इलाहाबाद हाई कोर्ट
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क्या लिव इन में रह सकते हैं दो अलग-अलग धर्मों के लोग? क्या कहता है कानून, इलाहाबाद HC ने सब क्लियर कर दिया
- Monday March 30, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: उत्कर्ष गहरवार
अंतरधार्मिक जोड़े के लिव-इन रिलेशनशिप मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं ने कोई अपराध नहीं किया है तो कोर्ट को ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि उनकी सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग को स्वीकार न किया जाए.
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सरकारी कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत पर वारिस भी कर सकेंगे खर्च का दावा, इलाहाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला
- Sunday March 29, 2026
- Edited by: तिलकराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की इलाज के दौरान मौत हो जाती है या वह इलाज के खर्च का दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी भी प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं.
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क्या सास-ससुर के भरण-पोषण के लिए बाध्य है बहू? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ की स्थिति
- Sunday March 29, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह, Edited by: अभिषेक पारीक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि नैतिक दायित्व की अवधारणा चाहे कितनी भी जोरदार क्यों न लगे, लेकिन किसी वैधानिक आदेश के अभाव में कानूनी दायित्व के रूप में लागू नहीं की जा सकती है.
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शादीशुदा व्यक्ति तलाक लिए बिना लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकता: इलाहाबाद हाई कोर्ट
- Saturday March 28, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि दूसरे जीवनसाथी के कानूनी अधिकार का उल्लंघन करने के लिए किसी भी तरह की सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती है. साथ ही कहा कि एक व्यक्ति की आजादी दूसरे व्यक्ति के कानूनी अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकती और न ही उस पर भारी पड़ सकती है.
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प्रयागराज के पुलिस थाने में ही लगा दी अदालत... नाराज हाईकोर्ट ने दो इंस्पेक्टरों को हाजिर होने का दिया आदेश
- Friday March 27, 2026
- Reported by: रनवीर सिंह, Deepak Gambhir, Edited by: अभिषेक पारीक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब शिकायतकर्ता अपने पैसे वापस पाने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान धूमनगंज थाना एक तरह से सिविल कोर्ट में तब्दील कर दिया गया.
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कर्मचारी के प्रमोशन में एडहॉक सेवा को दरकिनार नहीं कर सकते, इलाहाबाद हाईकोर्ट का प्रोन्नति पर बड़ा फैसला
- Saturday March 21, 2026
- Edited by: रितु शर्मा
एडहॉक सेवा से जुड़ा एक मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा. जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को नियमित किए जाने के बाद प्रमोशन के लिए पात्रता निर्धारित करते समय उसकी एडहॉक सेवा को अवश्य गिना जाना चाहिए.
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1100 साल पुरानी जैन मूर्ति संग्रहालय में रहेगी, श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों में विवाद के बाद HC का आदेश
- Friday March 20, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह, Edited by: अभिषेक पारीक
एटा जिले के रिजोर क्षेत्र में जल जीवन मिशन की खुदाई के दौरान जून 2025 में हजारों वर्ष पुरानी एक प्राचीन जैन तीर्थंकर की मूर्ति मिली थी. जैन संप्रदाय से जुड़े दिगंबर और श्वेतांबर समुदायों ने इस मूर्ति को लेकर अपना-अपना दावा ठोका था.
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'कोई रोक नहीं लगाई जा सकती..' : संभल नमाज विवाद पर इलाहाबाद HC का पूरा आदेश पढ़िए
- Wednesday March 18, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: आलोक कुमार ठाकुर
कोर्ट ने कहा था कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय किसी तय पूजा स्थल पर या निजी संपत्ति पर बिना किसी सरकारी अनुमति के शांतिपूर्वक प्रार्थना कर सके. कोर्ट ने कहा था कि संभल के एसपी और कलेक्टर यदि सोचते है कि नमाज अदा करने वालों की संख्या बढ़ने से कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होगी और नमाजियों की संख्या सीमित करना चाहते है या तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए
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मुख्तार अंसारी के भाई की संपत्ति कुर्क करने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने कहा, सिर्फ रिश्तेदार होने से ऐसा नहीं कर सकते
- Wednesday March 18, 2026
- Edited by: उत्कर्ष गहरवार
मंसूर अंसारी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार महज निराधार आरोपों या महज इसलिए कि एक व्यक्ति कुख्यात गैंगस्टर से जुड़ा है, इसके आधार पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त नहीं कर सकती.
