वाराणसी. दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक बनारस है. यह वह जगह है जहां इंसान जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष पाने आता है. तीसरी बार काशी पहुंचीं अमेरिकी ट्रैवलर और यूट्यूबर जेसिका सवानो के लिए यह दौरा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जिंदगी का फलसफा बदलने वाला आध्यात्मिक अनुभव साबित हुआ. जेसिका के पांच महीने पहले अपलोड किया वीडियो इन दिनों इंटरनेट वायरल मचा रहा है. जिसका टाइटल- "इन्साइड वाराणसी, इंडिया: द सिटी ऑफ डेथ दैट चेंज्ड मी" है. इसमें उन्होंने बनारस आकर खुद में बदलाव और जीने का नजरिया ही बदल दिया है.
गंगा की अलौकिक शांति ने कर दिया मंत्रमुग्ध
पश्चिम के बेहद शांत और अनुशासित शहरों से निकलकर जब आप बनारस की संकरी गलियों में कदम रखते हैं, तो यहां की अफरातफरी भी खूबसूरत लगने लगती है. तंग रास्तों पर गूंजते मंत्र और हर मोड़ पर उमड़ती जिंदगी. जब जेसिका इन गलियों से गुजरकर दशाश्वमेध घाट पहुंचीं, तो शाम की गंगा आरती का नजारा मंत्रमुग्ध कर देने वाला था. शंखनाद, अग्नि की लपटें और हवा में तैरती धूप की खुशबू ने मानो रूह को किसी दूसरी ही दुनिया से जोड़ दिया.
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मणिकर्णिका: यहां अहंकार चूर-चूर हो गया
आरती के बाद जेसिका सीधे उस घाट पर पहुंचीं, जहां सदियों से चिताएं शांत नहीं हुई हैं. मणिकर्णिका घाट पर रोज 150 से 200 पार्थिव शरीरों का अंतिम संस्कार होता है. माना जाता है कि यहां की पवित्र अग्नि हजारों साल से लगातार जल रही है. लकड़ियों के ढेर, उड़ती राख और गंगा में विसर्जित होती अस्थियों को देखकर जेसिका स्तब्ध रह गईं. उन्होंने महसूस किया कि अंत में हम सब सिर्फ राख और मिट्टी हैं. यहां आकर सारा अहंकार खत्म हो जाता है.
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सुबह-सुबह क्या देख हैरान रह गई जेसिका?
सुबह 5 बजे की कड़कड़ाती ठंड में गंगा की लहरों पर नाव से सूर्योदय देखना किसी सपने जैसा था. घाटों से आती घंटियों की आवाज और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच जेसिका ने देसी घी के साथ इडली-सांभर का लुत्फ उठाया. वहीं, प्राचीन पत्थरों के बीच रचे-बसे स्टारबक्स को देखकर वे हैरान रह गईं कि यह शहर अपनी सदियों पुरानी विरासत को खोए बिना नए दौर को कैसे अपना लेता है.
भारतीयों से मिला अमेरिकी यूट्यूबर को जबरदस्त प्यार
घाटों पर टहलते हुए जेसिका को भारतीय लोगों का भरपूर प्यार मिला. कहीं कोई सेल्फी की गुजारिश कर रहा था, तो कोई एलन मस्क और ब्रह्मांड के रहस्यों पर अपनी राय दे रहा था. जेसिका कहती हैं कि भारत को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली नकारात्मक बातों पर कतई ध्यान मत दीजिए. जब तक आप खुद यहां आकर इस मिट्टी को महसूस नहीं करेंगे, तब तक भारत की आत्मा को समझ नहीं पाएंगे.
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बनारस ने दिया सबसे बड़ा सबक
गंगा के विहंगम नजारे के सामने बैठकर दाल-चावल खाते हुए जेसिका को जीवन का सबसे बड़ा सच समझ आया. बनारस ने उन्हें सिखाया कि इस दुनिया में कुछ भी हमेशा के लिए नहीं है. जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह यह है कि हम कितनी गहराई से जीते हैं, कितना प्यार बांटते हैं और अपने हिस्से का कर्म कैसे निभाते हैं. अंत में हर रूह को उसी परम शक्ति में विलीन होना है.
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बनारस के बारे में क्या बोली जेसिका
जेसिका के अपने शब्दों में, "बनारस, जो सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के चक्र को करीब से देखने का साक्षात् जरिया है. गंगा किनारे जलती चिताएं और दूसरी तरफ होती भव्य गंगा आरती, यहां आकर इंसान को अपनी असलियत समझ आती है कि हम आखिरी में सिर्फ एक मुट्ठी खाक ही तो हैं. तंग गलियों की वो हलचल, सुबह-सुबह नाव पर बैठकर गंगा मैया के दर्शन, आरती का वो शंखनाद और धूप-लोबान की खुशबू रूह को सुकून से भर देती है. बनारस की हवा में एक जादुई शिव-ऊर्जा है, जो इंसान को अंदर से पूरी तरह बदल देती है. यहां एक तरफ लोग विदा हो रहे होते हैं, तो दूसरी तरफ शहनाइयां गूंज रही होती हैं. सचमुच, काशी जैसी कोई और जगह इस पूरी कायनात में नहीं है."
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