Cancer Drug Price Scam: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों से दवाओं के नाम पर की जा रही बेतहाशा वसूली पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में गहरा आक्रोश व्यक्त किया है. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाए. कोर्ट को जब यह बताया गया कि खुदरा विक्रेताओं को महज 2,700 रुपये में मिलने वाली कैंसर की दवा की MRP 27,000 रुपये करके बेचा जा रहा है, तो पीठ ने इसे दिन-दहाड़े डकैती करार दिया.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पताल मरीजों को अपने ही फार्मेसी से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर करते हैं. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दवाओं पर अत्यधिक मार्कअप को रोकने और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए दवा मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 को सख्ती से लागू किया जाए.
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मनमाना दाम तय करने की नहीं है इजाजत
दरअसल, देश में जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार ने औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 लागू किया था. इसके तहत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण आवश्यक दवाओं की अधिकतम कीमत तय करता है, ताकि कोई भी कंपनी या मेडिकल स्टोर मरीजों से अत्यधिक मुनाफा न कमा सके.
आवश्यक दवाओं को किफायती बनाने का है कानून
औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 यानी DPCO 2013 भारत सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी है. इसे रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की ओर से आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था. इस आदेश को पूरे देश में लागू करने, दवाओं की कीमतों पर निगरानी रखने और मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाने की मुख्य जिम्मेदारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की है. इसका सीधा उद्देश्य आम नागरिकों को महंगी दवाओं के वित्तीय बोझ से बचाना है.
ऐसे तय होते हैं दवाओं के अधिकतम दाम
2013 से पहले दवाओं के दाम उत्पादन लागत के आधार पर तय होते थे, लेकिन DPCO 2013 लागू होने के बाद मार्केट-बेस्ड प्राइसिंग फॉर्मूला अपनाया गया. इसके तहत किसी भी आवश्यक दवा का अधिकतम मूल्य तय करने के लिए, बाजार में 1 प्रतिशत या उससे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले सभी ब्रांड्स की औसत कीमत निकाली जाती है. इस निकाले गए औसत मूल्य में 16 प्रतिशत रिटेलर मार्जिन जोड़कर दवा की अधिकतम खुदरा कीमत निर्धारित की जाती है.
दवाओं के मनमाना दाम बढ़ाने पर सजा के प्रावधान
नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के मामले में, कोई भी दवा कंपनी पिछले 12 महीनों के दौरान अपनी दवा की MRP 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ा सकती है. अगर कोई फार्मा कंपनी या रिटेलर तय सीमा से ज्यादा कीमत वसूलता है, तो NPPA को अधिकार है कि वह वसूली गई अतिरिक्त राशि को ब्याज सहित जब्त करे और संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे.
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MRP से अधिक वसूली या मुनाफाखोरी की ऐसे करें शिकायत
अगर कोई दुकानदार, मेडिकल स्टोर या कंपनी किसी सामान या दवा पर तय MRP से अधिक पैसे वसूलती है या अनुचित मुनाफाखोरी करती है, तो ग्राहकों को खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है. उनके खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करें शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. राष्ट्रीय उपभोक्ता पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. इसके अलावा WhatsApp 8800001915 पर मैसेज भेजकर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. इसके लिए NCH App या UMANG App डाउनलोड करके शिकायत दर्ज करें. अगर आप खुद जाकर शिकायत करना चाहते हैं तो अपने राज्य के Legal Metrology Department या जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) या जिला मजिस्ट्रेट के पास भी शिकायत दे सकते हैं.
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