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इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए; संभल में नमाज के मुद्दे पर इलाहाबाद HC की डीएम-एसपी को फटकार
- Saturday March 14, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: उत्कर्ष गहरवार
संभल मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती.
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क्या लिव इन में रह सकते हैं दो अलग-अलग धर्मों के लोग? क्या कहता है कानून, इलाहाबाद HC ने सब क्लियर कर दिया
- Monday March 30, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: उत्कर्ष गहरवार
अंतरधार्मिक जोड़े के लिव-इन रिलेशनशिप मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं ने कोई अपराध नहीं किया है तो कोर्ट को ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि उनकी सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग को स्वीकार न किया जाए.
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सरकारी कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत पर वारिस भी कर सकेंगे खर्च का दावा, इलाहाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला
- Sunday March 29, 2026
- Edited by: तिलकराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की इलाज के दौरान मौत हो जाती है या वह इलाज के खर्च का दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी भी प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं.
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क्या सास-ससुर के भरण-पोषण के लिए बाध्य है बहू? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ की स्थिति
- Sunday March 29, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह, Edited by: अभिषेक पारीक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि नैतिक दायित्व की अवधारणा चाहे कितनी भी जोरदार क्यों न लगे, लेकिन किसी वैधानिक आदेश के अभाव में कानूनी दायित्व के रूप में लागू नहीं की जा सकती है.
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शादीशुदा व्यक्ति तलाक लिए बिना लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकता: इलाहाबाद हाई कोर्ट
- Saturday March 28, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि दूसरे जीवनसाथी के कानूनी अधिकार का उल्लंघन करने के लिए किसी भी तरह की सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती है. साथ ही कहा कि एक व्यक्ति की आजादी दूसरे व्यक्ति के कानूनी अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकती और न ही उस पर भारी पड़ सकती है.
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प्रयागराज के पुलिस थाने में ही लगा दी अदालत... नाराज हाईकोर्ट ने दो इंस्पेक्टरों को हाजिर होने का दिया आदेश
- Friday March 27, 2026
- Reported by: रनवीर सिंह, Deepak Gambhir, Edited by: अभिषेक पारीक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब शिकायतकर्ता अपने पैसे वापस पाने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान धूमनगंज थाना एक तरह से सिविल कोर्ट में तब्दील कर दिया गया.
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कर्मचारी के प्रमोशन में एडहॉक सेवा को दरकिनार नहीं कर सकते, इलाहाबाद हाईकोर्ट का प्रोन्नति पर बड़ा फैसला
- Saturday March 21, 2026
- Edited by: रितु शर्मा
एडहॉक सेवा से जुड़ा एक मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा. जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को नियमित किए जाने के बाद प्रमोशन के लिए पात्रता निर्धारित करते समय उसकी एडहॉक सेवा को अवश्य गिना जाना चाहिए.
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1100 साल पुरानी जैन मूर्ति संग्रहालय में रहेगी, श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों में विवाद के बाद HC का आदेश
- Friday March 20, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, रनवीर सिंह, Edited by: अभिषेक पारीक
एटा जिले के रिजोर क्षेत्र में जल जीवन मिशन की खुदाई के दौरान जून 2025 में हजारों वर्ष पुरानी एक प्राचीन जैन तीर्थंकर की मूर्ति मिली थी. जैन संप्रदाय से जुड़े दिगंबर और श्वेतांबर समुदायों ने इस मूर्ति को लेकर अपना-अपना दावा ठोका था.
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'कोई रोक नहीं लगाई जा सकती..' : संभल नमाज विवाद पर इलाहाबाद HC का पूरा आदेश पढ़िए
- Wednesday March 18, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: आलोक कुमार ठाकुर
कोर्ट ने कहा था कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय किसी तय पूजा स्थल पर या निजी संपत्ति पर बिना किसी सरकारी अनुमति के शांतिपूर्वक प्रार्थना कर सके. कोर्ट ने कहा था कि संभल के एसपी और कलेक्टर यदि सोचते है कि नमाज अदा करने वालों की संख्या बढ़ने से कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होगी और नमाजियों की संख्या सीमित करना चाहते है या तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए
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मुख्तार अंसारी के भाई की संपत्ति कुर्क करने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने कहा, सिर्फ रिश्तेदार होने से ऐसा नहीं कर सकते
- Wednesday March 18, 2026
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मंसूर अंसारी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार महज निराधार आरोपों या महज इसलिए कि एक व्यक्ति कुख्यात गैंगस्टर से जुड़ा है, इसके आधार पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त नहीं कर सकती.
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- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: उत्कर्ष गहरवार
संभल मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती.
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