गुरुवार को जब भारत के बड़े-बड़े बल्लेबाज JSCA स्टेडियम में गेंदों को स्टैंड्स में भेज रहे थे, तब झारखंड का एक और क्रिकेटर चुपचाप प्रैक्टिस सेशन के दौरान अपने मौके का फायदा उठा रहा था. दूर से देखने पर 24 साल के राजनदीप सिंह बिल्कुल अर्शदीप सिंह जैसे लग रहे थे, लेकिन पास से देखने पर पता चला कि झारखंड का एक और तेज गेंदबाज अपनी छाप छोड़ रहा है.
ईशान किशन, संजू सैमसन, तिलक वर्मा और 15 साल के वैभव सूर्यवंशी जब नेट्स में बारी-बारी से बैटिंग कर रहे थे, तब राजनदीप ने आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ गेंदबाजी की. उन्होंने कई बार बल्लेबाजों को छकाया, उनके बल्ले का किनारा लगवाया और गलत शॉट खेलने पर मजबूर किया, साथ ही उनकी तारीफ भी बटोरी. झारखंड के एक ऐसे युवा के लिए, जिसने कभी आर्थिक तंगी के कारण क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था, भारत के टॉप T20 बल्लेबाजों के साथ नेट्स में गेंदबाजी करना एक यादगार पल था.
सीनियर खिलाड़ियों को गेंदबाजी करने का मिला मौका
राजनदीप ने पीटीआई से कहा, 'मुझे सीनियर खिलाड़ियों को गेंदबाजी करने का मौका मिला. मुझे पता चला कि मैं क्या बेहतर कर सकता हूं और किन जरूरी चीजों पर मुझे काम करने की जरूरत है.' 'मुझे यह अनुभव भी हुआ कि मैं बहुत ढीली गेंदबाजी नहीं कर सकता. आज गेंदबाजी करके अच्छा लगा.' JSCA स्टेडियम में भारत के बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने का मौका उनके लिए एक और छोटा लेकिन अहम कदम था.
सैमसन समेत कई सीनियर खिलाड़ियों से मिला फीडबैक
राजनदीप ने कहा कि उन्हें सैमसन समेत सीनियर खिलाड़ियों से मिले फीडबैक से आत्मविश्वास मिला. उन्होंने कहा, 'बल्लेबाज कह रहे थे कि मैं अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं. संजू सर भी कह रहे थे कि मैं अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं.' फिलहाल, उनका मकसद साफ है: खुद को व्हाइट-बॉल ऑलराउंडर के तौर पर स्थापित करना. 'मुझसे व्हाइट-बॉल टीम के लिए खेलने को कहा गया है, इसलिए मैं उसी की तैयारी कर रहा हूं. मैं अपनी गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं.'
राजनदीप ने कहा कि, 'मैंने गेंदबाजी से बहुत कुछ सीखा है और मैं लगातार सुधार करने की कोशिश करूंगा. मैं भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं.' राजनदीप झारखंड के बढ़ते क्रिकेट सिस्टम की एक और देन हैं. वह ईशान किशन की कप्तानी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने वाली राज्य की टीम का हिस्सा थे. ईशान ने उन्हें बेहतर सोच बनाने और 'अपने क्रिकेट का मजा लेने में मदद की.
ईशान किशन ने भी दिया सुझाव
एज-ग्रुप क्रिकेट में ज्यादातर आपकी स्किल्स मायने रखती हैं, लेकिन सीनियर लेवल पर आपको ज्यादा मानसिक मजबूती की जरूरत होती है. ईशान भैया ने मुझे साफ सोच दी और कहा कि मैं अपने क्रिकेट का मजा लूं. पहले मुझमें उस मानसिक स्पष्टता की कमी थी, लेकिन अब मैंने उसे पा लिया है.' राजनदीप ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने वाले अपने अभियान को भी याद किया. पंजाब के खिलाफ एक मैच में उन्होंने अपने चार ओवरों में 1/30 का शानदार प्रदर्शन किया. उस मैच में पंजाब ने 235/6 रन बनाए थे, जिसे झारखंड ने सिर्फ 19 ओवर में हासिल कर छह विकेट से जीत दर्ज की.
