आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब बड़ी कंपनियां सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि इंसानी सोच को भी इसमें शामिल करना चाहती हैं. इसी दिशा में Google DeepMind ने एक फिलॉसफर Henry Shevlin को हायर किया है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भविष्य में जब AI और ज्यादा एडवांस हो जाए, तो वह इंसानों के लिए सुरक्षित और सही तरीके से काम करे.

Henry Shevlin कौन हैं?
Henry Shevlin फिलहाल University of Cambridge में रिसर्चर और टीचर हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई University of Oxford और City University of New York से पूरी की है. वे DeepMind के साथ काम करने के साथ-साथ अपनी टीचिंग भी जारी रखेंगे.
Henry Shevlin का X पोस्ट
Henry Shevlin X पर बताया कि वे अब DeepMind के साथ काम करेंगे. उनका मेन काम होगा मशीन कॉन्शियसनेस यानी मशीन की सोचने-समझने की क्षमता और इंसान व AI के बीच रिश्तों को समझना. वे यह भी देखेंगे कि AI सिस्टम इंसानों की तरह सही और गलत का फर्क समझ सके.
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AGI क्या है?
AI की दुनिया में एक बड़ा लक्ष्य है Artificial General Intelligence यानी AGI. इसका मतलब है ऐसा AI जो इंसानों की तरह सोच और समझ सके. Google DeepMind इसी दिशा में काम कर रहा है और इसलिए उसे ऐसे एक्सपर्ट की जरूरत है जो सिर्फ टेक्निकल नहीं, बल्कि इमोशन सवालों का भी जवाब दे सके. मशीन कॉन्शियसनेस का मतलब है कि क्या भविष्य में मशीनें सच में 'सोच' सकती हैं या अपने फैसले खुद ले सकती हैं.
बता दें, इससे पहले Anthropic ने Amanda Askell को अपने AI मॉडल Claude को एथिक्स और नैतिकता सिखाने के लिए शामिल किया था.
क्यों जरूरी है AI में नैतिकता
जैसे-जैसे AI ज्यादा ताकतवर हो रहा है, वैसे-वैसे लोगों की चिंता भी बढ़ रही है. कई लोग डरते हैं कि भविष्य में मशीनें अपने फैसले खुद लेने लगेंगी और इंसानों से आगे निकल सकती हैं. हॉलीवुड फिल्मों जैसे The Matrix में भी ऐसा दिखाया गया है, जहां मशीनें इंसानों के खिलाफ हो जाती हैं.
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