Dairy Farming Business: देश में बेरोजगारी इस वक्त चरम पर हैं. ऐसे युवाओं की खाहिश कुछ अपना करने की होती है. हालांकि, सही जानकारी के अभाव औऱ अनुभव की कमी की वजह से चाहकर भी युवा खुदका बिजनेस शुरु नहीं कर पाते हैं. हालांकि, सरकार ऐसे युवाओं को अपना रोजगार स्थापित करने के लिए कई योजनाए चला रही है. इनमें से एक है डेयरी फार्मिंग प्रोत्साहन, इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाए चला रही हैं.
पशुपालन को आर्थिक रूप से मजबूती देने के लिए सरकार 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध करा रही है. लेकिन इस व्यवसाय को टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए सही नस्ल का चयन, वैज्ञानिक रखरखाव और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग बेहद जरूरी है. अगर आप भी नया डेयरी फार्म शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो नीचे दी गई पूरी गाइड आपको सही दिशा दिखाएगी.
सही नस्ल के पशुओं का करें चुनाव
- डेयरी फार्म का मुनाफा सीधे तौर पर पशुओं के दूध उत्पादन और उनकी सेहत पर निर्भर करता है. लिहाजा, अपने क्षेत्र के मौसम के हिसाब से पशुओं की नस्ल का चयन करना बेहद जरूरी है. भारतीय वातावरण में आसानी से ढलने और कम बीमार पड़ने वाली कुछ नस्लों के पशुओं की जानकारी नीचे जी गई, जो ज्यादा दूध देने के लिए जाने जाते हैं.
- गायों में गीर, साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा. ये नस्लें भारतीय जलवायु में आसानी से ढल जाती हैं, इनमें बीमारियां कम होती हैं और इनके A2 दूध की बाजार में प्रीमियम कीमत मिलती है.
- जर्सी और होल्स्टिन फ्रिजियन नस्लों की गायें प्रतिदिन बहुत ज्यादा दूध देती हैं. हालांकि, इन्हें ठंडे वातावरण और विशेष देखरेख की जरूरत होती है.
- भैंसों में मुर्रा और मेहसाणा काफी अच्छी नस्लें हैं. मुर्रा को तो ब्लैक गोल्ड भी कहा जाता है . इनके गाढ़े और उच्च फैट वाले दूध की डेयरी प्रोडक्ट्स, घी और मावा निर्माताओं के बीच भारी मांग रहती है.
दूध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय
पशु पालन ही काफी नहीं है, बल्कि पाले गए पशुओं से ज्यादा से ज्यादा लाभ हासिल करना बेहद जरूरी होता है, जो पशुओं के खान पान और वैज्ञानिक तरीकों से हासिल किया जा सकता है. इसके लिए पशु के आहार में 60 प्रतिशत हरा चारा, 40 प्रतिशत सूखा चारा और प्रति 2.5 लीटर दूध उत्पादन पर 1 किलोग्राम कंसंट्रेट मिक्स व मिनरल मिक्सचर शामिल करना बेहद जरूरी होता है. इसके अलावा, पशुओं का समय-समय पर वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है. इस कड़ी में खुरपका मुंहपका और ब्रुसेलोसिस का समय पर टीका लगवाना चाहिए. वहीं, पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए हवादार शेड और साफ फर्श की व्यवस्था करनी चाहिए. गर्मी के तनाव से बचाने के लिए शेड में फॉगर्स और पंखे लगाएं, क्योंकि तनाव मुक्त पशु अधिक दूध देते हैं.
सरकारी योजनाएं और सब्सिडी
- नाबार्ड लोन व सब्सिडी, इसके तहत राष्ट्रीय पशुधन मिशन और AHIDF के तहत सामान्य वर्ग के लिए 25% और SC/ST व महिला आवेदकों के लिए 33.33 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है.
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे और मध्यम डेयरी सेटअप के लिए बिना किसी गारंटी के 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के कर्ज की व्यवस्था है.
- नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में देसी गायों जैसे गीर और साहीवाल की यूनिट स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी का प्रावधान है.
- पशु किसान क्रेडिट कार्ड के तहत पशुओं के दैनिक चारे और रखरखाव के खर्च के लिए सिर्फ 4 प्रतिशत के आसपास की रियायती ब्याज दर पर वर्किंग कैपिटल लोन मिलता है.
प्रमुख पशुपालन योजनाओं की एक नजर में तुलना
| योजना का नाम | मुख्य क्षेत्र | मिलने वाली छूट व सब्सिडी |
| राष्ट्रीय गोकुल मिशन | देसी गाय संरक्षण व नस्ल सुधार | मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान व तकनीकी सपोर्ट |
| राष्ट्रीय पशुधन मिशन | बकरी, मुर्गी व सूअर पालन | प्रोजेक्ट लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी |
| पशुधन बीमा योजना | पशु दुर्घटना व मृत्यु सुरक्षा | प्रीमियम पर 50 से 70 प्रतिशत सब्सिडी |
| AHIDF स्कीम | डेयरी व चारा प्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर | 3 प्रतिशत ब्याज दर में छूट व क्रेडिट गारंटी |
| नंदिनी कृषक समृद्धि योजना | देसी नस्ल की 25 गायों की यूनिट | 50 प्रतिशत तक राज्य स्तरीय अनुदान |
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ऐसे हासिल करें बैंक लोन और सब्सिडी
- सबसे पहले एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें. इसमें पशुओं की संख्या, खरीद लागत, शेड निर्माण, चारे का खर्च और कमाई का पूरा ब्यौरा दें.
- जरूरी दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पहचान पत्र की व्यवस्था करें. इसके अलावा, जमीन के दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी व मालिकाना हक के कागज या न्यूनतम 57 साल का लीज एग्रीमेंट जुटा लें. साथ में 6 से 12 महीने का बैंक स्टेटमेंट और अगर पशुपालन विभाग का प्रशिक्षण लिया हो तो, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की प्रति तैयार कर लें.
- DPR और कागजात के साथ नजदीकी कमर्शियल, ग्रामीण या कोऑपरेटिव बैंक में आवेदन दें.
- लोन आवेदन मिलने के बाद बैंक अधिकारी साइट वेरिफिकेशन कर लोन स्वीकृत करेंगे.
- लोन की पहली किस्त जारी होते ही बैंक नाबार्ड या सरकारी पोर्टल पर सब्सिडी क्लेम दाखिल करें, जो मंजूर होकर आपके लोन अकाउंट में एडजस्ट हो जाती है.
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