उन्होंने टूर्नामेंट में आठ मैचों में पांच विकेट लिए और बल्ले से भी योगदान दिया. उन्होंने सात पारियों में 40 की औसत और 186 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 200 रन बनाए. उन्होंने झारखंड प्रीमियर लीग में भी प्रभावित किया, जहां उन्होंने आठ मैचों में 9.24 की इकॉनमी रेट से आठ विकेट लिए. इन प्रदर्शनों ने IPL में दिलचस्पी पैदा की है, हालांकि राजनदीप जमीन से जुड़े हुए हैं.
ट्रायल्स और मैचों पर फोकस
उन्होंने कहा कि, 'मैं अभी इस बारे में नहीं सोच रहा हूं. टीम में होना अच्छी बात है, लेकिन मैं आने वाले सीजन पर ध्यान दूंगा. मैं ट्रायल्स और मैचों पर ध्यान दूंगा. 'घरेलू सीजन शुरू होने वाला है, और मैं हर चीज के लिए तैयार हूं.' इस सीजन में सीके नायडू ट्रॉफी में भी एक और यादगार पल आया, जब उन्होंने मेघालय के खिलाफ 387 गेंदों पर नाबाद 400 रन बनाए. इस पारी ने उन्हें IPL स्काउट्स की नज़र में ला खड़ा किया है.
माही और युवी प्रेरणास्रोत
क्रिकेट के लिए उनका प्यार भारत के दो सबसे मशहूर नामों - युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी - से शुरू हुआ. खासकर धोनी उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे आदर्श एमएस धोनी हैं. मेरा बैटिंग ऑर्डर भी उनके जैसा ही है, इसलिए मैं उनसे बहुत कुछ सीखता हूं. मैदान पर भी मैं उनसे काफी कुछ सीखता हूं.'
किशन भी उनके लिए एक रोल मॉडल हैं; वह झारखंड क्रिकेट में एक अहम खिलाड़ी बन गए हैं और उन्होंने टीम को उनका पहला सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खिताब जिताया है. राजनदीप ने बताया कि किशन की सलाह से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि एक असली ऑलराउंडर बनने के लिए क्या करना पड़ता है. उन्होंने कहा, 'ईशान भैया की टीम बहुत अच्छी थी और उन्होंने अपना काफी अनुभव हमारे साथ साझा किया. हमें उनसे बहुत फायदा हुआ.' उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर तुम ऑलराउंडर बनना चाहते हो, तो तुम्हें दोनों विभागों (बैटिंग और बॉलिंग) में अच्छा प्रदर्शन करना होगा. उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया और सीके नायडू ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन किया.'
राजनदीप के जीवन का शुरुआती संघर्ष
स्कूल बस ड्राइवर कुलवंत सिंह और सुरिंदर कौर के बेटे राजनदीप ने क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. उनके प्रदर्शन ने आईपीएल फ्रेंचाइजी का ध्यान खींचा है और दो-तीन टीमों ने उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया है. कुछ साल ऐसे भी आए जब उनके परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और 2016 में वह क्रिकेट छोड़ने के करीब पहुंच गए थे. उन्होंने याद करते हुए कहा, 'लेकिन मैंने उनसे कहा कि बस मुझे एक साल का समय दें. फिर मैं झारखंड की अंडर-16 टीम की ओर से खेला और तब से मैं लगातार टीम का हिस्सा रहा हूं.'
आर्थिक तंगी से निपटने के लिए गृहनगर लौटा जालंधर
उनकी दादी के निधन और आर्थिक तंगी से निपटने के लिए उनका परिवार वापस अपने गृहनगर जालंधर लौट गया है, लेकिन राजदीप ने झारखंड में ही रुककर अपने सपने को पूरा करने का फैसला किया है. उन्होंने कहा, 'मेरे परिवार का पूरा समर्थन है और वे चाहते हैं कि मैं अच्छा प्रदर्शन करूं. मुश्किल समय भी आया, लेकिन अब सब ठीक हो गया है. मेरे पिता अभी भी जालंधर में स्कूल बस चलाते हैं और हालात अब सामान्य हो गए हैं. अब मेरा पूरा ध्यान क्रिकेट पर है.'
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