सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) के स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सिर्फ जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA), एग्रीमेंट टू सेल (Agreement to Sell), या साधारण रसीद व वसीयत के आधार पर किसी भी अचल संपत्ति जैसे मकान, दुकान, प्लॉट या फ्लैट का मालिकाना हक (Ownership) कानूनी रूप से ट्रांसफर नहीं होता है. लिहाजा, किसी भी जमीन या मकान का लीगल रूप से पक्का मालिक बनने के लिए विधिवत रजिस्टर्ड सेल डीड (Sale Deed) होना कानूनन जरूरी है.
अगर आपने भी पहले केवल GPA या पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर कोई संपत्ति खरीदी है, तो मालिकाना हक को लीगल बनाने और भविष्य की कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए तुरंत ये कदम उठाएं.
बिना रजिस्ट्री वाली प्रॉपर्टी को लीगल बनाने के उपाय
जीपीए या बिना रजिस्ट्री वाली संपत्तियों का टाइटल (Title Clear) साफ करने और अपने नाम पक्की रजिस्ट्री करवाने के लिए ने नीचे बताए गए प्रोसेस को फॉलो करना होगा.
- अगर संपत्ति का मूल विक्रेता यानी जिसके नाम पर अंतिम सरकारी रजिस्ट्री दर्ज है, अगर वह जीवित है, तो उनसे तुरंत संपर्क करें. उनके जरिए अपने नाम रजिस्टर्ड विक्रय पत्र (Sale Deed) बनवाएं और स्थानीय सब रजिस्ट्रार (Sub Registrar) ऑफिस में नियम के मुताबिक स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करके रजिस्ट्री करा लें.
- अगर मूल विक्रेता रजिस्ट्री करने से इनकार करता है या संपर्क में नहीं है, लेकिन आपके पास एग्रीमेंट टू सेल और भुगतान की पूरी रसीद मौजूद हैं, तो आप सिविल कोर्ट में Suit for Specific Performance याचिका दायर कर सकते हैं. अदालत के आदेश के माध्यम से रजिस्ट्री पूरी करवाई जा सकती है.
- अगर मूल विक्रेता की मौत हो चुकी है, तो उनके कानूनी वारिसों का पता लगाएं. संपत्ति का निष्पक्ष टाइटल पाने के लिए सभी वारिसों से एक रजिस्टर्ड रिलीज डीड या नई सेल डीड पर हस्ताक्षर करवाएं.
प्रॉपर्टी फ्रॉड और कानूनी विवादों से ऐसे बचें
केवल मालिकाना हक पाना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी संपत्ति को हर तरह के फर्जीवाड़े और विवादों से सुरक्षित रखना भी जरूरी है. ऐसे में पिछले 30-40 सालों में संपत्ति किस किस के नाम रही है, इसकी पूरी हिस्ट्री किसी विशेषज्ञ प्रॉपर्टी वकील से जांच करवाएं, ताकि दस्तावेजों में कोई गैप न रहे. साथ ही सब रजिस्ट्रार ऑफिस से कम से कम 30 साल का EC जरूर निकलवाएं. इससे यह साफ हो जाएगा कि संपत्ति पर कोई बैंक लोन, बकाया या कानूनी रोक तो नहीं है. नगर निगम या तहसील कार्यालय में जाकर संपत्ति का दाखिल खारिज (Mutation) अपने नाम दर्ज कराएं और बिजली, पानी व प्रॉपर्टी टैक्स के बिल अपने नाम पर ट्रांसफर करवाएं.
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हालांकि केवल नगर निगम में म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज होना या टैक्स की रसीदें होना मालिकाना हक का पूर्ण कानूनी सबूत नहीं माना जाता, लेकिन संपत्ति पर आपका कब्जा और सरकारी रिकॉर्ड्स में आपके नाम से आ रहे बिल, अदालत में आपके कब्जे व वास्तविक उपयोग की स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करते हैं. लिहाजा, अपनी संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द रजिस्टर्ड सेल डीड प्रक्रिया पूरी करें.
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