- बिहार के नवादा जिले के गोरिहारी गांव के आलोक राज नारायण 7वें प्रयास में UPSC पास कर यूपी में IPS अधिकारी बने
- उनके पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए नवादा शहर और गांव की जमीन बेच दी ताकि आर्थिक संकट न आए
- आलोक ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू कर दिल्ली से बीटेक और राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री प्राप्त की
Success Story IPS Alok Raj Narayan: करीब 15 साल तक गांव से दूरी और यूपीएससी में सात बार कोशिश. आखिर में भारतीय पुलिस सेवा के अफसर. यह सक्सेस स्टोरी बिहार के नवादा जिले के एक छोटे से गांव गोरिहारी के आलोक राज नारायण की है. यूपीएससी में लगातार छह बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सातवें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई. आलोक वर्तमान में उत्तर प्रदेश कैडर में अपनी कार्यशैली और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए चर्चा में हैं.
छह असफलताओं के बाद सातवें प्रयास में मिली सफलता
12 जनवरी 1992 को जन्मे आलोक राज नारायण ने वर्ष 2015 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी. शुरुआती छह प्रयासों में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. लगातार मेहनत, आत्मविश्वास और धैर्य के बल पर आखिरकार सिविल सेवा परीक्षा 2021 (परिणाम 2022) में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल की. उनकी यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की एक नई शुरुआत हो सकती है. सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को यूपीएससी में छह और ओबीसी श्रेणी को नौ अवसर (अटेम्प्ट) मिलते हैं.
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बेटे के सपने के लिए पिता ने बेच दी जमीन
आलोक की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा त्याग छिपा है. नवादा जिले के रोह प्रखंड की कोसी रूखी पंचायत के गोरिहारी गांव निवासी उनके पिता नरेश प्रसाद यादव बताते हैं कि बेटे की पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने नवादा शहर की जमीन के साथ-साथ गांव की जमीन भी बेच दी. परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों को कभी बेटे के सपनों के आड़े नहीं आने दिया. नरेश प्रसाद यादव मध्य विद्यालय नेमदारगंज से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. उन्होंने बताया कि यह जमीन नवादा शहर में मकान बनाने के लिए खरीदी गई थी, जिसे पढ़ाई के लिए बेचना पड़ा ताकि बेटे को तैयारी के दौरान किसी आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े.
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सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर, बीटेक तक पहुंची पढ़ाई
आलोक राज नारायण की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय में पांचवीं कक्षा तक हुई. इसके बाद उन्होंने रोह हाई स्कूल में पढ़ाई की. नौवीं कक्षा में उनका दाखिला जीवन दीप पब्लिक स्कूल में हुआ, जहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. वर्ष 2007-09 के दौरान राजस्थान से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने दिल्ली से बीटेक की डिग्री हासिल की. यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए भी किया और इसी विषय को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना.

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गृह मंत्रालय में नौकरी मिली, फिर बन गए IPS
यूपीएससी का अंतिम परिणाम आने से ठीक पहले आलोक राज नारायण का चयन गृह मंत्रालय के एक पद पर हो चुका था और 20 जून को उनकी जॉइनिंग होनी थी. इसी बीच सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और उन्हें 346वीं रैंक मिली. उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा को चुना और प्रशिक्षण के बाद उत्तर प्रदेश कैडर में नियुक्त हुए.
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अब अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई से बना रहे पहचान
वर्तमान में 2022 बैच के IPS आलोक राज नारायण उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र में एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत हैं. यूपी पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है. नौ अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों के दौरान 13 अपराधियों की गिरफ्तारी में उनकी अहम भूमिका रही. इसके अलावा करीब 450 करोड़ रुपये के अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा. इस सफल अभियान के बाद आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखकर उन्हें सम्मानित करने की अनुशंसा की थी.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया सम्मानित
महाकुंभ के दौरान उत्कृष्ट पुलिस सेवा और बेहतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में योगदान के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आलोक राज नारायण को 'महाकुंभ सेवा मेडल' से सम्मानित किया. यह सम्मान उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है. महाकुंभ के दौरान उन्होंने अपने निजी प्रयासों से कई बिछड़े हुए लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी.
शिक्षक का बेटा, शिक्षा से जुड़ा है पूरा परिवार
आलोक राज नारायण एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा को सबसे बड़ा मूल्य माना जाता है. उनके पिता नरेश प्रसाद यादव सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां सुशीला देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं. उनके बड़े भाई ए.के. गुरु एक निजी विद्यालय का संचालन करते हैं, वहीं उनकी बहन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर चुकी हैं. परिवार के इसी शैक्षणिक माहौल ने आलोक की सफलता की मजबूत नींव रखी.
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