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This Article is From Oct 03, 2016

पैरालिंपिक खेलों में इतिहास रचकर लौटे एथलीटों को सचिन तेंदुलकर ने किया सम्मानित

पैरालिंपिक खेलों में इतिहास रचकर लौटे एथलीटों को सचिन तेंदुलकर ने किया सम्मानित
पैरालिंपिक के विजेता एथलीटों के साथ सचिन तेंदुलकर.
  • सचिन के साथ कारोबारी खिलाड़ियों की मदद के लिए बनाएंगे कोष
  • सभी एथलीटों को 15-15 लाख रुपये का नकद इनाम दिया गया
  • खिलाड़ियों ने सुनाईं अपने संघर्ष की दास्तानें
मुंबई: रियो में हुए पैरालिंपिक खेलों में इतिहास रचकर लौटे चार भारतीय एथलीटों को भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने सोमवार को मुंबई में सम्मानित किया. सचिन के साथ कई कारोबारियों ने इन खिलाड़ियों की मदद के लिए एक कोष बनाने की भी बात कही.

पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड विजेता देवेन्द्र झाझरिया जब आठ साल के थे तब उन्होंने पेड़ पर चढ़ने के दौरान बिजली के तार को छू लिया. इस घटना में उनको एक हाथ गंवाना पड़ा. लेकिन उसके बाद वे पीछे नहीं मुड़े. साल 2004 में पहली बार पैरा ओलिंपिंक्स के लिए क्वॉलिफाई किया वहीं जैवलीन थ्रो में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा. सोने का तमगा भी हासिल किया. साल 2016 रियो में उन्हें फिर सोना मिला. सचिन से मिलने के बाद देवेन्द्र ने कहा "सर मेरे आदर्श हैं. कई लोग कहते थे मैं 35 साल का हो गया हूं अब खेल न पाऊं... तब मैं उन्हें सचिन का उदाहरण देता था, क्योंकि उन्होंने काफी लंबे समय तक खेला है."            

12 साल पहले दीपा स्पाइनल ट्यूमर से जूझ रही थीं. उनका स्पाइनल ट्यूमर का तीन बार ऑपरेशन हो चुका है. शरीर में 183 टांके लग चुके हैं. वर्ष 2016 में रियो में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया. इस मौके पर दीपा ने पैरा-एथलीटों के संघर्ष के बारे में बात की.
 

हाईजम्प में गोल्ड मेडल जीतने वाले मेरियप्पन की मां सब्जी बेचती हैं. जब वे पांच साल के थे तब पैर को ट्रक ने रौंद दिया. उनके साथ वरुण भाटी भी थे. वरुण को बचपन में पोलियो ने अपना शिकार बनाया. मेरियप्पन 2016 रियो ओलिंपिक्स में देश के लिए गोल्ड मेडल लाए तो उसी पोडियम पर वरुण के हाथ में ब्रॉन्ज था. वरुण ने बताया कि "मैं तब तक नहीं रुकूंगा जब तक गोल्ड नहीं जीत लेता." वहीं मेरियप्पन उन पलों को याद करने लगे जब मेडल लेकर वे घर आए. उन्होंने कहा "मां ने कुछ नहीं कहा, वे बस रो रही थीं. मैं भी उसे देखकर रोने लगा कुछ बोल नहीं पाया."

इन खिलाड़ियों के जज्बे को मुंबई में भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने सम्मानित किया. उन्होंने बाद में कहा "जीवन जीने के दो तरीके होते हैं, एक सिक्के के दो पहलू की तरह. एक यह कि आप सुबह उठें और भगवान के सामने रोएं कि आपने हमें किन-किन चीजों से महरूम रखा, दूसरा जो मिला उसके लिए उसे शुक्रिया कहें ... आप खिलाड़ियों का तहेदिल से शुक्रिया हमें यह बताने के लिए. पूरा देश आपकी खुशी में शरीक था."
 
 
सन 1972 में पैरालिंपिक्स में तैराकी में गोल्ड मेडल जीतने वाले मुरलीकांत पेटकर से लेकर वरुण भाटी तक सारे एथलीटों को 15 लाख रुपये का नकद इनाम मिला. सचिन के साथ पैरा-एथलीटों के लिए एक कोष भी बना है. उन्हें उम्र भर मुफ्त चिकित्सा जैसी सहूलियतें भी मिली हैं.
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