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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में रेस्तरां और कैफे के स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का परोसने की अनुमति नहीं

इस मामले में खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का कोई अधिकार नहीं है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में रेस्तरां और कैफे के स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का परोसने की अनुमति नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में रेस्तरां और कैफे को लेकर बड़ा फैसला दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि रेस्तरां, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बने निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी ग्राहकों को हुक्का परोसने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत ने माना कि ऐसा करना तंबाकू और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से जुड़े कानूनों का उल्लंघन है. न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने हुक्का बार संचालन से जुड़ी मुख्य याचिका समेत सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया.

लाइसेंसधारक रेस्तरां ने मांगी थी अनुमति

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि जिन रेस्तरां के पास वैध खाद्य प्रतिष्ठान लाइसेंस है उन्हें निर्धारित स्मोकिंग एरिया में हुक्का परोसने की इजाजत दी जाए. साथ ही उन्होंने अपने कारोबार में पुलिस हस्तक्षेप से सुरक्षा की भी मांग की थी. हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि स्मोकिंग एरिया केवल सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध के तहत दी गई एक सीमित छूट है. इसका उद्देश्य किसी तरह की अतिरिक्त सेवा उपलब्ध कराना नहीं है.

हुक्का तैयार करना भी सेवा माना जाएगा

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वर्ष 2017 में नियमों में संशोधन के बाद "किसी अन्य सेवा" की जगह "किसी भी सेवा" शब्द का इस्तेमाल किया गया है. इससे कानून का दायरा और स्पष्ट हो गया है. कोर्ट ने कहा कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, कोयला लगाना, ग्राहक तक पहुंचाना या कोयला बदलना जैसी सभी गतिविधियां सेवा प्रदान करने की श्रेणी में आती हैं. इसलिए इन्हें निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी अनुमति नहीं दी जा सकती.

ग्राहकों द्वारा खुद हुक्का चलाने की दलील भी खारिज

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया था कि यदि तैयार हुक्का ग्राहक को दे दिया जाए और वह स्वयं उसका इस्तेमाल करे तो इसे सेवा नहीं बल्कि उपकरण किराये पर देना माना जाना चाहिए. अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हुक्का तैयार करने और उसे उपयोग योग्य बनाने की पूरी प्रक्रिया में सेवा का तत्व पहले से मौजूद रहता है. केवल ग्राहक के खुद हुक्का इस्तेमाल करने से गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदल जाती.

लाइसेंस देने का अधिकार नहीं, कार्रवाई कर सकती है पुलिस

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का कोई अधिकार नहीं है. वहीं पुलिस को सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के तहत तलाशी लेने, सामान जब्त करने और कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है.

साफ हवा का अधिकार ज्यादा महत्वपूर्ण

अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों का स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार अधिक महत्वपूर्ण है. यह अधिकार ऐसे कारोबार से ऊपर है जो प्रतिबंधित धूम्रपान गतिविधियों से जुड़ा हो.

कोर्ट ने माना कि रेस्तरां और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का बार संचालित करना तथा ग्राहकों को हुक्का परोसना संबंधित कानूनों के स्पष्ट उल्लंघन के समान है. इसी आधार पर अदालत ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए अपने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश भी दिया.

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