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This Article is From Dec 06, 2025

लो भई, सस्‍ता हो गया लोन! इस बैंक ने घटा दी ब्‍याज दर, 20 लाख के लोन पर कितना देना होगा EMI?

रेपो रेट कटने का सबसे सीधा फायदा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा, क्योंकि EMI कम हो सकती है. 

लो भई, सस्‍ता हो गया लोन! इस बैंक ने घटा दी ब्‍याज दर, 20 लाख के लोन पर कितना देना होगा EMI?

केंद्रीय बैंक RBI ने दिसंबर की मॉनिटरी पॉलिसी की मीटिंग में रेपो रेट पर राहत देते हुए कटौती की और ऐसा करते ही इसका असर बैंकों पर भी होने लगा. आरबीआई ने 5 दिसंबर, शुक्रवार को रेपो रेट 25 बेसिस प्‍वाइंट घटाकर 5.25% कर दिया और 6 दिसंबर, शनिवार को पब्लिक सेक्‍टर के बैंक ने भी अपनी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट यानी 0.25% की कमी कर दी. बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने ग्राहकों को राहत देने में एक दिन की भी देर नहीं की. बैंक के लेंडिंग दर कम करने का सीधा फायदा लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा. 

लोन पर ग्राहकों को कितनी राहत? 

केंद्रीय बैंक ने जैसे ही रेपो रेट घटाकर 5.25 फीसदी किया, बैंक ने भी अपनी लेंडिंग रेट कम कर दी. बैंक ऑफ बड़ौदा ने रेपो बेस्ड लेंडिंग रेट (BRLLR) को 8.15% से घटाकर 7.90% कर दिया है. यानी आरबीआई ने जिस तरह 25 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती की, उसी तरह बैंक ने भी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट की कमी कर दी. ये नई दरें 6 दिसंबर 2025 से लागू हो गई हैं. बैंक का मार्कअप 2.65% पहले जैसा ही रहेगा.

किन्‍हें मिलेगा सीधा फायदा?

रेपो रेट कटने का सबसे सीधा फायदा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा, क्योंकि EMI कम हो सकती है. मान लीजिए अगर आपने 10 साल की अवधि के लिए 20 लाख रुपये का होम लोन लिया है और बैंक की ब्‍याज दर 7.90% वार्षिक है तो इस ब्याज दर के हिसाब से आपकी अनुमानित मासिक ईएमआई लगभग 24,160 रुपये बैठेगी. अगर दरें नहीं घटाई जाती तो 8.15% वार्षिक ब्याज दर पर 20 लाख का 10 साल वाला होम लोन लेने पर आपकी अनुमानित मासिक ईएमआई लगभग 24,424 रुपये होती.

बता दें कि रेपो रेट वो दर होती है, जिस पर बैंक RBI से पैसे कर्ज लेते हैं. जब बैंकों को कैश की कमी होती है, तो वे सरकारी बॉन्ड गिरवी रखकर RBI से कर्ज लेते हैं. उस कर्ज पर RBI ब्याज वसूलता है. आरबीआई जिस दर से ब्‍याज लेता है, वो दर रेपो रेट कहलाती है. RBI के रेपो रेट बढ़ाने का मतलब है कि बैंक के लिए कर्ज/लोन/उधार लेना महंगा हो जाता है. RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और बैंक ग्राहकों को भी सस्‍ता कर्ज देते हैं. 
 

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