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शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच SIP बंद कर FD में स्विच करना सही है? जान लीजिए एक्सपर्ट की सलाह

SIP vs FD Returns: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के जनवरी 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि बंद किए गए सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की संख्या नए SIP रजिस्ट्रेशन से ज्यादा हो गई है.

शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच SIP बंद कर FD में  स्विच करना सही है? जान लीजिए एक्सपर्ट की सलाह
Mutual fund SIP: मार्केट में वोलैटिलिटी के चलते कई निवेशक घबरा कर पहले ही अपनी SIP बंद कर चुके हैं.
नई दिल्ली:

भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) लंबे समय से  गिरावट देखा रहा है. इस वजह से निवेशकों को पिछले कई महीनों से निगेटिव रिटर्न मिल रहा है. पिछले पांच महीनों में  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी अपने सर्वकालिक उच्चस्तर से 14 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है जबकि BSE सेंसेक्स अपने रिकॉर्ड स्तर से 13.23 प्रतिशत नीचे आ चुका है. ऐसे में उनके मन में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या उन्हें अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plans - SIP) को बंद कर देना चाहिए और फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits - FD) जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करना चाहिए.

मार्केट में वोलैटिलिटी के चलते कई निवेशक तो घबरा के पहले ही अपनी SIP बंद कर चुके हैं. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के जनवरी 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि बंद किए गए सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की संख्या नए SIP रजिस्ट्रेशन से ज्यादा हो गई है.

SIP -पॉपुलर इन्वेस्टमेंट टूल

SIP एक बहुत ही पॉपुलर इन्वेस्टमेंट टूल है, इसके जरिए निवेशक म्यूचुअल फंड (Mutual fund SIP) में नियमित रूप से एक छोटी राशि निवेश करते हैं. SIP को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसे बाजार के उतार-चढ़ाव से फायदा मिले. हालांकि, जब मार्केट लंबे समय तक अस्थिर रहता है, तो निवेशक  निगेटिव रिटर्न देखकर परेशान होने लगते हैं.
दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर निश्चित रिटर्न मिलता है मार्केट का इसके रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ता. इसलिए इसे कम रिस्क वाला निवेश माना जाता है. जब मार्केट बहुत वोलेटाइल हो तब निवेशकों को यह एक आकर्षक विकल्प लग सकता है. लेकिन क्या SIP से FD पर स्विच करना सही कदम है?

अगर पिछले आंकड़ो को देखें तो इक्विटी मार्केट ने शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव के बावजूद, लंबी अवधि में पॉजिटिव रिटर्न दिया है. मंदी के दौरान SIP बंद करने से कंपाउंडिंग पर असर पड़ेगा और जब मार्केट रिकवर होगा तो इसका फायदा निवेशकों को नहीं मिल सकेगा.

क्या निवेश बने रहना चाहिए?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट अक्सर मार्केट में मंदी के दौरान जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचने की सलाह देते हैं. SIP को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लॉन्ग टर्म में ये अच्छा रिटर्न दे. वोलेटाइल मार्केट में SIP को कंटिन्यू करके, निवेशक कम कीमतों पर ज्यादा यूनिट खरीद सकते हैं. जब मार्केट में वापस तेजी आएगी तो इससे निवेशकों को ज्यादा फायदा हो सकता है.

मंदी के दौरान SIP बंद करने से नुकसान होता है और फ्यूचर ग्रोथ से फायदा कमाने का अवसर निवेशक चूक जाते हैं. हिस्टोरिकल डेटा से पता चलता है कि समय के साथ मार्केट में सुधार होता है, जिससे मंदी के समय में धैर्य रखने वाले निवेशकों को आगे जाकर फायदा मिलता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा सही विकल्प?

फिक्स्ड डिपॉजिट रिस्क से बचने वाले निवेशकों या शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल गोल रखने वाले निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प है. इसमें निवेश के समय ही निवेशक को पता होता है कि उसे FD मैच्योर होने पर कितना रिटर्न मिलेगा यानी इसमें कोई रिस्क नहीं है. हालांकि ये याद रखना जरूरी है, FD पर मिलने वाला रिटर्न आमतौर पर इक्विटी की तुलना में कम होता है, खासकर जब महंगाई के हिसाब से एडजस्ट किया जाता है.

रिटायरमेंट प्लान या वेल्थ क्रिएशन जैसे लॉन्ग टर्म गोल के लिए, सिर्फ FD पर निर्भर रहना काफी नहीं है. अपनी वोलैटिलिटी के बावजूद, इक्विटी ने लंबे समय में दूसरे इन्वेस्टमेंट टूल से बेहतर परफॉर्म किया है.

अपना फाइनेंशियल गोल बनाएं

SIP बंद करने और FD में निवेश करने का निर्णय आपके फाइनेंशियल गोल, रिस्क उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि पर निर्भर होना चाहिए. यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और मार्केट के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो SIP में निवेशित बने रहना बेहतर विकल्प हो सकता है.

हालांकि, अगर आपने शॉर्ट टर्म गोल के लिए निवेश किया है या फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं, तो अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा FD में निवेश करना एक समझदारी वाला कदम हो सकता है. इक्विटी और फिक्स्ड -इनकम इन्वेस्टमेंट दोनों को मिलाकर एक बैलेंस्ड अप्रोच रखने से अपने रिस्क को कम करने में मदद मिल सकती है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए? 

1. अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करें (Review Your Portfolio): अपने वर्तमान निवेश का आकलन करें और यह सुनिश्चित करें कि वे आपके लक्ष्यों के मुताबिक हो.

2. भावनात्मक निर्णय लेने से बचें (Avoid Emotional Decisions): मार्केट में गिरावट से तनाव हो सकता है, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया निर्णय अक्सर गलत साबित होता है.

3. फाइनेंशियल एडवाइजर से कंसल्ट करें (Consult a Financial Advisor): फाइनेंशियल एडवाइजर (Financial Advisor) आपकी फाइनेंशियल स्थिति को समझते हुए सही निर्णय लेने में आपकी मदद कर सकता है.

4. डायवर्सिफिकेशन के बारे में सोचें (Consider Diversification): SIP को पूरी तरह से बंद के बजाय, इक्विटी और फिक्स्ड इनकम दोनों में निवेश करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें. हालांकि फिक्स्ड डिपॉजिट सेफ्टी और स्टेबिलिटी ऑफर करते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए वोलेटाइल मार्केट के दौरान SIP को रोकना अच्छी स्टैटजी नहीं हो सकती है. मार्केट में गिरावट अस्थायी होती है, और गिरावट के दौरान SIP में निवेशित बने रहने से आगे जाकर काफी फायदा मिल सकता है.

याद रखिए धैर्य और अनुशासन ही सफल निवेश की कुंजी है. इसलिए शॉर्ट टर्म मार्केट मूवमेंट पर प्रतिक्रिया करने के बजाय, अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग पर टिके रहना अक्सर सबसे समझदारी वाला विकल्प होता है.
 

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