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आम खाने के बाद न फेंकें गुठली! बिहार में यहां शुरू हुआ 'मिशन आम गुठली', जानिए क्या है ये पहल

बीएयू, सबौर, भागलपुर ने 'मिशन आम गुठली' की शुरुआत की है. इस पहल के तहत आम की गुठलियां को इकट्ठा किया जाएगा और कई उपयोगी चीजें बनाई जाएंगी. इससे आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है.

आम खाने के बाद न फेंकें गुठली! बिहार में यहां शुरू हुआ 'मिशन आम गुठली', जानिए क्या है ये पहल
मिशन आम गुठली
Photo Credit: NDTV

गर्मियों में लोग आम तो बड़े चाव से खाते हैं, लेकिन उसकी गुठली को अक्सर बेकार समझकर फेंक देते हैं. अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर ने आम की गुठलियों को बेकार कचरे की जगह एक उपयोगी और कीमती संसाधन बनाने की दिशा में 'मिशन आम गुठली' शुरू किया है. विश्वविद्यालय के नेचर क्लब और उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग की ओर से सोमवार को इस मिशन का शुभारंभ किया गया. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

आम की गुठलियों से बन सकते हैं कई उपयोगी चीजें 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीआर सिंह ने हरा झंडा दिखाकर इस अभियान की शुरुआत की. इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि आम की गुठली कोई बेकार चीज नहीं, बल्कि एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है. अगर इसे कचरे में फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित और प्रोसेस किया जाए, तो उनसे खाद्य, औद्योगिक और बायो प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं. यानी आम की गुठलियां सिर्फ कचरा नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए कई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं, जिससे आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है.

कमाई के नए अवसर

उन्होंने कहा कि कचरे को कमाई का जरिया बनाना ही विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय की यह पहल सफाई, पर्यावरण संरक्षण, नई सोच और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है. इससे कचरे का बेहतर इस्तेमाल होगा और किसानों, युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए कमाई के नए मौके भी पैदा होंगे.

तैयार किए जाएंगे कई प्रोडक्ट

कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार और भागलपुर जिले के लोगों से अपील की कि आम खाने के बाद गुठलियों को फेंकने के बजाय उन्हें अच्छी तरह साफ कर छाया में सुखाएं और अपने निकटतम संग्रह केंद्र पर जमा करें. उन्होंने बताया कि नेचर क्लब समय-समय पर इन संग्रह केंद्रों से गुठलियों का संग्रह करेगा. इसके बाद उनका वैज्ञानिक प्रोसेस और मूल्य संवर्धन कर खाद्य, न्यूट्रास्यूटिकल, कॉस्मेटिक और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे.

कुलपति ने कहा कि यह अभियान केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सबौर नगर और भागलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें. उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वेस्ट को आय, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाकर समाज में विकास की नई सोच को बढ़ावा देना है.

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