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ट्रेन में इलेक्ट्रिक चूल्हा और हीटर इस्तेमाल करने पर कितने साल की होगी सजा, जानिए क्या कहता है नियम

Railway Rules: ट्रेन के अंदर इलेक्ट्रिक स्टोव, हीटर या इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है. रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है, क्योंकि कोच के अंदर अत्यधिक बिजली की खपत और खुले हीटिंग उपकरणों से आग लगने का खतरा बढ़ सकता है.

ट्रेन में इलेक्ट्रिक चूल्हा और हीटर इस्तेमाल करने पर कितने साल की होगी सजा, जानिए क्या कहता है नियम
भारतीय रेल
Central Railway/ X

Railway Rules: देश भर में रोजाना लाखों लोग रेल से यात्रा करते हैं. चाहे लंबी दूरी की यात्रा हो या कुछ घंटों की, रेलगाड़ी आम आदमी के लिए जीवन रेखा है. यही कारण है बहुत से लोग ट्रेन में अपने साथ बिजली के चूल्हे, हीटर या केतली जैसे उपकरण ले जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं ट्रेन में इलेक्ट्रिक चूल्हा और हीटर का इस्तेमाल करना सही है या नहीं, ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर भारतीय रेलवे का क्या नियम कहता है और इस पर कितने साल की सजा हो सकती है.  

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भारतीय रेलवे का क्या कहता है नियम?

ट्रेन के अंदर इलेक्ट्रिक स्टोव, हीटर या इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है. रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है, क्योंकि कोच के अंदर अत्यधिक बिजली की खपत और खुले हीटिंग उपकरणों से आग लगने का खतरा बढ़ सकता है. एक छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. रेलवे नियमों के अनुसार, ज्वलनशील या गर्मी उत्पन्न करने वाले उपकरण प्रतिबंधित हैं. इनमें इलेक्ट्रिक स्टोव, रोड हीटर और इंडक्शन कुकर जैसे उपकरण शामिल हैं. भले ही आपके पास आरक्षण हो, कोच में लगे पावर पॉइंट का उपयोग केवल मोबाइल फोन या लैपटॉप चार्ज करने के लिए किया जा सकता है, खाना पकाने के लिए नहीं.

हालांकि, कई यात्रियों को लगता है कि अगर कोई उपकरण छोटा है और कम बिजली इस्तेमाल करता है, तो वह शायद काम करेगा. हालांकि, ट्रेनों की वायरिंग सीमित भार के लिए डिजाइन की गई है अत्यधिक भार से शॉर्ट सर्किट, चिंगारी या आग लग सकती है. यदि कोई यात्री इन नियमों का उल्लंघन करते हुए या ऐसे उपकरणों का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर रेलवे अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. रेलवे सुरक्षा बल (आरपीई) या रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है.

रेलवे यात्रा के दौरान खाने-पीने की जरूरतों के लिए वेंडर और पैंट्री कार उपलब्ध कराती है. कई ट्रेनें ई-कैटरिंग सेवा भी प्रदान करती हैं, जिससे आप अपनी सीट पर ही खाना ऑर्डर कर सकते हैं. सूखा खाना, रेडी-टू-ईट फूड पैकेट या थर्मस में पहले से बनी चाय ले जाना एक सुरक्षित विकल्प है.

कितने साल की सजा होगी

ट्रेनों में सैकड़ों लोग एक साथ यात्रा करते हैं. एक यात्री की लापरवाही दूसरों के लिए खतरा बन सकती है. ऐसे मामलों में, रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. आग लगने की स्थिति में, रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम की धारा 154 के तहत जुर्माना और दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

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