स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा को देखते हुए उत्तर प्रदेश में स्कूली बसों का फिटनेस चेक अभियान चलाया जाएगा. ये अभियान 1 जुलाई से लेकर 31 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर चलाया जाएगा. अभियान का लक्ष्य न केवल नियम लागू करना है, बल्कि स्कूल परिवहन को एक सुरक्षित जवाबदेह और पारदर्शी सेवा बनाना है. अभियान के तहत बसों की तकनीकी खराबी, फिटनेस, सेफ्टी स्टैंडर्स की जांच की जाएगी. साथ ही चालकों का भी वेरिफिकेशन किया जाएगा.
अभियान में क्या-क्या होगा जांच?
जांच में बस बॉडी की संरचना, बस की छत की निर्धारित भार मानक के अनुसार मजबूती, सीट और सीट एंकरेज टेस्ट, बॉडी चेसिस माउंटिंग टेस्ट, आपातकालीन गेट इत्यादि पर विशेष फोकस रहेगा. साथ ही बसों में क्षमता के अनुरूप (02 केजी) एबीएस टाइप, ड्राई पाउडर, फायर उपकरण की जांच की जाएगी.
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गोल्डन यलों रंगों में रंगा होना जरूरी
अभियान के दौरान यह भी देखा जाएगा कि स्कूल बसों के लिए अधिनियम 125-सी सीएमवीआर 1989 के उपनियम 02 के तहत विशेष मानक निर्धारित किए गए है. उनका पालन किया जा रहा है या नहीं. इसके अंतर्गत बसों को गोल्डन यलों रंगों में रंगा होना, उसमें स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना अनिवार्य है.
सेफ्टी के लिए जरूरी नियम
बस में आपातनिकास, स्टॉप सिंग्नल आर्म, हैजर्ड वार्निंग सिस्टम एवं बच्चों की आवश्यकता के अनुसार डिजाइन भी अनिवार्य है. बसों में स्पीड गवर्नर इलेक्ट्रानिक उपकरण, जो वाहन की अधिकतम गति निर्धारित सीमा से अधिक नही होने देता है, भी लगा होना चाहिए. स्कूल बसों की अधिकतम स्पीड 40किमी प्रतिघंटा निर्धारित है. इसके अलावा बसों में ब्रेक सिस्टम, टायर और सस्पेंशन, लाइटिंग और इंडिकेटर्स के साथ-साथ वैलिड डॉक्यूमेंट्स जैसे आरसी, परमिट बीमा, पीयूसी और वैध फिटनेस की भी जांच की जाएगी.
नियम तोड़ने पर क्या होगा?
अभियान में नियमानुसार बसों की फिटनेस की जांच की जाएगी. निरीक्षण में अनियमितता पाए जाने पर उनके खिलाफ चालान, वाहन सीज, फिटनेस सस्पेंशन जैसी की कार्यवाही की जाएगी.
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