- गृह मंत्री अमित शाह ने साबरमती में देश की पहली LNG आधारित डुअल फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
- डुअल फ्यूल तकनीक से ट्रेन इंजन डीजल की बजाय लगभग चालीस प्रतिशत LNG का उपयोग करता है, जिससे ईंधन बचत होती है.
- साबरमती में 700 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक WAG12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड बनाया गया है.
First LNG Train Route: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साबरमती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश की पहली LNG आधारित डुअल फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. अमेरिका, रूस, चीन, कनाडा और स्पेन जैसे दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही एलएनजी (LNG) का इस्तेमाल कर रहे हैं, और अब भारत भी इस इस तकनीक को अपनाने वालों देशों में शामिल हो गया है. इन ट्रेनों में डुअल-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल होता है, जो ठीक उसी तरह काम करती है, जैसे कारों में सीएनजी और पेट्रोल का एक साथ इस्तेमाल किया जाता है.
इस तकनीक के तहत ट्रेन का इंजन पूरी तरह किसी एक ईंधन पर निर्भर रहने के बजाय डीजल और एलएनजी दोनों से चलता है, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों में कमी आती है. इस ईंधन के उपयोग से परिचालन लागत और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी. इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने 1,542 करोड़ रुपये से ज्यादा की रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया.
अहमदाबाद में देश की पहली LNG ट्रेन, साबरमती रेलवे स्टेशन के नए स्वरूप व मेंटेनेंस शेड के शुभारंभ से लाइव...
— Amit Shah (@AmitShah) September 27, 2026
અમદાવાદમાં દેશની પ્રથમ LNG ટ્રેનનો શુભારંભ, સાબરમતી રેલવે સ્ટેશનના પુન:વિકસિત સ્વરૂપનું લોકાર્પણ તેમજ WAG 12 મેઈન્ટેનન્સ શેડના ઉદ્ઘાટનથી લાઈવ. https://t.co/3JclEQuVge
भारत की पहली LNG ट्रेन
अहमदाबाद रेल मंडल के साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में 1,400 HP क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को डीजल और LNG के डुअल फ्यूल तकनीक में सफलतापूर्वक बदला गया है. यह इंजन पूरी तरह डीजल पर निर्भर न रहकर लगभग 40 प्रतिशत डीजल की जगह LNG का उपयोग कर सकता है. 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के सफल फील्ड ट्रायल के बाद यह साबित हुआ है कि एक DPC से सालाना करीब 11.9 लाख और 8 कोच वाली पूरी ट्रेन से सालाना लगभग 23.9 लाख के ईंधन खर्च की बचत होगी. 8 कोच वाली यह नॉन एसी चेयर कार ट्रेन अपनी उद्घाटन यात्रा के दौरान साबरमती से मेहसाणा के बीच चलाई गई. माना जा रहा है कि LNG के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक उत्सर्जन में भारी कमी आएगी.
साबरमती में 700 करोड़ रुपये का WAG12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड
भारी मालगाड़ियों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए के लिए साबरमती में 700 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक WAG12 लोकोमोटिव शेड का निर्माण किया गया है. यह शेड 12,000 HP की अत्यधिक शक्तिशाली क्षमता वाले 300 WAG12H इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स का रखरखाव करने में सक्षम है. इसके अलावा, इससे लोकोमोटिव्स की उपलब्धता बढ़ेगी और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर व नेशनल रेल नेटवर्क पर भारी मालगाड़ियों के रखरखाव में समय की बचत होगी.
404 किमी रेल रूट पर स्वदेशी कवच
रेल हादसों और ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर को रोकने के लिए अहमदाबाद मंडल के 404 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर 411 करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम यानी कवच स्थापित किया जा रहा है. इसका फायदा ये होगा कि यह सिस्टम ओवर स्पीडिंग पर रोक लगाता है, रेड सिग्नल पार होने पर ऑटोमेटिक ब्रेक लगाता है और मानवीय भूलों से होने वाली दुर्घटनाओं का जोखिम को जीरो कर देता है.
122.57 किमी में ऑटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार
साबरमती कलोल भांडू मोतीदाऊ और साबरमती सानंद जखवाड़ा रेल खंडों पर 122.57 किलोमीटर क्षेत्र में 118.83 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित की गई है. इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहेगी. एक ही ट्रैक पर अधिक ट्रेनें सुरक्षित रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे रूट कैपेसिटी बढ़ेगी और ट्रेनों की लेटलतीफी दूर होगी.
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क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शाह ने साबरमती-सरखेज के बीच 21 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण के के लिए 313.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया. इस प्रोजेक्ट को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सरखेज स्टेशनों को कवर किया जाएगा, जिसमें 16 छोटे पुल, 13 रोड अंडर ब्रिज, 1 बड़ा पुल और 6 लेवल क्रॉसिंग का निर्माण होगा. यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से सरखेज धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र की ओर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा.
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