उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों में उठापटक शुरू हो गई है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी बीजेपी में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी है. भाजपा जल्द ही 6 क्षेत्रों के लिए नए क्षेत्रीय प्रभारियों की घोषणा करने वाली है. इस बार भाजपा का पूरा फोकस 'जातीय और सामाजिक संतुलन' साधने पर है. बीजेपी का मकसद विपक्ष के PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले का जवाब देना है. इसी के तहत क्षेत्रीय प्रभारियों की नियुक्ति में जातीय समीकरण और सामाज पकड़ पर खास ध्यान दिया जाएगा.
बदलेगा पुराना ट्रेंड
यूपी भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी का ये 'मास्टरस्ट्रोक' संगठन को जमीन पर और मजबूत करेगा. यूपी बीजेपी 6 क्षेत्रों- काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर, ब्रज और पश्चिम - में बंटी है. इन सभी क्षेत्रों के लिए नए प्रभारियों के नामों पर मंथन तेज हो गया है. पूरे यूपी में बीजेपी के 98 संगठनात्मक जिले हैं. अब तक आमतौर पर प्रदेश महामंत्रियों को ही क्षेत्रीय प्रभारी बनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार पुराने ट्रेंड से हटकर नए चेहरों को मौका मिल सकता है.
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संगठन में संतुलन
पार्टी का मकसद हर स्तर पर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाना है, ताकि बूथ से लेकर प्रदेश तक सभी वर्गों की भागीदारी पार्टी में हो सके.बीजेपी नेताओं का मानना है कि संगठन में संतुलन के जरिए ही PDA जैसे गठजोड़ को मात दी जा सकती है. नए प्रभारी न सिर्फ संगठन को मजबूत करेंगे, बल्कि 2027 की चुनावी जमीन भी तैयार करेंगे. अगले कुछ दिनों में नामों की घोषणा के साथ ही यूपी भाजपा की नई टीम मैदान में उतर जाएगी और चुनावी रण की तैयारियों में जुट जाएगी.
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