भारी जनहानि और गंभीर चोटें हुईं हैं
  • द्वारका, पालम में आग लगने से कई की मौत हुई थी, जिनमें मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट और धुएं से दम घुटना बताया गया था

गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटी में आग की घटना ने एक बार फिर लोगों के मन में डर की यादें ताजा कर दी. आज सुबह गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग ने इलाके में हड़कंप मचा दिया. हालांकि दमकल विभाग की मदद से आग पर काबू पा लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी की एक हाईराइज इमारत में बुधवार सुबह तकरीबन 9 बजे आग लगी. आग 11वीं मंजिल से शुरू हुई और देखते‑देखते कई मंजिलों में फैल गई. दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सुबह करीब 11.30 बजे आग को पूरी तरह काबू में कर लिया गया. लेकिन सवाल यही है दिल्ली-एनसीआर में आग लगना क्या यह सिर्फ एक “अलग घटना” है या आग का एक खतरनाक पैटर्न? जो कई सिलसिलेवार लापरवाही और अनदेखी का नतीजा होती है. जिसकी कीमत इंसान को चुकानी पड़ती है.

NCR में बार-बार दोहराते हादसे

द्वारका अग्निकांड (2025)

पिछले साल जून के महीने में दिल्ली के द्वारका सेक्टर-13 स्थित शबद अपार्टमेंट की 9वीं मंजिल में आग लग गई थी. फ्लैट के अंदर पिता अपने दो बच्चों के साथ फंस गए थे. जिन्होंने बचने के लिए दोनों बच्चों के साथ अपार्टमेंट की करीब 100 फीट ऊंचाई पर बनी बालकनी से छलांग लगाई. पहले बेटा कूदा और फिर बेटी. आखिर में उनके पिता भी जान बचाने को कूद गए.तीनों को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बच्चों के पिता ने जान पर खेलकर किसी तरह से अपना रिश्तेदारों को फ्लैट से बाहर निकाल लिया था लेकिन वो अपनी और बच्चों की जान नहीं बचा सकें.

पालम अग्निकांड (मार्च 2026)

इसी साल मार्च के महीने में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम में लगी भीषण आग में एक परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई थी. जांचकर्ताओं ने संदेह जताया कि इमारत के प्रवेश द्वार के पास स्थित एक इलेक्ट्रिक बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी होगी. पुलिस ने यह भी कहा कि धुएं के कारण दम घुटने से ही अधिकातर लोगों की मौत होने की आशंका है. सुबह लगी इस भीषण आग में 70 वर्षीय महिला और तीन छोटी बच्चियों (जिनमें से एक की उम्र मात्र तीन वर्ष थी) सहित नौ लोगों की जान चली गई. भागने की कोशिश में तीन अन्य घायल हो गए थे. बुजुर्ग महिला समेत केवल दो पीड़ितों को ही गंभीर रूप से जलने के निशान थे, जबकि अन्य लोगों के शरीर पर तुलनात्मक रूप से जलने के कम निशान थे.

बवाना इंडस्ट्रियल एरिया

जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में बहुत बड़ी आग लगी थी जिसमें 17 लोगों की जान गई. उस समय की सरकार ने इसकी जिम्मेदारी एमसीडी के लाइसेंसिंग विभाग पर डाल दी, यह कहा कि ये आग लाइसेंसिंग विभाग के कारण लगी है. उस समय एमसीडी में भाजपा थी. उसके बाद फरवरी 2019 में अर्पित होटल करोल बाग में आग लगी और फिर 17 लोगों की मौत हुई, और एनओसी प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार है, ऐसा कहकर एमसीडी पर आरोप लगाकर उस जिम्मेदारी से उस समय की सरकार ने बचने का प्रयास किया.

दिल्ली अनाज मंडी आग (2019)

2019 में अनाज मंडी में आग लगी, 43 लोगों की जान गई. इस मामले में कहा गया 'स्पेशल एरिया रीडेवलपमेंट प्लान' नहीं बनाया गया था, इसलिए आग लग गई. जिस इलाके में आग लगी थी वो घनी आबादी वाला था और साथ ही वहां गलियां भी काफी संकरी थी. ऐसे में दमकल विभाग की गाड़ियों को घटनास्थल में पहुंचने में समय लगा, इसी कारण मौतों की संख्या में इजाफा हुआ. इमारत में एक ही दरवाजा था, प्लास्टिक का सामान जलने से जहरीला धुआं उठा, जिसने लोगों का दम घोंट दिया. हादसे से ठीक एक दिन पहले इसी जगह एक फैक्ट्री में आग लगी थी, लेकिन उसमें जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था. 

दिल्ली करोल बाग होटल आग (2019)

दिल्ली के करोलबाग में एक होटल में आग लगने की घटना में 17 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे. मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है. उस वक्त सामने आए इस घटना के वीडियो में दो लोग जान बचाने के लिए जलती हुई इमारत की चौथी मंजिल से कूदते नजर आए थे. चश्मदीदों के मुताबिक ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई है. गलियारों में लकड़ी के पैनल लगे होने के कारण आग जल्दी फैल गई. तब दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ इस्तेमाल किए अग्निशामक मिले थे. जिससे प्रतीत होता है कि अंदर फंसे लोगों ने आग बुझाकर वहां से निकलने की कोशिश की होगी.
 

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