IFSC and MICR Code Difference: डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के इस दौर में IFSC और MICR कोड दो ऐसे तकनीकी शब्द हैं, जिनका सामना हमें लगभग हर बार पैसे ट्रांसफर करते समय या चेक बुक का इस्तेमाल करते समय करना पड़ता है. अक्सर लोग इन दोनों के बीच कन्फ्यूज हो जाते हैं, लेकिन बैंकिंग सेफ्टी और सही खाते में पैसा पहुंचाने के लिए इनका अंतर समझना बेहद जरूरी है. IFSC Code का मुख्य इस्तेमाल NEFT, RTGS और IMPS जैसे ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए बैंक ब्रांच की पहचान करने में होता है, वहीं MICR Code चेक की प्रोसेसिंग और क्लियरिंग को तेज और सटीक बनाने के लिए उपयोग किया जाता है. आइए इन दोनों के बारे में विस्तार से जानते हैं...
यह भी पढ़ें: AI Impact Summit 2026: दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी, 16 से 20 फरवरी तक घर से निकलने से पहले जान लें कौन से रास्त रहेंगे प्रभावित
क्या होता है IFSC कोड?
IFSC का मतलब इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड (Indian Financial System Code) होता है. यह एक खास कोड है जिसका इस्तेमाल देशभर के उन बैंकों की पहचान के लिए किया जाता है जो NEFT, RTGS, IMPS या अन्य ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सेवाओं में हिस्सा लेते हैं. IFSC कोड की मदद से पैसे भेजने का प्रोसेस सुरक्षित और आसान हो जाता है.
IFSC कोड 11 अंकों का होता है और हर बैंक शाखा का अलग-अलग IFSC कोड होता है. इस 11 अंक के कोड में पहले चार अक्षर (A-Z) बैंक के नाम को दर्शाते हैं, पांचवां अक्षर हमेशा '0' होता है और भविष्य में उपयोग के लिए रिजर्व रहता है और आखिरी 6 अंक बैंक ब्रांच कोड को दर्शाते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर आपका IFSC कोड ICIC0111001 है, तो इसमें ICIC बैंक का नाम (ICICI Bank) और 111001 ब्रांच कोड है.

क्या होता है MICR कोड?
MICR का मतलब मैगनेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन (Magnetic Ink Character Recognition) होता है. यह एक खास कोड है जिसे आप हर बैंक चेक पर देख सकते हैं. यह कोड चेक के नीचे मौजूद MICR बैंड पर लिखा होता है. MICR कोड का उद्देश्य बैंकिंग ट्रांजैक्शन की सुरक्षा बढ़ाना और चेक की तेजी से पहचान करना है. यह तकनीक काफी समय से उपयोग में है और आज भी चेक की पहचान करने के लिए भरोसेमंद मानी जाती है.
MICR कोड 9 अंकों का होता है. इसमें पहले तीन अंक शहर का कोड (City Code), अगले तीन अंक बैंक का कोड (Bank Code) और आखिरी तीन अंक शाखा का कोड (Branch Code) दर्शाते हैं. साथ ही MICR को एक विशेष मैग्नेटिक इंक से लिखा जाता है, जिसे मैग्नेटिक स्कैनर आसानी से पढ़ लेता है. अगर किसी ने चेक से छेड़छाड़ करने की कोशिश की हो, तो यह सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेता है.