- इलाहाबाद HC ने खालिस्तानी आतंकी सुखविंदर सिंह ढिल्लो को 1993 के आर्म्स एक्ट मामले में जमानत दे दी
- सुखविंदर सिंह को फरवरी 2026 में यूपी एंटी-टेररिज्म स्क्वाड और नोएडा पुलिस ने पंजाब से गिरफ्तार किया था
- कोर्ट ने क्षेत्राधिकार बदलने और रिकॉर्ड गुम होने का हवाला देते हुए माना कि आरोपी जानबूझकर अदालत से नहीं भागा
खालिस्तान कमांडो फोर्स के ऑपरेटिव सुखविंदर सिंह ढिल्लो को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है. सुखविंदर सिंह ढिल्लो उर्फ दयाल सिंह उर्फ राकेश शर्मा उर्फ छिद्दा को करीब 31 सालों तक फरार रहने के बाद इसी साल फरवरी में गिरफ्तार किया गया था. वह 'खालिस्तान कमांडो फोर्स' (KCF) से जुड़ा हुआ था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुखविंदर सिंह ढिल्लो को1993 के आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मामले में जमानत दी है.
अदालत ने माना कि पुलिस स्टेशन का क्षेत्राधिकार बदलने और रिकॉर्ड गुम होने की वजह से ऐसा हुआ. क्योंकि संबंधित पुलिस स्टेशन अब नोएडा के अधिकार क्षेत्र में आता है. ट्रायल अभी भी गाजियाबाद कोर्ट में पेंडिंग था. कोर्ट ने कहा कि आरोपी जानबूझकर अदालत की कार्यवाही से दूर नहीं भागा था. यह आदेश जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने सुखविंदर सिंह उर्फ ढिल्लो की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया.
सुखविंदर के पास मिली थी AK-56 राइफल और कई जिंदा कारतूस
मामला साल 1993 का है, जब तत्कालीन गाजियाबाद जिले के थाना नोएडा सेक्टर-20 में आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25 और 27 के तहत केस अपराध संख्या 206/1993 दर्ज किया गया था. आरोप के मुताबिक, साल 1993 में पुलिस ने सुखविंदर सिंह के पास से एक AK-56 राइफल और कई जिंदा कारतूस बरामद किए थे. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. उसे इस मामले में दिसंबर 1993 में पहली बार जमानत मिली थी. हालांकि अगस्त 1995 के बाद से वह अदालत में पेश नहीं हुआ, उसे फरार घोषित कर दिया गया. इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया.
वह करीब तीन दशकों तक कानून की पहुंच से दूर रहा. इसी साल 18 फरवरी 2026 को उसे यूपी एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (UP ATS) और गौतमबुद्ध नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने पंजाब के मोहाली से अरेस्ट किया था.19 फरवरी से वह जेल में बंद है.
कोर्ट में पेश क्यों नहीं हो सका, दिया तर्क
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुखविंदर सिंह ढिल्लो के वकील ने तर्क दिया कि संबंधित थाना क्षेत्र अब नोएडा जिले के अंदर आता है, जबकि मुकदमे की सुनवाई अभी भी गाजियाबाद की अदालत में लंबित चल रही थी. क्षेत्राधिकार और प्रशासनिक बदलावों की वजह से मुकदमे का रिकॉर्ड इधर-उधर हो गया, जिसकी वजह से उसे अदालती कार्यवाही की सही जानकारी नहीं मिल सकी. बचाव पक्ष ने कोर्ट से यह भी कहा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है. वह ट्रायल के दौरान कोर्ट में पूरी तरह सहयोग करने करेगा.
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने जमानत अर्जी का विरोध किया. लेकिन ढिल्लो के वकील की दलीलों को चुनौती नहीं दी जा सकी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्य देखने के बाद माना कि पहली नजर में अभियुक्त ने पूर्व में मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया. न ही वह कानून की नजर में जानबूझकर फरार हुआ था. कोर्ट ने इन परिस्थितियों के आधार पर ढिल्लो को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
इन शर्तों के साथ कोर्ट ने दी जमानत
कोर्ट ने इसके साथ ही आदेश दिया कि ढिल्लो साक्ष्यों से छेड़छाड़ करे और मुकदमे की सुनवाई के दौरान नियमित रूप से ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहे. कोर्ट ने माना कि मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना, प्रथम दृष्टया जमानत का एक उपयुक्त मामला बनता है.किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर उसकी जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी.
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत देते समय की गई ये टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी के निस्तारण तक सीमित हैं. ट्रायल कोर्ट के जज गवाहों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे.
सुखविंदर सिंह ढिल्लो फरवरी में हुआ था गिरफ्तार
बता दें कि सुखविंदर सिंह ढिल्लो मूल रूप से पंजाब के कपूरथला का रहने वाला है. उस पर पंजाब में भी कई पुराने मामले दर्ज हैं. जेल से छूटने के बाद अगस्त 1995 के बाद से वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ. वह तब से ही फरार चल रहा था. यूपी एटीएस और नोएडा पुलिस को मोहाली में उसके होने का इनपुट मिला था. उसी इनपुट के आधार पर 18 फरवरी को उसे गिरफ्तार किया गया था.
ये भी पढ़ें-पीएम के वीडियो के बाद अपशब्द कहने वाली लड़की ने भी जारी किया वीडियो- मैं सिर्फ 15 साल की हूं, माफ कर दो
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं