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गहना चाहिए तो नो बुर्का नो नकाब! झांसी के सर्राफा मंडल को क्यों लेना पड़ा ये अजीब फैसला, जान लें

पुलिस की सहमति से दुकानों के अंदर और बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट लिखा है कि खरीदारी के दौरान ग्राहक को चेहरा खुला रखना अनिवार्य होगा.

गहना चाहिए तो नो बुर्का नो नकाब! झांसी के सर्राफा मंडल को क्यों लेना पड़ा ये अजीब फैसला, जान लें
  • झांसी के सर्राफा व्यापारियों ने चोरी और आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा कड़े कर दी है.
  • नकाब या चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को अब सोने-चांदी के गहने नहीं बेचे जाएंगे.
  • दुकानों के बाहर और अंदर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें ग्राहक से चेहरा खोलकर आने की अपील की गई है.
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उत्तर प्रदेश के झांसी में बढ़ती चोरी और आपराधिक घटनाओं के बीच सर्राफा व्यापारियों ने सुरक्षा को लेकर एक अनोखा लेकिन सख्त फैसला लिया है. अब चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को आभूषण नहीं बेचे जाएंगे. फिर चाहे महिला ग्राहक बुर्के में हों या घूंघट में. सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि चोरी की घटनाओं से बचाव के लिए यह कदम जरूरी हो गया है. इसी को लेकर दुकानों के बाहर और भीतर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें साफ लिखा है— ग्राहक चेहरा खोलकर दुकान में प्रवेश करें, तभी सोने-चांदी के गहनों की बिक्री होगी.

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार हो रहे उछाल के साथ ही चोरी और लूट जैसी आपराधिक घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए झांसी के सीपरी सर्राफा व्यापार मंडल ने एक अहम फैसला लिया है. मंडल ने तय किया है कि नकाब या चेहरा ढककर आने वाले किसी भी ग्राहक को गहने नहीं बेचे जाएंगे.

इस फैसले को लेकर पुलिस की सहमति से दुकानों के अंदर और बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट लिखा है कि खरीदारी के दौरान ग्राहक को चेहरा खुला रखना अनिवार्य होगा. व्यापारियों का कहना है कि चेहरा ढके होने के कारण संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और कई आपराधिक घटनाएं इसी आड़ में अंजाम दी जाती हैं.

विनोद कुमार गौतम रिपोर्ट

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