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क्या प्याज की बढ़ती कीमत ने शुरू कर दिया है रुलाना, तो जानिए इस सरकारी योजना से कैसे मिलेगी राहत

इस साल प्याज के बफर स्टॉक में कमी की वजह से केंद्र सरकार ने पूरा स्टॉक सीधे रिटेल मार्केट में बेचने का फैसला किया है. जानिए कब शुरू होगी रियायती दर पर बिक्री और इससे आम जनता को महंगाई से कितनी राहत मिलेगी.

क्या प्याज की बढ़ती कीमत ने शुरू कर दिया है रुलाना, तो जानिए इस सरकारी योजना से कैसे मिलेगी राहत
प्याज की कीमतों पर काबू पाने की नई रणनीति: होलसेल मंडियों की जगह अब सीधे रिटेल में बिकेगा सरकारी बफर स्टॉक
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Onion Price Hike: देश में प्याज की बढ़ती महंगाई और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, इस साल सरकार अपने पूरे प्याज बफर स्टॉक को थोक (Wholesale) मंडियों में जारी करने के बजाय सीधे रिटेल आउटलेट्स (Retail Sales) के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगी. बताया जा रहा है कि यह फैसला प्याज की कम खरीद और बफर स्टॉक के सीमित होने के कारण लिया गया है.

बफर स्टॉक में कमी और खरीद में चुनौतियां

केंद्र सरकार ने इस सीजन में प्याज का बफर स्टॉक तैयार करने के लिए 2 लाख टन का लक्ष्य रखा था. हालांकि, कई तरह की व्यावहारिक और तकनीकी अड़चनों की वजह से लगभग 1.2 लाख टन प्याज ही खरीदा जा सका. दरअसल, बाजार में प्याज के दाम ऊंचे होने की वजह से किसान सरकारी एजेंसियों को बेचने से कतरा रहे थे, जिसके चलते सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य में 6 बार बढ़ोतरी करनी पड़ी. इसके अलावा, खरीद और भंडारण करने वाली एजेंसियों की परिचालन चुनौतियों के कारण भी प्रक्रिया धीमी रही. ऐसे में माना जा रहा है कि खराब और स्टोरेज नुकसान को काटकर लगभग एक लाख टन प्याज ही बाजार में उतारने के लिए उपलब्ध है. 

कब से शुरू होगी बिक्री और क्या है प्लान?

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बफर स्टॉक की बिक्री अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में शुरू करने की योजना है. इस दौरान हर दिन लगभग 800 टन प्याज बाजार में बेचे जाएंगे. लगभग 125 दिनों तक रियायती बिक्री जारी रह सकती है. दिल्ली-NCR, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे प्रमुख उपभोक्ता शहरों में प्याज की बिक्री की जाएगी. NAFED और NCCF के रिटेल आउटलेट्स और मोबाइल वैन के जरिए ये प्याज बेचे जाएंगे. 

जुलाई में 22.5%  पर पहुंची प्याज की महंगाई दर

चालू वित्त वर्ष के जुलाई महीने में प्याज की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 22.5% पर पहुंच गई है, जो जून में महज 4.7% थी. हालांकि, खरीफ फसल की बुवाई में देरी और उत्पादन कम रहने की आशंकाओं के बावजूद, फिलहाल रिटेल बाजारों में प्याज की औसत कीमत 50 रुपये प्रति किलो के आसपास स्थिर बनी हुई है. सरकार का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक नई खरीफ फसल की आवक शुरू होने तक इस 125 दिवसीय रिटेल बिक्री से कीमतें नियंत्रित रखी जा सकेंगी.

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सरकार के कदम से कम हो सकती है महंगाई

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक प्याज प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौती इसका सुरक्षित रखरखाव और सही समय पर बाजार में उतारना है. सीधे रिटेल मार्केट में प्याज बेचने से खुदरा कीमतों पर तुरंत असर पड़ता है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगाई से सीधी और त्वरित राहत मिलती है.

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