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ट्रेन हादसों पर लगेगी लगाम, भारतीय रेलवे ने सिग्नलिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जानिए कैसे काम करेगा ये सिस्टम

भारतीय रेलवे में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं. रेलवे ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ी सिग्नलिंग अपग्रेड परियोजना को मंजूरी दी है. यह परियोजना रेलवे द्वारा किए गए सबसे बड़े सिग्नलिंग निवेशों में से एक है और इससे देश के एक अहम रेलवे जोन में ट्रेन संचालन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है.

ट्रेन हादसों पर लगेगी लगाम, भारतीय रेलवे ने सिग्नलिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जानिए कैसे काम करेगा ये सिस्टम
भारतीय रेलवे
file photo

भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्त नेटवर्क में से एक है, जो हर दिन लाखों यात्रियों और भारी मात्रा में माल ढुलाई करता है. ट्रेनों को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने में सिग्नलिंग सिस्टम का अहम रोल होता है, जो रेलवे के ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करता है. भारतीय रेलवे ने ईस्टर्न रेलवे नेटवर्क पर 8,377.40 करोड़ रुपये की बड़ी सिग्नलिंग अपग्रेड परियोजना को मंजूरी दी है. यह परियोजना रेलवे द्वारा किए गए सबसे बड़े सिग्नलिंग निवेशों में से एक है और इससे देश के एक अहम रेलवे जोन में ट्रेन संचालन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. भारतीय रेलवे का यह कदम सुरक्षा बढ़ाने, ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और भविष्य की तकनीकों जैसे ‘कवच' यानी स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को लागू करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है.

रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम क्या होता है?

अक्सर जब ट्रेन लेट होती है, तो लोग सिग्नल फेल शब्द सुनते हैं, लेकिन इसका असली मतलब बहुत कम लोग जानते हैं.  सिग्नलिंग सिस्टम ट्रेनों को यह बताता है कि कब रुकना है, कब धीरे चलना है और कब आगे बढ़ना है. इसका सबसे जरूरी काम यह सुनिश्चित करना होता है कि एक ही ट्रैक पर एक समय में दो ट्रेनें न आएं. इस सिस्टम में कई चीजें मिलकर काम करती हैं, जैसे- सिग्नल, ट्रैक सर्किट, कम्युनिकेशन सिस्टम, कंट्रोल रूम और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग आदि. ये सभी मिलकर ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करते हैं. आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम की मदद से रेलवे अधिकारी रियल टाइम में ट्रेनों की निगरानी कर सकते हैं, जिससे मानवीय गलती कम होती है और एक ही रूट पर ज्यादा ट्रेनें सुरक्षित तरीके से चलाई जा सकती हैं.

सिग्नलिंग सिस्टम से यात्रियों को क्या फायदा होगा?

  • भले ही यात्री सीधे सिग्नलिंग सिस्टम को नहीं देख पाते, लेकिन इसके फायदे उन्हें जरूर महसूस होंगे.
  • ट्रेनों की देरी कम हो सकती है.
  • यात्रा ज्यादा सुरक्षित होगी.
  • एक ही रूट पर ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी.
  • कुल मिलाकर सफर ज्यादा सुगम और भरोसेमंद बनेगा.

ईस्टर्न रेलवे क्यों है अहम?

ईस्टर्न रेलवे भारत के सबसे व्यस्त रेल जोन में से एक है. यहां घनी आबादी वाले इलाके हैं और यात्री व मालगाड़ी दोनों का काफी दबाव रहता है. यह जोन औद्योगिक क्षेत्रों, कोयला खदानों, बंदरगाहों और बड़े शहरों को जोड़ता है. कई रूट पर ट्रेनों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यहां आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम जरूरी है, ताकि सुरक्षा बनी रहे और जाम कम हो.

क्या है कवच सुरक्षा सिस्टम?

‘कवच' एक देश में ही विकसित की गई ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जिसे रेलवे सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया है. यह सिस्टम ट्रेन को लाल सिग्नल पार करने से रोकता है और किसी खतरे की स्थिति में अपने आप ब्रेक लगाकर ट्रेन की रफ्तार कंट्रोल कर देता है. इससे रेल हादसों की संभावना काफी कम हो जाती है. रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए काम कर रहा है. इसी कड़ी में ‘कवच' सिस्टम को धीरे-धीरे देशभर में लागू किया जा रहा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर की जा सके.

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