एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की हाई जंप T64 में डीएसपी प्रवीण कुमार ने गोल्ड मेडल जीता. टॉप एथलीट और दो बार के पैरालंपिक मेडलिस्ट प्रवीण ने अपना टाइटल बचाने और पोडियम में टॉप पर रहने के लिए 2.05 मीटर की गेम्स रिकॉर्ड ऊंचाई को सफलतापूर्वक पार किया. 1.92 मीटर से अपनी प्रतियोगिता शुरू करते हुए, उन्होंने गोल्ड मेडल जीतने वाला परफॉर्मेंस दिया.
प्रवीण ने सबसे पहले 2 मीटर की जंप के साथ जकार्ता 2018 में उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव द्वारा बनाए गए 1.95 मीटर के गेम्स रिकॉर्ड को तोड़ा. इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने आखिरी कोशिश में 2.05 मीटर की ऊंचाई पार करके इसे और बेहतर बनाया.
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दरअसल, टी64 कैटेगरी उन एथलीट्स के लिए है जिनके निचले अंग में प्रोस्थेसिस है और जो अंगों की कमी या पैर की लंबाई में अंतर के कारण प्रभावित हैं. टी44 कैटेगरी उन एथलीट्स के लिए है जिनके निचले अंग में प्रोस्थेसिस नहीं है और जो अंगों की कमी, पैर की लंबाई में अंतर, मांसपेशियों की ताकत में कमी या पैसिव रेंज ऑफ मूवमेंट में कमी के कारण प्रभावित हैं.
प्रवीण टोक्यो में सबसे पहले पोडियम पर पहुंचे
प्रवीण सबसे पहले टोक्यो 2020 पैरालंपिक गेम्स (2021 में हुए) में पैरालंपिक पोडियम पर पहुंचे, जहां उन्होंने पुरुषों की हाई जंप टी64 में 2.07 मीटर की छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता, जो तब एक एशियन रिकॉर्ड था. उन्होंने हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी बढ़त जारी रखी.
पेरिस 2024 पैरालंपिक गेम्स में उन्होंने 2.08 मीटर की जंप के साथ गोल्ड मेडल जीता, जो उनके करियर की एक और बड़ी कामयाबी थी. इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में 2025 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की हाई जंप टी64 में 2.00 मीटर की जंप के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता.
एशियाई पैरा गेम्स 2026 (आइची-नागोया) में तीसरे दिन, पुरुषों के शॉट पुट F32 इवेंट में विशेष के हिस्सा लेने के साथ ही भारत का अभियान समाप्त हुआ. इसके साथ ही भारत के पदकों की कुल संख्या बढ़कर 61 हो गई है, जिसमें 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य पदक शामिल हैं. भारत ने आज के दिन 27 पदक जीते, और आने वाले दिनों में पदकों की संख्या और बढ़ाने के कई और मौके भी होंगे.
बीमारी को मात देकर जीता गोल्ड
प्रवीण ने बाद में बताया कि, 'दो सप्ताह पहले तक मेरी तबीयत ठीक नहीं थी और मैं सोच रहा था कि मैं अपने गोल्ड मेडल का बचाव कैसे करूंगा, उसके बाद मैं एक हफ्ते तक आराम करता रहा, लेकिन अगर आपको देश के लिए गोल्ड जीतना है तो फिर बीमारी रोड़ा नहीं बन सकती.'
दरअसल, जेवर के गोविंदगढ़ निवासी प्रवीण कुमार को उत्तर प्रदेश सरकार ने डीएसपी बनाया. खेल विभाग की अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती के तहत प्रवीण कुमार को इस पद पर तैनाती मिली. स्कूल से लेकर पेरिस पैरालिंपिक तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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