- खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में नियम बदलने से एक निजी यूनिवर्सिटी को फायदा मिलने के आरोप.
- आरोप है कि महंगे और कम खेले जाने वाले खेल जोड़ने से मुकाबले का संतुलन बिगड़ गया.
- आरोप है कि इन बदलावों से पूरे टूर्नामेंट की निष्पक्षता खत्म हो गई और इसका सरकारी संस्थानों को नुकसान हुआ है.
खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पंजाब की एक सरकारी यूनिवर्सिटी, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने खेल मंत्रालय से औपचारिक शिकायत कर आरोप लगाया है कि नियमों में अचानक किए गए बदलावों से पूरे टूर्नामेंट की निष्पक्षता खत्म हो गई. यूनिवर्सिटी का कहना है कि इन बदलावों से सरकारी संस्थानों को नुकसान हुआ. वहीं यूनिवर्सिटी ने यह भी आरोप लगाया है कि एक निजी यूनिवर्सिटी को इसका फायदा मिला है.
क्या है मामला?
दरअसल, पंजाब में लगभग 65 साल से मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी पूरे साल के खेल प्रदर्शन के आधार पर दी जाती रही है. इसमें इंटरनेशनल टूर्नामेंट, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप और लगातार अच्छे प्रदर्शन को अहमियत मिलती थी. लेकिन 2023–24 के खेल सत्र खत्म होने के बाद इसके नियमों तब्दीलियां की गई थीं. पहले अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी पाने के लिए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का वेटेज केवल 10 से 15 फीसद था, जिसे बदलकर करीब 100 प्रतिशत कर दिया गया.
वेटेज बढ़ने से अचानक बढ़ गए निजी यूनिवर्सिटी के मेडल
शिकायत में बताया गया है कि नियम बदलने से पहले जिस निजी यूनिवर्सिटी के सिर्फ तीन मेडल थे, उसके मेडल एक ही सत्र में 32 तक पहुंच गए. मौजूदा सत्र में यह संख्या बढ़कर 42 हो गई.
President Droupadi Murmu confers Maulana Abul Kalam Azad Trophy, 2022 on Guru Nanak Dev University, Amritsar for showing the best all-round performance in sports. pic.twitter.com/wVGCiIxBQV
— President of India (@rashtrapatibhvn) November 30, 2022
महंगे खेल जोड़कर बढ़ा दिया गया मेडल
विवाद यहीं खत्म नहीं होता. 2024–25 में कैनोइंग और कयाकिंग जैसे खेलों को खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में शामिल किया गया था. ये फैसले सत्र के बीच या बाद में लिए गए, जब ज्यादातर यूनिवर्सिटीज स्पोर्ट्स को लेकर अपना बजट और तैयारी पहले ही कर चुकी थीं.
जहां इन अपेक्षाकृत महंगे खेलों के करीब 10 ओलंपिक इवेंट्स हैं, वहीं खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में इनके करीब 30 इवेंट्स आयोजित किए गए. ये खेल महंगे हैं और इनके लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए, जो ज्यादातर सरकारी यूनिवर्सिटीज के पास मौजूद नहीं है.
खेल ऐसे चुनने का आरोप की कुछ ही लोग जीत सकें
सरकारी यूनिवर्सिटी का आरोप है कि जानबूझकर ऐसे खेल और ज्यादा इवेंट्स रखे गए, जिनमें कुछ चुनिंदा यूनिवर्सिटीज को ही फायदा मिल सके. इससे महंगे खेलों में पदक जीतने के मौके कई गुना बढ़ गए और पदक तालिका का संतुलन पूरा बिगड़ गया.
अयोग्य खिलाड़ियों को भी खेलने दिया गया
शिकायत में खिलाड़ियों की एंट्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि कुछ खिलाड़ियों को तय समय सीमा के बाद भी खेलने दिया गया, जबकि वे नियमों के मुताबिक इस खेलों में खेलने के योग्य नहीं थे.
नियम साफ कहते हैं कि जिन खिलाड़ियों के नाम आधिकारिक सूची में नहीं हैं, उन्हें खेलने की इजाजत नहीं दी जा सकती. आरोप है कि इस नियम के होने के बावजूद ऐसे कई खिलाड़ियों ने न केवल इसमें हिस्सा लिया, बल्कि इनमें से कई ने मेडल भी जीता.
President Droupadi Murmu confers Maulana Abul Kalam Azad Trophy, 2024 on Chandigarh University. pic.twitter.com/ZyIrPBa734
— President of India (@rashtrapatibhvn) January 17, 2025
आपत्तियां जताई पर सुनी नहीं गईं
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसने समय रहते आपत्तियां दर्ज कराईं और पूरे दस्तावेज भी दिए. इसके बावजूद आयोजकों ने न तो शिकायतों पर कोई कार्रवाई की और न ही जवाब दिया.
आरोप है कि आपत्तियां लंबित रहते हुए भी पदक वितरण और समापन समारोह का आयोजन कर दिया गया.
जांच की मांग, नजरें मंत्रालय पर
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से निष्पक्ष जांच की मांग की है. यूनिवर्सिटी का कहना है कि अगर ऐसे नियम चलते रहे, तो खेलों की ईमानदारी और मौलाना आजाद ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित पहचान दोनों खतरे में पड़ जाएंगी.
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