- अंतरवाली सराटी में मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल ने ओबीसी आरक्षण के लिए आमरण अनशन शुरू किया है.
- जरांगे ने 40 डिग्री तापमान में बिना पानी या ORS लिए अनशन जारी रखा है और सरकार से लिखित आदेश की मांग की है.
- मराठा आंदोलन के समर्थन में कई जिलों में प्रदर्शन हुए और हाईवे जाम कर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं हैं.
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी में एक बार फिर ‘पिपली लाइव' जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, जिससे राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है. सुबह से लेकर देर रात तक बदलते घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर मराठा आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के सामने खड़ा कर दिया है.
एक ओर जरांगे पाटिल भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे बिना खाना-पानी के डटे रहे, वहीं दूसरी तरफ ओबीसी समाज ने भी सरकार को सख्त चेतावनी दे दी है. सरकार के प्रतिनिधि लगातार जालना के अंतरवाली सराटी के चक्कर लगा रहे हैं और अनशन के पहले दिन से लेकर देर रात तक उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रहीं.

40 डिग्री के बीच अनशन पर बैठे जरांगे पाटिल
शनिवार सुबह से ही मराठवाड़ा के जालना में तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंच गया था. डॉक्टरों की टीम ने जरांगे पाटिल को ORS या कम से कम पानी लेने की सलाह दी. लेकिन उन्होंने यह कहते हुए साफ मना कर दिया कि जब तक सरकार मराठा समाज को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने का ठोस और लिखित आदेश नहीं जारी करती, तब तक वह पानी की एक बूंद भी नहीं लेंगे.
इधर जरांगे अनशन पर अड़े, उधर हाइवे पर चक्का जाम...
— NDTV India (@ndtvindia) May 30, 2026
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी में एक बार फिर ‘पिपली लाइव' जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, जिससे राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है. सुबह से लेकर देर… pic.twitter.com/YjX06JUNhT
उधर, उनके समर्थन में मराठा आंदोलनकारी भी सड़कों पर उतर आए. बीड, जालना, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर, पुणे और हिंगोली समेत कई जिलों में प्रदर्शन हुए. कई जगहों पर हाईवे जाम किए गए, जिससे बीड-जालना जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. बीड में आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन भी किया.

आठवले ने जरांगे को अपने रुख पर पुनर्विचार करने की सलाह दी
जैसे-जैसे मराठा आंदोलन तेज हुआ, वैसे-वैसे ओबीसी संगठनों ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया. राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाडे ने चेतावनी दी कि यदि ओबीसी आरक्षण को जरा भी नुकसान पहुंचा, तो राज्य का 60 प्रतिशत ओबीसी समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा. इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि सभी मराठाओं को ‘कुणबी' प्रमाणपत्र देकर सामूहिक रूप से ओबीसी आरक्षण देना कानूनी रूप से संभव नहीं है. उन्होंने जरांगे पाटिल को अपने रुख पर पुनर्विचार करने की सलाह भी दी.
शाम होते-होते सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने स्थिति संभालने की कोशिश तेज कर दी. देर रात सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अंतरवाली सराटी पहुंचा, जिसमें राधाकृष्ण विखे पाटिल, भाजपा विधायक प्रसाद लाड, शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार और विलास भुमरे शामिल थे. जरांगे पाटिल से सीधी बातचीत से पहले यह प्रतिनिधिमंडल स्थानीय सरपंच पांडुरंग तारक के घर पहुंचा, जहां मराठा समाज के प्रमुख बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों-प्रोफेसर चंद्रकांत भराड, प्रदीप सोलुंखे और किशोर चव्हाण के साथ लंबी बैठक हुई. इस दौरान सरकार के प्रतिनिधि उन कानूनी और तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करते रहे, जिन पर जरांगे अड़े हुए हैं.
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आधी रात की इस बातचीत से कोई समाधान निकलता है या फिर अगली सुबह के साथ यह आंदोलन और ज्यादा उग्र रूप लेता है. फिलहाल यह स्पष्ट है कि यह मामला अब सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है.
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