उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार को एक शख्स ने अपनी पत्नी, बच्चे और दो पुजारियों को गोली मार दी और तीन बच्चों को बंधक बना लिया. बाद में पुलिस एनकाउंटर में वह भी मारा गया. पुलिस के साथ आमना-सामना होने के दौरान, उस शख्स ने अपने बेटे को गोली मारी. पुलिस ने बताया कि उस शख्स और उसके बेटे, दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. यह सब मंगलवार शाम को शुरू हुआ, जब अरविंद सिंह नाम का शख्स शाम करीब 6 बजे घर लौटा और उसने अपनी पत्नी बबीता सिंह (32) को दो पुजारियों महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के साथ एक धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पाया. इसके बाद कहा-सुनी हो गई.
7 घंटे तक चला गतिरोध...
वाराणसी जोन के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADG) नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस ने शुरू में संयम बरतने की कोशिश की क्योंकि आरोपी अरविंद घर से बाहर आने को तैयार नहीं था और जिद कर रहा था कि सुबह होने तक इंतजार किया जाए. जब अरविंद ने घर के अंदर से गोली चलाई तो स्थिति बिगड़ गई. इसके बाद पुलिस टीम को आखिरी उपाय के तौर पर घर के अंदर घुसना पड़ा.
अरोड़ा ने पत्रकारों को बताया, "सात घंटे तक घेराबंदी के बावजूद, आरोपी बाहर आने को तैयार नहीं हुआ और सुबह तक इंतजार करने की जिद करता रहा. आखिरकार, जब उसने अंदर से गोलीबारी शुरू की, तो SSP और स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) टीम के तीन-चार कमांडो को आखिरी उपाय के तौर पर दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा." उन्होंने आगे बताया कि हमने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. जैसे ही SSP समेत टीम के सदस्य अंदर घुसे, उन पर गोलीबारी हुई और उन्हें जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी."
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मानसिक रूप से परेशान था आरोपी...
पुलिस के मुताबिक, अरविंद की मां और पत्नी ने पहले भी उसके व्यवहार के बारे में शिकायत की थी. एसएसपी कुमार ने बताया, "गांव वालों, आरोपी के परिवार के सदस्यों और गोलीबारी में बिना किसी चोट के बचे एक शख्स से बात करने के बाद, अब तक की जांच से पता चला है कि अरविंद मानसिक रूप से परेशान था और आक्रामक व्यवहार करता था."
आगे उन्होंने बताया कि उसकी (आरोपी) मां और पत्नी ने अक्सर शिकायत की थी कि वह परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करता था और ऐसा व्यवहार करता था. इस स्थिति से परेशान होकर, उसकी मां और पत्नी ने एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया था. उन्हें शक था कि उस पर किसी बुरी आत्मा का साया है और उन्होंने उस आत्मा को भगाने की उम्मीद में यह अनुष्ठान आयोजित किया था."
अरविंद ने धार्मिक अनुष्ठान पर आपत्ति जताई और इसे लेकर बहुत गुस्से में था. जब उसकी पत्नी ने उसे बताया कि वह अनुष्ठान कराने वाले पुजारी का अपमान कर रहा है, तो वह गुस्से से भर गया और उसने अपनी पत्नी और दोनों पुजारियों को गोली मार दी.
एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, अनुष्ठान के लिए घर पर पांच पुजारी आए थे. तीन पुजारी भागने में सफल रहे, जबकि बहस के दौरान दो की मौत हो गई.
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