दिल्ली सरकार यमुना नदी में बनने वाले झाग यानी फ्रोथ की समस्या को दूर करने के लिए कालिंदी कुंज बैराज के ढलान में बदलाव करने पर विचार कर रही है. इसके साथ ही कालिंदी कुंज में यमुना किनारे 100 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य छठ घाट बनाया जाएगा. ये घाट यूपी के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की तरफ से बनाया जाएगा. वहीं, इसका खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी.
यमुना नदी में झाग कम करने के लिए सरकार की तैयारी
यह जानकारी जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के कार्यालय की ओर से गुरुवार को दी गई. हाल ही में जल मंत्री ने IIT रुड़की के विशेषज्ञों और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारियों के साथ कालिंदी कुंज बैराज का दौरा किया था. मंत्री ने बताया कि बैराज का ढलान झाग बनने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. अब इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए IIT रुड़की एक अध्ययन करेगा. इस अध्ययन में यह देखा जाएगा कि क्या बैराज के ढलान को नया डिजाइन दिया जा सकता है, और क्या इसकी ऊंचाई कम करने से झाग की समस्या घटाई जा सकती है. सरकार का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि यमुना में झाग की समस्या पर काबू पाया जा सके.
सरकार यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए इलाके के धोबी घाटों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और डाइंग यानी रंगाई यूनिट्स पर सख्त नियम लागू करने की योजना बना रही है. इससे नदी में गंदे पानी का बहाव कम किया जा सकेगा. दरअसल, हर साल छठ पूजा के दौरान यमुना का प्रदूषण चर्चा में आ जाता है. इस दौरान देश‑विदेश की मीडिया में कालिंदी कुंज पर झाग से भरी यमुना में खड़े श्रद्धालुओं की तस्वीरें सामने आती हैं. पिछले कई सालों से दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के कर्मचारी नावों से नदी में बने झाग पर डि‑फोमिंग केमिकल का छिड़काव करते आ रहे हैं, ताकि झाग को अस्थायी रूप से दबाया जा सके.
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यमुना नदी में क्यों बनता है झाग?
झाग बनने की मुख्य वजह नदी में जाने वाले गंदे पानी में मौजूद फॉस्फेट जैसे सर्फैक्टेंट होते हैं. जब यह रसायन मिला पानी बैराज से नीचे गिरता है, तो भारी मात्रा में झाग बन जाता है.
झाग खत्म करने के लिए उठाए जाएंगे ये कदम- यमुना किनारे बने धोबी घाटों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा.
- नदी के किनारे चल रही अवैध जींस धोने और रंगने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई होगी.
- कालिंदी कुंज में 100 करोड़ रुपये की लागत से रिवरफ्रंट और छठ घाट बनाया जाएगा.
यह पहल यमुना में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और बार‑बार बनने वाले जहरीले झाग को देखते हुए की गई है. खासकर वजीराबाद से ओखला के बीच 22 किलोमीटर लंबे हिस्से में यह समस्या ज्यादा गंभीर बनी रहती है.
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