गर्मी के मौसम में बिजली का बढ़ता बिल हर घर की बड़ी चिंता बन जाता है. ऐसे में अगर आपका बिजली बिल शून्य हो जाए तो इससे बड़ी राहत शायद ही कोई हो. केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' इसी उद्देश्य के साथ चलाई जा रही है और अब यह देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. 18 जून 2026 तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 35.14 लाख से ज्यादा सोलर इंस्टॉलेशन किए जा चुके हैं. इससे 42.86 लाख से ज्यादा परिवारों को सीधा लाभ मिला है. सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए 1 करोड़ परिवारों तक पहुंचना है.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा लोग उठा रहे हैं फायदा?
इस योजना को अपनाने में अलग-अलग राज्यों के बीच अच्छी होड़ देखी जा रही है.
- गुजरात इस योजना में फिलहाल पहले स्थान पर है. यहां 7.05 लाख से अधिक सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं और 10.16 लाख से ज्यादा घर योजना से जुड़ चुके हैं.
- महाराष्ट्र में भी योजना तेजी से आगे बढ़ रही है. यहां लगभग 9.86 लाख से अधिक घरों को लाभ मिल रहा है.
- उत्तर प्रदेश में अब तक 6.03 लाख से अधिक सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं. इससे 6.18 लाख से ज्यादा परिवारों को फायदा मिल रहा है.
- वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब तक 9,110 इंस्टॉलेशन के जरिए 13,689 घरों को योजना का लाभ मिला है.
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव जे.वी.एन. सुब्रमणयम के अनुसार, 3 किलोवॉट क्षमता के सोलर सिस्टम पर सरकार 78,000 रुपये तक की सब्सिडी देती है.
- 3 किलोवॉट सिस्टम की कुल लागत लगभग 1.60 लाख रुपये आती है.
- इसमें करीब 60% तक सहायता सरकार की ओर से मिलती है.
- सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है.
- पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 45 दिनों के अंदर पूरी हो जाती है.
संयुक्त सचिव जे.वी.एन. सुब्रमणयम ने बताया सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बना दिया है. आवेदन करने के लिए-
- पीएम सूर्य घर पोर्टल या WhatsApp के माध्यम से घर बैठे आवेदन किया जा सकता है.
- पोर्टल पर लगभग 30,000 रजिस्टर्ड वेंडर सूचीबद्ध हैं. उनकी रेटिंग देखकर अपनी पसंद का वेंडर चुना जा सकता है.
- वेंडर चुनने के बाद आमतौर पर 15 से 20 दिनों के अंदर सोलर पैनल लगा दिए जाते हैं.
- इंस्टॉलेशन के बाद DISCOM अधिकारी लगभग एक हफ्ते के अंदर निरीक्षण करते हैं. जांच पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है.
संयुक्त सचिव ने आगे बताया कि फरवरी 2024 में शुरू हुई इस स्कीम की पहुंच अब आम लोगों तक तेजी से बढ़ रही है. रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही 3 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई गई है और अब हर 7-8 दिनों में 1 लाख नए लोग जुड़ रहे हैं. इस तेजी के कई कारण हैं जैसे 10 किलोवॉट तक के सेटअप के लिए अब फिजिबिलिटी क्लियरेंस की जरूरत नहीं है. फिजिकल विजिट की बाध्यता हटाकर पूरी प्रक्रिया को ऑटो-फिजिबिलिटी पर डाल दिया गया है.
संयुक्त सचिव ने जानकारी दी कि योजना के तहत सोलर वेंडर और टेक्निशियन सहित करीब 2 लाख लोगों को ट्रेन किया गया है, जिससे एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार हुआ है. इंस्टॉलेशन के बाद 5 साल की वारंटी दी जा रही है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति सोलर सिस्टम लगाने के लिए एकमुश्त रकम खर्च नहीं करना चाहता, तो उसे बैंक के माध्यम से लोन भी मिल सकता है. 5.75% ब्याज दर पर ऋण की सुविधा उपलब्ध है. 2 लाख रुपये से अधिक तक का लोन लिया जा सकता है. यह योजना मार्च 2027 तक प्रभावी है.
वेस्ट एशिया संकट के बीच भी महत्वपूर्ण है योजनासंयुक्त सचिव ने आगे कहा कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है. छत पर लगे सोलर पैनल से घर में इंडक्शन कुकिंग की जा सकती है, जिससे LPG पर निर्भरता कम हो सकती है. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्ज किए जा सकते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल का खर्च घटाया जा सकता है. यानी यह योजना न केवल बिजली बचाने का माध्यम बन रही है, बल्कि भविष्य की स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा व्यवस्था की ओर भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
क्या सचमुच बिजली बिल जीरो हो सकता है?दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव निवासी रविंद्र कुमार गुरेजा ने बताया,
वहीं, कालकाजी में रहने वाले अमर खन्ना ने अपने छत पर दो सोलर लगवाए हैं. अमर खन्ना ने बताया,
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