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अमेरिका से ट्रेड डील पर उद्योग जगत की क्या है उम्मीद? CII अध्यक्ष राजीव मेमानी ने बताया
- Sunday July 6, 2025
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्रा
सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की माइक्रो फंडामेंटल्स मजबूत है. बैंक और कारपोरेट की बैलेंस शीट स्ट्रांग है. ऐसे में भारत मौजूदा वित्तीय साल में दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
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क्या है प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना? समझिए इसकी पूरी ABCD
- Thursday October 10, 2024
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत बुधवार तक देशभर की 130 से अधिक कंपनियों ने 50 हजार से अधिक इंटर्नशिप पदों के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. कारपोरेट कार्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि 22 सेक्टर में इंटर्नशिप देने के लिए कंपनियों ने पीएम इंटर्नशिप पोर्टल पर पंजीकरण कराया है. इनमें तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अधिक युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर मुहैया कराए गए हैं. इसके बाद यात्रा और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में इंटर्नशिप के अवसर मिल रहे हैं.
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चुनावी बॉन्ड खत्म करेंगे तो वैकल्पिक इंतजाम क्या होंगे?
- Friday March 22, 2024
- अभिषेक शर्मा
भारत में चुनावी चंदे को सुधारने की कोशिश हो रही हैं. बढ़ते चुनावी खर्च की चिंता सिर्फ पार्टियों को ही नहीं, कारपोरेट घरानों को भी है. बॉन्ड स्कीम में कई पेंच हैं, उन पेंच को आने वाले वक्त में सुधारा जा सकता है. बॉन्ड ने कैश की जरूरत को कम किया था. लेकिन उसने जानने के अधिकार को कमजोर कर दिया था.
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Explainer : MSP की कहानी 57 साल पुरानी... किसानों को 'गारंटी' देने से क्यों हिचक रही सरकार?
- Saturday February 17, 2024
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, प्रशांत, Edited by: अंजलि कर्मकार
किसानों और सरकार के बीच बातचीत का पेंच MSP को लेकर ही फंसा है. एक अनुमान के मुताबिक, अगर सरकार ने किसानों की मांग मान ली, तो नई दिल्ली की तिजोरी पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का भार आ जाएगा. लेकिन किसानों का तर्क दूसरा है. उनको लगता है कि उनकी खेती कारपोरेट के हाथों में जा सकती है.
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अरावली खा गए माफिया, ज़ुबैर को ज़मानत
- Thursday July 21, 2022
- रवीश कुमार
क्या आप जानते हैं कि 2017 से लेकर 2020 तक के तीन साल में सीनियर सिटीज़न ने रेल टिकट की सब्सिडी पर सरकार से कितने करोड़ की छूट ली है, और कारपोरेट ने 5 साल में सरकार से कितने करोड़ की टैक्स छूट ली है? इसका जवाब लोकसभा और राज्य सभा में सरकार ने खुद ही दिया है. कोई पांच से छह करोड़ सीनियर सिटीज़न एक साल में रिजर्व क्लास से रेल यात्राएं करते हैं, सरकार उनके टिकट पर सब्सिडी देती है (थी). लोकसभा में रेल मंत्रालय ने बताया है कि सीनियर सीटिज़न के रेल टिकट पर हर साल 1500 करोड़ से लेकर 1650 करोड़ तक की सब्सिडी दी जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है. 2017-18 से लेकर 2019-20 के तीन वित्त वर्षों में सीनियर सिटीज़न को कुल 4, 794 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी.
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अडाणी ग्रुप ने पीएम मोदी और श्रीलंका पावर प्रोजेक्ट विवाद पर दी प्रतिक्रिया
- Tuesday June 14, 2022
- Reported by: अरविंद गुणशेखर, Sreeja M S, Translated by: आनंद नायक
अडाणी ग्रुप के एक प्रवक्ता ने कहा, "श्रीलंका में निवेश करने का हमारा इरादा एक मूल्यवान पड़ोसी की जरूरत को पूरा करना है. एक जिम्मेदार कारपोरेट के रूप में हम इसे उस पार्टनरशिप के जरूरी हिस्से के तौर पर देखते हैं जो इन दोनों देशों ने हमेशा 'शेयर' की है."
