उत्तर प्रदेश की एक NIA/ATS अदालत ने 5 रोहिंग्या और 3 बांग्लादेशी नागरिकों समेत कुल 9 लोगों को अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज रखने और मानव तस्करी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट चलाने का दोषी ठहराते हुए 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी. अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश द्वारा शुक्रवार को जारी किये गये इस बयान में बताया गया कि गुरुवार को एक निचली अदालत ने इन नौ लोगों को अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज रखने और मानव तस्करी का दोषी ठहराते हुए आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई.
3 आरोपी 2021 में गाजियाबाद में हुए थे गिरफ्तार
NIA/ATS अदालत ने प्रत्येक पर 2,500-2,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया. बयान के अनुसार मोहम्मद नूर उर्फ नूरुल इस्लाम (बांग्लादेशी), रहमतुल्लाह (रोहिंग्या) और शबीउल्लाह (रोहिंग्या) को 26 जुलाई, 2021 को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज रखने और मानव तस्करी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था तथा उनके कब्जे से दो नाबालिग लड़कियों समेत तीन पीड़ित व्यक्तियों मुक्त कराया गया गया.
जांच के दौरान 6 और आरोपी पकड़ में आए
बयान के मुताबिक जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर अब्दुल शकूर, आले मियां , मोहम्मद इस्माइल , मोहम्मद रफीक उर्फ रफीकुल इस्लाम , बप्पन उर्फ अरशद मियां और मोहम्मद हुसैन के नाम सामने आए.
बयान के अनुसार उन्हें गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही के तहत जेल भेज दिया गया. जांच पूरी होने के बाद, एटीएस ने उपरोक्त सभी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया.
अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेज व मानव तस्करी के दोष सिद्ध
एटीएस ने बयान में कहा, ‘‘एटीएस द्वारा प्रस्तुत सबूतों और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, एनआईए/एटीएस की निचली अदालत (विचारण न्यायालय) ने उपरोक्त आरोपियों को अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेजों के कब्जे और मानव तस्करी का दोषी पाया तथा उन्हें आठ-आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई एवं उन पर 2,500-2,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया.''
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