उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 5वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित भी किया. सीएम योगी ने कहा, "यह वही उत्तर प्रदेश है, जिसके हाई कोर्ट ने 12 जून को भारत की सबसे शक्तिशाली कुर्सी पर बैठे शख्स का चुनाव रद्द कर दिया था. ठीक 13 दिन बाद, इसके बदले में देश में इमरजेंसी लगा दिया गया. उस वक्त, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हंसराज खन्ना ने अकेले असहमति जताई थी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी."
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास कभी बेकार नहीं जाता. हाल ही में, आपने देखा होगा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उसी अकेली असहमति को सही माना. 1975 ने देश को 'कानून के शासन' और 'कानून के जरिए शासन' के बीच का अंतर सिखाया. देश के लिए 1975 का यही सबक है."
'प्रयागराज में एक माफिया था...'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "पहले उत्तर प्रदेश में 'रूल ऑफ माफिया' था. हमने लॉ की किताब के जरिए उसे बाहर निकाल कर प्रदेश में 'रूल ऑफ लॉ' का शासन ईमानदारी से लागू किया, तब हम यह परिवर्तन लाने में सफल हुए."
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उस 'रूल ऑफ माफिया' से यूपी मुक्त हुआ है. 'रूल ऑफ लॉ' सही मायने में यूपी में लागू हुआ है.
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