- चढ़ावा चोरी विवाद के बाद लगभग 2 दर्जन लोगों ने नौकरी छोड़ दी है
- वर्तमान समय में लगभग 1 दर्जन लोग ही इस काम में लगे हुए हैं
- अब बहुत कड़ी व्यवस्था के साथ आने और जाने में दो बार क्रॉस चेकिंग हो रही है
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं द्वारा नकद दान, सोना-चांदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी चढ़ावे के रूप में अर्पित की जाती हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है चढ़ावे की सुरक्षित गणना और उसका रिकॉर्ड तैयार करना. हाल के महीनों में चढ़ावे से जुड़े विवादों और जांच के बाद इस व्यवस्था को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर गिनती कौन करता है, कितने लोग इस काम में लगे हैं और क्या पहले से जुड़े कर्मचारी अब भी काम कर रहे हैं.
हाल में ही चढ़ावा चोरी विवाद के बाद लगभग 2 दर्जन लोगों ने नौकरी छोड़ दी है. इसका मुख्य कारण वेतन में भारी कमी बताई जा रही है. अब नई व्यवस्था में सुरक्षा कर्मियों की कड़ी निगरानी में दान पात्रों को सुरक्षित स्थान/ कमरे तक लाया जाता है और ट्रस्ट के जिम्मेदार व्यक्ति तथा बैंक के अधिकारी की उपस्थिति में अब गिनती कराई जा रही है जिससे कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो सके.
मशीनों से होती है कैश की गिनती
मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खोला जाता है. पूरी प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की मौजूदगी में होती है. नकद राशि की गिनती मशीनों की सहायता से की जाती है, जबकि सोना-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाता है. प्रत्येक चरण का दस्तावेजीकरण किया जाता है ताकि हिसाब-किताब सुरक्षित रहे.

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एक दर्जन लोग कर रहे काम
वर्तमान समय में लगभग 1 दर्जन लोग ही इस काम में लगे हुए हैं और उन्हें इसके लिए अलग से ड्रेस पहनकर गिनती करनी होती है. इस कपड़े में कोई जेब नहीं है और कोई भी कर्मचारी अपना मोबाइल, टिफिन, खाने का सामान, पानी की बोतल आदि कोई भी वस्तुएं साथ नहीं ले जाएगा. अब बहुत कड़ी व्यवस्था के साथ आने और जाने में दो बार क्रॉस चेकिंग हो रही है. सीसीटीवी कैमरे बढ़ा दिए गए हैं और हर नगदी, सिक्कों, आभूषणों आदि का बहुत कड़ा हिसाब किताब रखा जा रहा है.
जांच शुरू होने के बाद व्यवस्था में किए गए बदलाव
चढ़ावे की गणना में प्रशासनिक अधिकारी, ट्रस्ट से जुड़े अधिकृत कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और गणना में नियुक्त स्टाफ ही शामिल रहते हैं. आवश्यकता के अनुसार, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है. किसी भी दिन ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों की संख्या कार्यभार और चढ़ावे की मात्रा के अनुसार तय होती है. चढ़ावे से जुड़े मामलों में जांच शुरू होने के बाद व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं. जिन कर्मचारियों पर जांच या कार्रवाई का प्रभाव पड़ा, उन्हें लेकर संबंधित एजेंसियां और प्रशासन अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं. वहीं, नियमित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अधिकृत कर्मचारियों की तैनाती की जाती है. राम मंदिर का चढ़ावा केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है. इसलिए गणना, सुरक्षा, रिकॉर्ड और पारदर्शिता- इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
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