इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की हालत दिखाने वाला वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने वाले छात्र संगठन के सदस्य गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार को बड़ी राहत दी है. अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
स्कूल का वीडियो बनाने के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
मामला 16 अगस्त का बताया जा रहा है. याचिका के अनुसार गौरव भारती फर्रुखाबाद के करनपुर मजरा बसमल स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पहुंचे थे. वहां उन्होंने स्कूल की स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया. याचिका में कहा गया कि उस दिन स्कूल बंद था. वीडियो में स्कूल का जर्जर भवन दिखाई दे रहा था. साथ ही यह भी दिखाया गया कि परिसर में पानी भरा हुआ था जिसके कारण बच्चों के बैठने की व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और छुट्टियां देनी पड़ रही थीं.
19 अगस्त को दर्ज हुआ मुकदमा
इस वीडियो के बाद 19 अगस्त को फतेहगढ़ जिले के नवाबगंज थाने में गौरव भारती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 और 353 के साथ आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया. एफआईआर में आरोप लगाया गया कि उन्होंने संस्थान का वीडियो अवैध रूप से बनाया और स्कूल की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया.
खुद को बताया बच्चों के हित का मुद्दा उठाने वाला
गौरव भारती की ओर से अदालत में कहा गया कि वीडियो अच्छे इरादे से बनाया गया था. इसका उद्देश्य सरकारी विद्यालय की वास्तविक स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था. याचिका में यह भी कहा गया कि वीडियो सार्वजनिक हित में जारी किया गया था ताकि संबंधित विभाग स्कूल की समस्याओं पर ध्यान दे सके. याचिका के मुताबिक गौरव भारती सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. उनके इंस्टाग्राम पर करीब 2.5 लाख और फेसबुक पर लगभग 1.5 लाख फॉलोअर्स हैं. उनका कहना है कि वीडियो साझा करने का उद्देश्य केवल जनहित का मुद्दा उठाना था.
एफआईआर में लगाए गए आरोप
एफआईआर में दावा किया गया है कि गौरव भारती एक अज्ञात व्यक्ति के साथ स्कूल पहुंचे थे. शिकायत में आरोप है कि उनके साथ मौजूद व्यक्ति शराब के नशे में था और शिक्षकों से अनुपयुक्त बातें कर रहा था. इसी शिकायत के आधार पर 19 अगस्त को पुलिस ने मामला दर्ज किया.
कोर्ट में एफआईआर पर उठाए गए सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि एफआईआर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित अपमानजनक शब्द क्या थे और वे किसके लिए कहे गए थे. याचिका में कहा गया कि एफआईआर में न तो किसी हमले का आरोप है, न किसी प्रकार की हिंसा, धमकी या सरकारी कार्य में बाधा डालने का स्पष्ट विवरण दिया गया है. ऐसे में दर्ज धाराओं के आवश्यक तत्व इस मामले में दिखाई नहीं देते.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. साथ ही राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले में राज्य सरकार के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि दर्ज एफआईआर पर आगे क्या कार्रवाई होगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं