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CM योगी ने जिस दिव्यांग खुशी के सिर पर रखा हाथ, उसकी बदल गई जिंदगी; अब कानपुर DM ने पिता को दिया खास तोहफा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया. अब वह पहले से बेहतर सुन पा रही है, साथ ही स्पीच थेरेपी के कारण बोलने भी लगी है. उसकी पढ़ाई भी चल रही है. कानपुर डीएम ने अब खुशी के पिता को ई-रिक्शा दिलवाया है, जिससे परिवार के सामने रोजगार का संकट भी खत्म हो गया है.

CM योगी ने जिस दिव्यांग खुशी के सिर पर रखा हाथ, उसकी बदल गई जिंदगी; अब कानपुर DM ने पिता को दिया खास तोहफा
कानपुर से पैदल चलकर पहुंची दिव्यांग खुशी गुप्ता ने सीएम योगी को बताई थी अपनी पीड़ा.

कानपुर: कभी अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से चलकर पैदल लखनऊ पहुंची 19 साल की दिव्यांग खुशी गुप्ता की जिंदगी बदल रही है. जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की चुनौती थी, परिवार आर्थिक अभावों से जूझ रहा था, अब उस परिवार के सदस्यों के चेहरे पर खुशी से खिलने लगे हैं. सबसे खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक-एक कर खुशी और उसके परिवार के जीवन की हर बड़ी चिंता का समाधान बनती चली गई. शुक्रवार 3 जुलाई को कानपुर कलेक्टर आईएएस जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी. इससे परिवार के सामने अब रोजगार का संकट भी खत्म होगा. 

दरअसल, कलेक्टर आईएएस जितेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को यह ई-रिक्शा निःशुल्क उपलब्ध कराया है. जिसका पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है.  
कानपुर डीएम की पहल पर खुशी गुप्ता के पिता को मिला ई-रिक्शा.

कानपुर डीएम की पहल पर खुशी गुप्ता के पिता को मिला ई-रिक्शा.

किराए का रिक्शा चलाते थे खुशी के पिता 

कल्लू गुप्ता कई साल से किराए का ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, जिससे हर दिन होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा वाहन के किराए में चला जाता था, बाकी बचे पैसों से घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था. हाल ही में एक सड़क हादसे में कल्लू के पैर में चोट लगी तो परिवार और मुश्किल में घिर गया. परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी. मामला कानुपर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर परिवार को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया.  

एक साल पहले सीएम से मिली थी खुशी 

बता दें कि करीब एक साल पहले दिव्यांग खुशी गुप्ता अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल चलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी. मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात की, उसकी बात सुनी और सिर पर हाथ रखकर मदद का भरोसा दिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खुशी के उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता की जाए. इसके बाद प्रशासन ने खुशी और उसके परिवार की मदद कर रहा है. 

ई-रिक्शा की चाबी लेती खुशी गुप्ता और उसके माता-पिता.

ई-रिक्शा की चाबी लेती खुशी गुप्ता और उसके माता-पिता.

सीएम से मुलाकात के बाद खुशी की जिंदगी कितनी बदली 

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया, जिससे वह पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है. नियमित स्पीच थेरेपी से उसने बोलना भी शुरू कर दिया है. दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में खुशी का प्रवेश भी कराया गया है. अब प्रशासन की पहल पर खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को ई-रिक्शा मिल गया है.  

कानपुर की खुशी का स्कूल में दाखिला, सुनने और बोलने की क्षमता भी बढ़ी.

कानपुर की खुशी का स्कूल में दाखिला, सुनने और बोलने की क्षमता भी बढ़ी.

खुशी बोली- थैंक यू योगीजी

सीएम योगी से मुलाकात के बाद मिली मदद को लेकर कभी न बोल पाने वाली खुशी अब मुस्कुराते थैंक यू योगीजी कह रही है. उसकी मां गीता गुप्ता ने कहा कि पहले बेटी के इलाज और पढ़ाई की चिंता थी जो दूर हो गई. अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है. सीएम योगीजी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है. 

ई-रिक्शा मिलने से खुशी के माता पिता भी हुए खुश.

ई-रिक्शा मिलने से खुशी के माता पिता भी हुए खुश.

परिवार को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास  

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहे. उसी सोच के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है. शासन की मंशा केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है.

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