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"क्या फसल का उचित दाम मांग कर किसान भारत को बदनाम कर रहे हैं?" : NDTV से बोले राकेश टिकैत
- Friday February 5, 2021
- Reported by: NDTV.com
राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि असली साजिश है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून न होने से कारपोरेट घरानों को किसानों को लूटने की खुली छूट मिल जाएगी.
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योगी सरकार का ‘किसान कल्याण मिशन’ किसानों के गुस्से को दबाने का प्रचार स्टंट : किसान यूनियन
- Thursday January 7, 2021
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नवीन कुमार
इन कानूनों के बनने से: 1. कारपोरेट निजी मंडियां बनाएंगे, 2. सरकार कानून अनुसार इन निजी मंडियों को बढ़ावा देगी, जिससे सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी, 3. लागत के सामन, उपकरण और सिंचाई कारपोरेट नियंत्रण में चली जाएगी और सरकारी सब्सिडी समाप्त होगी व लागत के दाम बढ़ेंगे, 4. लागत के बढ़े दाम का भुगतान करने के लिए किसानों को कर्ज लेना होगा, जिससे जमीन से बेदखली बढ़ेगी, 5. सरकार कुल मिलाकर खेती, खाद्य सुरक्षा और राशन की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगी.
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"अपने जिद्दी रवैये को छिपाने के लिए किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में लगी है सरकार"
- Saturday December 12, 2020
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नवीन कुमार
आश्चर्य नहीं है कि सरकार ने जो दस्तावेज ‘पुटिंग फामर्स फस्र्ट’ जारी किया है, उसके पृष्ठ 16 पर लिखा है कि ये कानून कारपोरेट के कृषि व्यवसायियों को आगे कर देगा. वह लिखता है ‘कल्पना कीजिए कि इन सुधारों के साथ कृषि व्यवसायियों के लिए कितने सारे नए अवसर खुल जाएंगे.
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रालोसपा ने किसानों के भारत बंद का किया समर्थन, 8 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन में...
- Saturday December 5, 2020
- Reported by: राजीव रंजन
Farmers Protest : रालोसपा ने कहा कि केंद्र सरकारतीनों कानूनों को रद्द करे ताकि देश के अन्नदाता कारपोरेट घराने के हाथों तबाह होने से बचें. जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार के किसान विरोधी रवैये के खिलाफ पार्टी नेता व कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे.
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अमेरिका से ट्रेड डील पर उद्योग जगत की क्या है उम्मीद? CII अध्यक्ष राजीव मेमानी ने बताया
- Sunday July 6, 2025
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्रा
सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की माइक्रो फंडामेंटल्स मजबूत है. बैंक और कारपोरेट की बैलेंस शीट स्ट्रांग है. ऐसे में भारत मौजूदा वित्तीय साल में दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
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क्या है प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना? समझिए इसकी पूरी ABCD
- Thursday October 10, 2024
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत बुधवार तक देशभर की 130 से अधिक कंपनियों ने 50 हजार से अधिक इंटर्नशिप पदों के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. कारपोरेट कार्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि 22 सेक्टर में इंटर्नशिप देने के लिए कंपनियों ने पीएम इंटर्नशिप पोर्टल पर पंजीकरण कराया है. इनमें तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अधिक युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर मुहैया कराए गए हैं. इसके बाद यात्रा और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में इंटर्नशिप के अवसर मिल रहे हैं.
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चुनावी बॉन्ड खत्म करेंगे तो वैकल्पिक इंतजाम क्या होंगे?
- Friday March 22, 2024
- अभिषेक शर्मा
भारत में चुनावी चंदे को सुधारने की कोशिश हो रही हैं. बढ़ते चुनावी खर्च की चिंता सिर्फ पार्टियों को ही नहीं, कारपोरेट घरानों को भी है. बॉन्ड स्कीम में कई पेंच हैं, उन पेंच को आने वाले वक्त में सुधारा जा सकता है. बॉन्ड ने कैश की जरूरत को कम किया था. लेकिन उसने जानने के अधिकार को कमजोर कर दिया था.
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Explainer : MSP की कहानी 57 साल पुरानी... किसानों को 'गारंटी' देने से क्यों हिचक रही सरकार?
- Saturday February 17, 2024
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, प्रशांत, Edited by: अंजलि कर्मकार
किसानों और सरकार के बीच बातचीत का पेंच MSP को लेकर ही फंसा है. एक अनुमान के मुताबिक, अगर सरकार ने किसानों की मांग मान ली, तो नई दिल्ली की तिजोरी पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का भार आ जाएगा. लेकिन किसानों का तर्क दूसरा है. उनको लगता है कि उनकी खेती कारपोरेट के हाथों में जा सकती है.
