अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने का सोच रहे हैं और किसी अच्छे डील का इंतजार कर रहे हैं, तो शायद आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है. भारत में Samsung, Vivo, Oppo, Realme, Xiaomi और Nothing जैसी कंपनियों ने 2025 के आखिर से धीरे-धीरे अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं. पहले जो फोन एक तय कीमत पर मिल जाते थे, अब वही मॉडल 1,000 रुपये से लेकर 3,500 रुपये तक महंगे हो चुके हैं. कुछ स्मार्टफोन तो पहले के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं. इसका सबसे ज्यादा असर मिड-रेंज फोन खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ रहा है क्योंकि भारत में स्मार्टफोन की बिक्री का बड़ा हिस्सा इसी सेगमेंट से आता है.

जैसे-जैसे स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं, लोग नया मोबाइल खरीदने की बजाय अपने पुराने फोन को रिपेयर करवा रहे हैं. 2026 की शुरुआती बिक्री रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल की तुलना में स्मार्टफोन खरीदारी में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. इसका मतलब है कि ग्राहक अब ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं और अगर पुराना फोन ठीक हो सकता है तो वे नया फोन लेने से बच रहे हैं.
स्मार्टफोन महंगे होने की असली वजह क्या है?
इस बढ़ती कीमत के पीछे सबसे बड़ी वजह आपके फोन के अंदर मौजूद मेमोरी चिप्स हैं. हर स्मार्टफोन में DRAM और NAND नाम के दो छोटे लेकिन बेहद जरूरी मेमोरी चिप्स होते हैं. यही फोन की स्पीड, स्टोरेज और मल्टीटास्किंग को संभालते हैं. पिछले कुछ समय में इन चिप्स की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे फोन बनाने की लागत भी काफी बढ़ गई है.
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AI कंपनियों ने बढ़ाई मेमोरी चिप्स की मांग
AI इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ने का असर अब स्मार्टफोन मार्केट पर भी दिख रहा है. Nvidia जैसे बड़े डेटा सेंटर ऑपरेटर्स और AI कंपनियां High-Bandwidth Memory यानी HBM चिप्स की भारी मात्रा में खरीदारी कर रही हैं. यह चिप्स AI सर्वर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए इस्तेमाल होती हैं. क्योंकि इनकी मांग बहुत बढ़ गई है, इसलिए Samsung Electronics, Micron Technology और SK Hynix जैसी कंपनियां अपना प्रोडक्शन AI सेक्टर की तरफ शिफ्ट कर रही हैं.
HBM चिप्स में ज्यादा मुनाफा मिलने के कारण कंपनियां सामान्य स्मार्टफोन मेमोरी चिप्स की सप्लाई कम कर रही हैं. इसका सीधा असर DRAM और NAND चिप्स पर पड़ा है, जिनकी कीमतें कुछ मामलों में 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. इसी वजह से इंडस्ट्री के कुछ लोग इसे 'AI टैक्स' भी कहने लगे हैं.
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स्मार्टफोन कंपनियों और ग्राहकों पर असर
जब मेमोरी चिप्स महंगे होते हैं, तो फोन बनाने की लागत बढ़ जाती है. इससे कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ानी पड़ती है. एक तरफ AI डेटा सेंटर्स में सप्लाई जाने से स्मार्टफोन चिप्स कम हो रहे हैं, दूसरी तरफ वेस्ट एशिया में तनाव के कारण शिपिंग लागत भी बढ़ गई है. इससे इंपोर्ट खर्च बढ़ रहा है और फोन की कीमतों पर और दबाव पड़ रहा है.
इसके अलावा बजट स्मार्टफोन की मांग थोड़ी कमजोर हुई है. इसलिए ब्रांड्स अपनी कमाई बचाने के लिए ज्यादा डिस्काउंट नहीं दे रहे. पहले जहां सेल और ऑफर्स में अच्छे डील मिल जाते थे, अब ऐसे मौके कम होते जा रहे हैं.
जो मिड-रेंज स्मार्टफोन पहले 'वैल्यू फॉर मनी' माने जाते थे, उनमें सबसे ज्यादा कीमत बढ़ी है. जो फोन पहले 18,000 से 20,000 रुपये में मिलते थे, वे अब 25,000 रुपये के करीब पहुंच रहे हैं. कंपनियों के पास सीमित विकल्प बचे हैं. कई ब्रांड्स में बड़ा बदलाव देखा गया है. Xiaomi के फोन लगभग 32 प्रतिशत महंगे हुए, Samsung में करीब 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, Vivo में 40 प्रतिशत, Oppo में 41 प्रतिशत और Realme में 53 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ीं. इससे बजट कैटेगरी के खरीदारों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है.

प्रीमियम फोन खरीदारों पर असर कम क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि Apple और Samsung की फ्लैगशिप S-Series जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर इसका असर कम हो सकता है. इसके पीछे कारण यह है कि प्रीमियम फोन खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर कीमतों को लेकर उतने सेंसिटिव नहीं होते. साथ ही इन कंपनियों की सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत और बेहतर कंट्रोल होती है.
इसलिए जहां बजट और मिड-रेंज खरीदार महंगाई का सीधा असर महसूस कर रहे हैं, वहीं, प्रीमियम फोन लेने वालों को फिलहाल ज्यादा बड़ा झटका नहीं दिख सकता.
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