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अरबपति अनिल अग्रवाल ने कभी नहीं किया ये काम, पर Gen Z इसके बिना सो भी नहीं पाते! जानें क्या है 'Sleep Tracking'

Sleep Tracking Apps आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. Anil Agarwal की पोस्ट भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है कि नई पीढ़ी अपने स्वास्थ्य को समझने और सुधारने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकती.

अरबपति अनिल अग्रवाल ने कभी नहीं किया ये काम, पर Gen Z इसके बिना सो भी नहीं पाते! जानें क्या है 'Sleep Tracking'

Vedanta Group के चेयरमैन Anil Agarwal ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने आज की नई पीढ़ी यानी Gen Z के काम करने के तरीके और उनकी सोच के बारे में बात की. उन्होंने लिखा कि आज भारत में Gen Z युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है और उनके साथ काम करना उन्हें काफी पसंद है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच कई चीजें अलग हैं.

उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी अपनी नींद को ट्रैक करने के लिए किसी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन आज की युवा पीढ़ी यह काम नियमित रूप से करती है. इसी वजह से अब Sleep Tracking Apps की चर्चा फिर से तेज हो गई है. बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ये ऐप होते क्या हैं और ये हमारी नींद को कैसे मापते हैं.

Sleep Tracking App क्या होता है?
Sleep Tracking App एक ऐसा मोबाइल ऐप है जो आपकी रात की नींद को रिकॉर्ड और एनालिसिस करता है. यह ऐप बताता है कि आप कब सोए, कितनी देर सोए और आपकी स्लीप क्वालिटी कैसी रही. कई ऐप्स यह भी बताते हैं कि आपकी नींद गहरी थी या हल्की.

आजकल बहुत से स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच में यह फीचर पहले से मौजूद होता है. जब आप सोते हैं तो यह ऐप आपके शरीर की गतिविधियों, आवाज और कभी-कभी दिल की धड़कन को रिकॉर्ड करके नींद से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करता है. सुबह उठने पर आपको एक रिपोर्ट मिलती है जिसमें आपकी नींद का पूरा डेटा दिखाया जाता है.

Sleep Tracking Apps कैसे काम करते हैं?
Sleep Tracking Apps आमतौर पर मोबाइल फोन या स्मार्टवॉच के सेंसर का इस्तेमाल करते हैं. जब आप फोन को अपने पास रखकर सोते हैं या स्मार्टवॉच पहनकर सोते हैं, तो डिवाइस आपके शरीर की हलचल को महसूस करता है. अगर रात में आप ज्यादा करवट बदलते हैं तो ऐप इसे रिकॉर्ड कर लेता है.

कुछ एडवांस ऐप्स माइक्रोफोन का भी इस्तेमाल करते हैं. अगर आप खर्राटे लेते हैं या नींद में आवाज करते हैं तो यह भी रिकॉर्ड हो सकता है. स्मार्टवॉच वाले ऐप्स दिल की धड़कन और ऑक्सीजन लेवल जैसे डेटा का भी उपयोग करते हैं. इन सभी जानकारियों को मिलाकर ऐप यह अंदाजा लगाता है कि आपकी नींद कितनी अच्छी थी.

लोगों के लिए क्यों फायदेमंद हैं ये ऐप
Sleep Tracking Apps का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह लोगों को अपनी नींद की आदतों को समझने में मदद करते हैं. कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे ठीक से सो नहीं रहे हैं. लेकिन जब ऐप डेटा दिखाता है तो उन्हें समझ आता है कि उनकी नींद कम या खराब है.

इन ऐप्स में अक्सर सुझाव भी दिए जाते हैं, जैसे समय पर सोना, सोने से पहले फोन कम इस्तेमाल करना या कैफीन से बचना. इससे लोग धीरे-धीरे अपनी नींद की आदतों को सुधार सकते हैं. अच्छी नींद का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की ऊर्जा पर भी पड़ता है.

Gen Z में क्यों बढ़ रहा है इसका चलन
आज की Gen Z पीढ़ी अपनी सेहत और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है. वे काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेते हैं और अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देते हैं. इसी कारण वे टेक्नोलॉजी का उपयोग करके अपनी नींद और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं.

यही वजह है कि Sleep Tracking Apps आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. Anil Agarwal की पोस्ट भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है कि नई पीढ़ी अपने स्वास्थ्य को समझने और सुधारने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकती.

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