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अरावली खा गए माफिया, ज़ुबैर को ज़मानत
- Thursday July 21, 2022
- रवीश कुमार
क्या आप जानते हैं कि 2017 से लेकर 2020 तक के तीन साल में सीनियर सिटीज़न ने रेल टिकट की सब्सिडी पर सरकार से कितने करोड़ की छूट ली है, और कारपोरेट ने 5 साल में सरकार से कितने करोड़ की टैक्स छूट ली है? इसका जवाब लोकसभा और राज्य सभा में सरकार ने खुद ही दिया है. कोई पांच से छह करोड़ सीनियर सिटीज़न एक साल में रिजर्व क्लास से रेल यात्राएं करते हैं, सरकार उनके टिकट पर सब्सिडी देती है (थी). लोकसभा में रेल मंत्रालय ने बताया है कि सीनियर सीटिज़न के रेल टिकट पर हर साल 1500 करोड़ से लेकर 1650 करोड़ तक की सब्सिडी दी जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है. 2017-18 से लेकर 2019-20 के तीन वित्त वर्षों में सीनियर सिटीज़न को कुल 4, 794 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी.
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अडाणी ग्रुप ने पीएम मोदी और श्रीलंका पावर प्रोजेक्ट विवाद पर दी प्रतिक्रिया
- Tuesday June 14, 2022
- Reported by: अरविंद गुणशेखर, Sreeja M S, Translated by: आनंद नायक
अडाणी ग्रुप के एक प्रवक्ता ने कहा, "श्रीलंका में निवेश करने का हमारा इरादा एक मूल्यवान पड़ोसी की जरूरत को पूरा करना है. एक जिम्मेदार कारपोरेट के रूप में हम इसे उस पार्टनरशिप के जरूरी हिस्से के तौर पर देखते हैं जो इन दोनों देशों ने हमेशा 'शेयर' की है."
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"क्या फसल का उचित दाम मांग कर किसान भारत को बदनाम कर रहे हैं?" : NDTV से बोले राकेश टिकैत
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राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि असली साजिश है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून न होने से कारपोरेट घरानों को किसानों को लूटने की खुली छूट मिल जाएगी.
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योगी सरकार का ‘किसान कल्याण मिशन’ किसानों के गुस्से को दबाने का प्रचार स्टंट : किसान यूनियन
- Thursday January 7, 2021
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नवीन कुमार
इन कानूनों के बनने से: 1. कारपोरेट निजी मंडियां बनाएंगे, 2. सरकार कानून अनुसार इन निजी मंडियों को बढ़ावा देगी, जिससे सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी, 3. लागत के सामन, उपकरण और सिंचाई कारपोरेट नियंत्रण में चली जाएगी और सरकारी सब्सिडी समाप्त होगी व लागत के दाम बढ़ेंगे, 4. लागत के बढ़े दाम का भुगतान करने के लिए किसानों को कर्ज लेना होगा, जिससे जमीन से बेदखली बढ़ेगी, 5. सरकार कुल मिलाकर खेती, खाद्य सुरक्षा और राशन की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगी.
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"अपने जिद्दी रवैये को छिपाने के लिए किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में लगी है सरकार"
- Saturday December 12, 2020
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नवीन कुमार
आश्चर्य नहीं है कि सरकार ने जो दस्तावेज ‘पुटिंग फामर्स फस्र्ट’ जारी किया है, उसके पृष्ठ 16 पर लिखा है कि ये कानून कारपोरेट के कृषि व्यवसायियों को आगे कर देगा. वह लिखता है ‘कल्पना कीजिए कि इन सुधारों के साथ कृषि व्यवसायियों के लिए कितने सारे नए अवसर खुल जाएंगे.
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रालोसपा ने किसानों के भारत बंद का किया समर्थन, 8 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन में...
- Saturday December 5, 2020
- Reported by: राजीव रंजन
Farmers Protest : रालोसपा ने कहा कि केंद्र सरकारतीनों कानूनों को रद्द करे ताकि देश के अन्नदाता कारपोरेट घराने के हाथों तबाह होने से बचें. जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार के किसान विरोधी रवैये के खिलाफ पार्टी नेता व कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे.
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