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दिल्‍ली-नोएडा से बेंगलुरु तक सड़कों पर गड्ढे, गड्ढों पर बवाल... मौत का जिम्‍मेदार कौन, क्‍या है मुआवजे का नियम? 

दिल्ली-नोएडा और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में चारों ओर गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं. वहीं, छोटे शहरों का हाल तो और भी बुरा है. इन गड्ढों की वजह से कई सड़क दुर्घनाएं होती रहती हैं. ऐसे में हमारे मन में सवाल उठता है आखिर इन दुर्घनाओं का हर्जाना कौन भरेगा? यहां जानते हैं विस्तार से-

दिल्‍ली-नोएडा से बेंगलुरु तक सड़कों पर गड्ढे, गड्ढों पर बवाल... मौत का जिम्‍मेदार कौन, क्‍या है मुआवजे का नियम? 
Pothole accident compensation rules : गड्ढों के कारण होने वाली घुर्टनाओं का कौन है जिम्मेवार?

गड्ढों की वजह से सड़क दुर्घटनाओं की खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं. मुख्यरूप से बारिश के मौसम में खराब सड़कें और गड्ढे लोगों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं. इन हादसों में कई लोगों को गंभीर चोटें लगती हैं, जबकि कई मामलों में जान भी चली जाती है. हाल ही में बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास अनंतनगर मेन रोड पर खराब सड़क और गड्ढों के कारण एक बाइक फिसल गई, जिसमें मेधा नाम की महिला की मौत हो गई. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में भी ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं. 

हाल ही में दिल्ली के मंडोली जेल रोड पर गड्ढे की वजह से एक ई-रिक्शा पलट गया, जिसमें करीब छह लोग घायल हो गए. दूसरी ओर नोएडा की कई सड़कों पर गड्ढों की शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने जांच शुरू की है. ऐसे हादसों की खबरें पढ़ने या देखने के बाद अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर सड़क की खराब स्थिति के कारण कोई दुर्घटना हो जाए, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और पीड़ित को मुआवजा कौन देगा? यहां हम इन सवालों के जवाब जानते हैं-

कौन होता है जिम्मेदार और क्या कहता है नियम

अगर गड्ढों की वजह से किसी तरह की सड़क दुर्घटना हुई है, तो ऐसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मांगने का पूरा कानूनी अधिकार है. इस तरह के मामलों में लॉ ऑफ टॉर्ट के तहत सरकारी एजेंसियों और स्थानीय निकायों की लापरवाही को चुनौती दी जा सकती है. इतना ही नहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300 के तहत राज्य सरकार और उसकी एजेंसियों पर मुकदमा दायर कर हर्जाना की मांग भी की जा सकती है. 

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने State of Rajasthan vs. Vidyawati मामले में माना था कि राज्य अपने कर्मचारियों की लापरवाही के लिए उत्तरदायी हो सकता है. वहीं, S. Rajaseekaran vs Union of India मामले में कोर्ट ने खराब सड़कों और गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा समस्या बताते हुए कहा था कि सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने वाली एजेंसियों को जिम्मेवार ठहराया जा सकता है. ऐसे मामलों में पीड़ित या उनके परिजन मुआवजे के लिए कानूनी दावा कर सकते हैं.

मुआवजे को लेकर क्या कहता है नियम?

गड्ढों की वजह से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित या मृतक के परिजन मुआवजे का दावा कर सकते हैं. इसके लिए Fatal Accidents Act, 1855 और Motor Vehicles Act, 1988 के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है. कई कानून एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की मौत या चोट सड़क की खराब स्थिति और संबंधित एजेंसी की लापरवाही के कारण हुई है, तो पीड़ित पक्ष हर्जाना की मांग कर सकता है. 

इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और उनके अनुपालन पर जोर देती है. कुछ स्थानीय निकायों के कानूनों में भी सार्वजनिक सड़कों में खामी के कारण हुए नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान है. उदाहरण के तौर पर, Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike Act, 2020 की धारा 232 सार्वजनिक सड़क में खराबी के कारण हुए नुकसान पर मुआवजे के अधिकार का उल्लेख करती है. 

हालांकि, सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़ी जवाबदेही को लेकर पूरे देश में एक समान व्यवस्था नहीं है, लेकिन अदालतें कई मामलों में सरकारी एजेंसियों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय कर चुकी हैं.

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