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आखिरी मौके पर जैवलिन ने दिया धोखा, रोहित यादव ने बताया ब्रॉन्ज मेडल का सीक्रेट, नीरज को कहा शुक्रिया

रोहित यादव ने जब नीरज चोपड़ा को बताया कि, एशियाई खेलों के लिए उनके पास अपना जैवलिन नहीं है, तो नीरज ने तुरंत उनकी मदद की और एक टैक्सी के जरिए जैवलिन भेजा.'

आखिरी मौके पर जैवलिन ने दिया धोखा, रोहित यादव ने बताया ब्रॉन्ज मेडल का सीक्रेट, नीरज को कहा शुक्रिया
रोहित यादव और नीरज चोपड़ा
NDTV

भारत के जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव जब जापान में एशियाई खेलों के लिए मैदान पर उतरे, तो उनके पास ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन नीरज चोपड़ा का साइन किया हुआ जैवलिन था. दरअसल, यह कहानी जून में शुरू हुई, जब यादव ने भुवनेश्वर में नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर के अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल जीता. NIS पटियाला में अपने ट्रेनिंग बेस पर लौटने पर उन्हें पता चला कि उनका पसंदीदा जैवलिन मुड़ गया था.

इसके बाद यादव ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में उधार लिए गए जैवलिन के साथ हिस्सा लिया और तेज हवा वाले मौसम में 81.56 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे. एशियाई खेल पास आ रहे थे, और उनके सामने अपने भरोसेमंद जैवलिन के बिना ही प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की चुनौती थी. यादव ने TOI को बताया कि, 'एशियाई खेलों के लिए मेरे पास अपना जैवलिन नहीं था. मेरा पसंदीदा जैवलिन खराब हो गया था और मुड़ गया था.'

नीरज ने टैक्सी के जरिए भेजा जैवलिन

रोहित ने बताया कि, '10 सितंबर को इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज के लिए पटियाला से दिल्ली आते समय मैंने नीरज भाई से बात की. मुझे पता था कि वह रिहैबिलिटेशन के लिए भारत लौट आए हैं. मैंने उन्हें बताया कि एशियाई खेलों के लिए मेरे पास अपना जैवलिन नहीं है. वह तुरंत मेरी मदद के लिए आगे आए और एक प्राइवेट टैक्सी सर्विस के जरिए जवाहरलाल नेहरू (JLN) स्टेडियम में अपना एक साइन किया हुआ जैवलिन मुझे भेजा.'

दरअसल, नीरज चोपड़ा ने टखने के लिगामेंट की चोट से उबरने के लिए एशियाई खेलों सहित सीजन के बाकी हिस्सों से अपना नाम वापस ले लिया था. उनके न होने से भारत के पास अपना दो बार का डिफेंडिंग चैंपियन नहीं था, दूसरी ओर रोहित यादव दिल्ली में उस जैवलिन का इस्तेमाल नहीं कर सके क्योंकि उसे जांच के लिए टेक्निकल इन्फॉर्मेशन सेंटर (TIC) में रजिस्टर नहीं कराया गया था. उन्होंने इवेंट के लिए एक और रजिस्टर्ड जैवलिन (भाला) लिया और फिर जापान के लिए चोपड़ा का जैवलिन सावधानी से पैक किया.

नीरज के दिए जैवलिन से जीता ब्रॉन्ज मेडल

उन्होंने कहा, 'एशियन गेम्स में मैंने दो जैवलिन रजिस्टर किए थे. लेकिन मैंने वही इस्तेमाल किया जो नीरज भाई ने मुझे दिया था. उस पर मेरी पकड़ अच्छी थी, और उसी जैवलिन से मैंने 84.35 मीटर का विनिंग थ्रो करके ब्रॉन्ज मेडल जीता. मैं नीरज भाई का हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा. मैंने वह जैवलिन अपने पास रखा है और भविष्य के कॉम्पिटिशन में भी इसका इस्तेमाल करूंगा.'

अपनी प्रतियोगिता के बाद रोहित ने चोपड़ा का बधाई वाला मैसेज सुना. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जीत का मजा लूं और अपने पहले बड़े इंटरनेशनल मेडल का आनंद लूं. उन्होंने कहा कि जब वह पूरी तरह ठीक होकर लौटेंगे, तो हम साथ में कॉम्पिटिशन करेंगे, और यह भी कहा कि मुझे अभी बहुत आगे जाना है.' उत्तर प्रदेश के जौनपुर में अपने घर पर, यादव ऑफ-सीजन के दौरान दिवाली तक परिवार के साथ समय बिता रहे हैं.

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