आजकल के डिजिटल दौर में अधिकतर लोग व्हाट्सऐप (WhatsApp), फेसबुक (Facebook) या इंस्टाग्राम (Instagram) का इस्तेमाल करते ही हैं. काफी समय से ये ऐप्स लोगों के लिए एकदम फ्री रही हैं, लेकिन अब मेटा ने इनके लिए भी सब्सक्रिप्शन प्लान निकालना शुरू कर दिया है. लेकिन कई यूजर्स के मन में ये सवाल आता है कि इतने समय मुफ्त रहने के बाद, अब Meta इन चार्ज करना क्यों शुरू कर रहा है. आज हम आपको इसी के बार में विस्तार से बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...
क्या है सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत?
मार्क जुकरबर्ग की कंपनी Meta जो WhatsApp, Instagram और Facebook की पैरेंट कंपनी है, उसने अपने प्रमुख ऐप्स के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान शुरू किए हैं. इसके तहत कंपनी बिजनेस, क्रिएटर्स और Meta AI यूजर्स के लिए भी नए पेड फीचर्स टेस्ट कर रही है. Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत करीब 99 रुपये प्रति महीने है, जबकि WhatsApp Plus भी 99 रुपये प्रतिमाह में मिलता है, जिसमें भारत में अभी 6 महीने के लिए 50% छूट दी जा रही है. इसके अलावा यूजर्स के लिए Meta ज्यादा एडवांस फीचर्स वाले प्रीमियम प्लान भी टेस्ट कर रही है.
Meta One Plus की कीमत लगभग 775 रुपये प्रति महीने है, जबकि Meta One Premium प्लान करीब 1,939 रुपये प्रति महीने में आता है, जिसमें यूजर्स को ज्यादा एडवांस AI फीचर्स और ज्यादा कंटेंट जनरेट करने की सुविधा मिलती है. वहीं, Meta के प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp, Instagram, Facebook को दुनिया भर में करीब 3.5 अरब लोग रोजाना इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सर्विस कंपनियों में शामिल है.

आखिर Paid Subscriptions को क्यों बढ़ावा दे रहा Meta?
एनालिस्ट का मानना है कि Meta का यह कदम तेजी से बढ़ती AI कोस्ट को संभालने की कोशिश है, क्योंकि कंपनी इस क्षेत्र में पीछे चल रही है और अब तेजी से आगे बढ़ना चाहती है. इसी वजह से Meta ने Scale AI के फाउंडर एलेक्जेंडर वांग को अपने Superintelligence Lab का लीड करने के लिए करीब 14.3 अरब डॉलर की बड़ी डील की है, जिस पर निवेश के रिटर्न को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. कंपनी ने 2026 के लिए अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर 125 से बढ़ाकर 145 अरब डॉलर तक कर दिया है, जिसका बड़ा हिस्सा AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर पर खर्च किया जाएगा.
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Meta की AI योजनाएं सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में भी तेजी से बढ़ रही हैं. इसके चलते भारत में Meta ने Reliance Industries के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत गुजरात के जामनगर में एक AI डेटा सेंटर बनाया जा रहा है.

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Techarc के चीफ एनालिस्ट ने क्या कहा?
Techarc के चीफ एनालिस्ट और फाउंडर फैसल कावोसा ने NDTV को बताया
कंपनी में चल रही कई समस्याएं
रिपोर्ट्स के मुताबिक AI पर भारी खर्च के बावजूद Meta के अंदर कई तरह की समस्याएं भी चल रही हैं, जैसे डेटा से जुड़ी दिक्कतें जिनकी वजह से इंजीनियरों की जिम्मेदारियां बदली जा रही हैं, और नए आने वाले टैलेंट (जैसे वांग) को दिए जा रहे ज्यादा सैलरी को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी. इसके अलावा, AI से जुड़े बदलावों के कारण Meta ने अपने करीब 10% कर्मचारियों की छंटनी की, जिसके बाद कंपनी के अंदर असंतोष और भी बढ़ता नजर आ रहा है.

2030 तक हर साल 20 अरब डॉलर की कमाई
Truist Securities के मुताबिक, सब्सक्रिप्शन से 2030 तक हर साल करीब 20 अरब डॉलर की अच्छी कमाई हो सकती है. वहीं Deutsche Bank का कहना है कि अगले साल ही इन सब्सक्रिप्शन से लगभग 15.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय मिल सकती है. हालांकि, बाजार के कई एक्सपर्ट्स इन बड़े अनुमानों को लेकर अब भी पूरी तरह सहमत नहीं हैं.
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पिछले साल विज्ञापनों से ज्यादा कमाई
यूजर्स को आकर्षित नहीं कर रहे यूजर्स
फिलहाल यूजर्स प्रीमियम फीचर्स को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि ये अभी पैसे देकर इस्तेमाल करने जैसे नहीं लग रहे हैं. अभी शुरुआत ही है, लेकिन प्रोफाइल कस्टमाइजेशन, स्टोरी रिवॉच काउंट, सीक्रेट स्टोरी व्यू और ज्यादा चैट पिन जैसे फीचर्स आम लोगों को ज्यादा आकर्षित नहीं कर रहे हैं.
AI एक्सपर्ट और AiEnsured के CTO श्रीनिवास पद्मनाभुनी Meta के इस नए पैसे कमाने के तरीके को स्टॉपगैप मानते हैं. उन्होंने NDTV को बताया,
'Meta के ये पेड प्लान अभी ऐसे लगते हैं जैसे पावर यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हों और AI पर हो रहे खर्च को पूरा करने के लिए एक अस्थायी तरीका हों, जब तक कंपनी अपने निवेश (ROI) से सही फायदा नहीं कमा लेती.'
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