अगर आप दिल्ली में अक्सर सफर करते हैं और आप सड़कों पर लगने वाले जाम से परेशान रहते हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी हो सकती है. शहर के 25 बड़े चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल हटाकर उनकी जगह 'बैक-टू-बैक यू-टर्न' मॉडल लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम कम हो और गाड़ियों की आवाजाही बेहतर हो सके. इस प्रस्ताव को तकनीकी जांच के बाद मंजूरी मिल गई है और आने वाले महीनों में इसे लागू किया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक इस योजना से चौराहों पर रुकना कम पड़ेगा, गाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी, ईंधन की खपत कम होगी और शहर के सबसे व्यस्त रास्तों पर दबाव कम होगा.
फ्लाईओवर की जगह बदले जाएंगे ट्रैफिक के डिजाइन
फ्लाईओवर बनाने की जगह अब अधिकारी चौराहों के डिजाइन में बदलाव करने पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि गाड़ियां बिना रुके चलती रहें. इस प्रस्तावित मॉडल के तहत चिन्हित सड़कों से ट्रैफिक सिग्नल हटा दिए जाएंगे और उनकी जगह तय जगहों पर यू-टर्न लगाए जाएंगे. ऐसे में जिन गाड़ियों को रास्ता बदलना होगा, वे आगे जाकर यू-टर्न लेंगी और फिर अपनी लेन में वापस आ जाएंगी, जबकि सीधे जाने वाला ट्रैफिक बिना बार-बार रुके चलता रहेगा.
कम खर्च में जल्द ट्रैफिक से राहत देने वाला प्लान
अधिकारियों के मुताबिक यह तरीका कम खर्च में ट्रैफिक से जल्दी राहत देने में मदद करेगा, खासकर उन ज्यादा आबादी वाले इलाकों में जहां जमीन की कमी, मेट्रो लाइनों और आसपास के निर्माण के कारण बड़े प्रोजेक्ट बनाना मुश्किल है. इस योजना को 23 जून को ट्रैफिक पुलिस ने तकनीकी जांच के बाद मंजूरी दी है. इसमें सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) से भी सुझाव लिए गए हैं. यह योजना एक्सपर्ट्स द्वारा किए गए डिटेल्ड ट्रैफिक सर्वे पर आधारित है, जिसमें दिल्ली के कई रास्तों पर जाम के पैटर्न का अध्ययन किया गया.

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किन रास्तों को बनाया जाएगा सिग्नल फ्री?
इस योजना में दिल्ली की कई अहम और व्यस्त सड़कों को शामिल किया गया है, जैसे
- नजफगढ़ रोड
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र मार्ग
- जीटी रोड (जीटी करनाल बायपास फ्लाईओवर से आजादपुर)
- राजौरी गार्डन–करमपुरा स्ट्रेच
- पंजाबी बाग–टिकरी बॉर्डर स्ट्रेच
- मथुरा रोड (आश्रम–अपोलो–बदरपुर)
- महरौली–गुरुग्राम रोड
- आउटर रिंग रोड (नेहरू प्लेस–राव तुला राम फ्लाईओवर)
- रोड नंबर 71 (योजना विहार क्षेत्र)
- आईटीओ कॉरिडोर
- कालिंदी कुंज और एयरपोर्ट क्षेत्र की सड़कें
- पंखा रोड
- महरौली–साकेत–संगम विहार बेल्ट
- इसके अलावा उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिल्ली की अन्य कई ट्रैफिक प्रभावित मुख्य सड़कें भी इसमें शामिल हैं.
इन सभी जगहों पर 'बैक-टू-बैक यू-टर्न' मॉडल लागू कर ट्रैफिक को सुचारु बनाने की योजना बनाई जा रही है.
इन सड़कों पर क्यों लगता है जाम?
ट्रैफिक स्टडी में सामने आया है कि कई सड़कों पर बहुत कम दूरी में ट्रैफिक सिग्नल बने हुए हैं, जिससे गाड़ियों को बार‑बार रुकना पड़ता है, भले ही सड़क चौड़ी ही क्यों न हो. भारतेन्दु हरिश्चंद्र मार्ग पर करकड़डूमा मोड़ से यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स टी‑पॉइंट के बीच सिर्फ 2 किलोमीटर में 11 ट्रैफिक सिग्नल हैं, जिससे बार‑बार रुकावट और जाम की स्थिति बनती है. वहीं, ईस्ट दिल्ली के रोड नंबर 71 पर योजना विहार से इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी चौक के बीच करीब 1.5 किलोमीटर में 6 बार रुकना पड़ता है, जिसमें 5 सिग्नल और एक कट शामिल है. अधिकारियों का कहना है कि इतनी ज्यादा संख्या में सिग्नल होने से ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो जाती है और पीक ऑवर में आसपास की सड़कों पर भी जाम बढ़ जाता है.

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कम लागत वाला प्लान
ट्रैफिक अधिकारियों का कहना है कि 'बैक-टू-बैक यू-टर्न' मॉडल कम लागत में ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत देने के लिए तैयार किया गया है, खासकर फ्लाईओवर और अंडरपास की तुलना में. इसका मकसद ट्रैफिक में बार-बार रुकने की समस्या को कम करना, गाड़ियों की औसत रफ्तार बढ़ाना और सिग्नल पर खड़ी गाड़ियों के कारण होने वाली ईंधन की बर्बादी घटाना है. यह मॉडल उन इलाकों में ज्यादा कारगर माना जा रहा है, जहां घनी आबादी, सीमित सड़क चौड़ाई या आसपास निर्माण होने की वजह से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाना आसान नहीं होता.
PWD और ट्रैफिक पुलिस करेगी चर्चा
इस योजना को लागू करने के लिए PWD ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर आगे की विस्तृत चर्चा करेगा, ताकि इन 25 कॉरिडोर पर काम का अंतिम प्लान तैयार किया जा सके. किसी भी जगह से ट्रैफिक सिग्नल हटाने से पहले हर सड़क का अध्ययन किया जाएगा. इसमें यह देखा जाएगा कि योजना वहां सुरक्षित है या नहीं, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी या खतरा न हो.
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