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दो बच्चों के साथ 80 साल की मां को संभाल रही हूं, कई बार तंग हो जाती हूं, हर जगह कैसे रहूं... दिल्ली की डिंपल का अनुभव

दो बच्चों और बुजुर्ग मां की जिम्मेदारी निभा रही एक डिंपल की कहानी बताती है कि कैसे काम के दवाब, नींद की कमी और मानसिक तनाव महिलाओं हेल्थ पर बुरा असर डाल रही हैं.

दो बच्चों के साथ 80 साल की मां को संभाल रही हूं, कई बार तंग हो जाती हूं, हर जगह कैसे रहूं... दिल्ली की डिंपल का अनुभव
मेंटल हेल्थ पर भारी पड़ रही जिम्मेदारियां

पंजाब की रहने वाली डिंपल दो बच्चों की मां हैं. अपने परिवार से कोसों दूर एक अलग शहर दिल्ली में नौकरी कर रही हैं. नौकरी के साथ अपने घर को चला रही हैं और बच्चों को भी पढ़ा रही हैं. इतनी जिम्मेदारियों के साथ उन पर एक और जिम्मेदारी है, उनकी 80 साल की मां की, जो अभी भी पंजाब में अकेले रहती हैं. घर, बच्चे, करियर, एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, और बिल्कुल ऐसा ही हुआ है डिंपल के साथ.

डिंपल ने NDTV को बताया कि जब वह अपने सपनों को जीने के लिए घर से बाहर निकली थीं, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें अपने छोटे बच्चों और बुजुर्ग मां दोनों की जिम्मेदारी एक साथ निभानी पड़ेगी.

डिंपल ने बताया- 

डिंपल बताती हैं कि घर पर बच्चों का ध्यान रखना, दोपहर, शाम या रात में किसी भी समय मां का फोन आ जाए तो उन्हें छोटी से छोटी चीज समझाना, ऊपर से काम का प्रेशर, इन सभी चीजों के बीच में वह मानसिक थकान और स्ट्रेस का सामना कर रही हैं.

लगातार काम का दबाव, बच्चों की देखभाल और दूसरे शहर में रह रही बुजुर्ग मां की चिंता के कारण डिंपल कई बार बहुत ज्यादा तनाव महसूस करने लगती हैं, डिंपल बताती हैं कि ऑफिस का काम संभालते हुए उसके मन में हमेशा बच्चों और मां की फिक्र बनी रहती है. जहां उन्हें कभी बच्चों की पढ़ाई की चिंता होती है तो कभी मां की सेहत का ख्याल. 

इतनी सारी जिम्मेदारियों के बीच वह कई बार खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती. जिम्मेदारियों का यह बोझ उनके लिए धीरे-धीरे तनाव में बदलने लगा है. छोटी-छोटी बातें भी उसे परेशान करने लगी हैं, मन बेचैन रहता है और कई बार बिना किसी वजह के भी चिंता घेर लेती है, लेकिन डिंपल अकेली नहीं है, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा की गई एक रिसर्च में भी यह बताया गया है कि भारत में प्राइवेट और सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं में काम का तनाव क्यों रहता है और उसे कैसे कम किया जा सकता है.

किन-किन परेशानियों का करती हैं सामना?

टिफिन से होती है शुरुआत

सुबह उठकर डिंपल सबसे पहले बच्चों को तैयार करती हैं, टिफिन बनाती हैं, परिवार को देखती हैं. इन्हीं सब के बीच जब उनकी मेड नहीं आती है, तो उनकी रिस्पॉन्सिबिलिटी और ज्यादा बढ़ जाती है.

रेस्ट न मिलना

डिंपल बताती हैं कि पूरा दिन अपनी सारी एनर्जी ऑफिस में देने के बाद जब वह घर आती हैं, तो उन्हें घर से भी छुट्टी नहीं मिलती. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च भी यही बताती है कि घर और बाहर की जिम्मेदारियां वर्किंग वुमन की मानसिक सेहत पर कैसे बुरा असर डाल सकती हैं.

पूरी नींद न लेना

इन सभी जिम्मेदारियों के कारण डिंपल को पूरा रेस्ट भी नहीं मिल पाता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च में भी यह पाया गया है कि पूरी नींद न लेना न सिर्फ कई तरह की बीमारियों का कारण बनता है, बल्कि मानसिक तनाव के कारण परफॉर्मेंस पर भी बुरा असर डाल सकता है.

मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए क्या किया जा सकता है?

किसी से बात करें

लगातार स्ट्रेस में रहना और थका हुआ फील करना आपकी मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. टेक्सास हेल्थ की रिसर्च के अनुसार दोस्तों के साथ दिन में एक छोटी सी बातचीत मानसिक स्वास्थ्य में मदद कर सकती है। इसलिए अपना मन हल्का करने के लिए किसी से बात करें.

अपने लिए 10 मिनट का समय निकालें

चाहे कितना भी काम हो, रोजाना अपने लिए 10 मिनट का समय निकालें और अपनी पसंद की चीजें, जैसे गाने सुनना, बुक पढ़ना या वॉक पर जाना रूटीन में शामिल करें.

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