15 साल की उम्र में नितेश सिवाच हरियाणा के पानीपत में अपने पिता की दूध बेचने में मदद करते थे. अपने परिवार की इजाज़त के बाद उन्होंने कुश्ती में कदम रखा. दो साल कड़ी मेहनत की, जिसमें सुबह 5 बजे उठना और ट्रेनिंग के बाद शाम 5 बजे घर लौटना शामिल था. आखिरकार उनकी यह मेहनत रंग लाई और गुरुवार को उन्होंने एशियाई खेलों में ग्रीको-रोमन कुश्ती में मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. 23 साल के नितेश गुरुवार को 97 किग्रा वर्ग के फ़ाइनल में जापान के यूरी नाकाज़ातो से हार गए और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा, लेकिन इस मेडल की चमक अब भी बरकरार है.
अपने फाइनल मुकाबले के बाद नितेश ने कहा,"मेरे पिता दूध बेचने का काम करते हैं. जब मैं 15 साल का था, तो मेरे घुटने का ऑपरेशन हुआ था. मैंने अपने पिता के साथ दूध बेचने का काम शुरू किया. मैं रोज दूध बेचता था." हरियाणा के पानीपत जिले के जगसी गांव के रहने वाले नितेश ने कहा,"मैं घर पर अकेला रहता था, इसलिए मेरे पिता ने मुझसे कहा, 'तुम घर पर अकेले क्यों रहते हो? मेरे साथ चलो (दूध बेचने के लिए)' मैं अपने पिता के साथ पानीपत जाता था."
उन्होंने 2017 से 2019 तक दूध बेचने का काम किया. यह 12 घंटे का मुश्किल काम था. दो साल बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया और परिवार से कुश्ती में अपना करियर फिर से शुरू करने की इजाज़त मांगी, जो घुटने के ऑपरेशन की वजह से कुछ समय के लिए रुक गया था. उन्होंने कहा,"मेरा गांव पानीपत से 40 किमी दूर है. मैं सुबह 5 बजे उठता था और शाम 5 बजे घर लौटता था. मैंने दो साल तक दूध बेचा. मुझे एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती थी, इसलिए मैंने परिवार से बात करने का सोचा. मैंने छह महीने की मोहलत मांगी और फिर दोबारा कुश्ती शुरू कर दी."
इसके बाद उन्होंने खरखौदा के प्रताप स्कूल में ट्रेनिंग शुरू की. नितेश ने कहा,"मेरे कोच ओम प्रकाश दहिया और संदीप ने मुझ पर बहुत ध्यान दिया. उन्होंने मुझे एक दिन वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए प्रेरित किया. मैं अभी तक वर्ल्ड चैंपियन तो नहीं बना हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं एक दिन ज़रूर वर्ल्ड चैंपियन बनूंगा."
2022 में, नितेश ने U23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. 2025 में, उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता और इस साल उसे सिल्वर मेडल में बदल दिया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने ग्रीको-रोमन रेसलिंग शुरू करते समय कभी 'दंगल' में जाने के बारे में सोचा था, तो उन्होंने कहा,"घुटने के ऑपरेशन के बाद, मैंने ग्रीको-रोमन खेलना शुरू किया. चोट के बाद, मैंने कभी 'दंगल' में जाने के बारे में नहीं सोचा. मैंने मैट पर ग्रीको-रोमन खेलना शुरू किया."
उन्हें उम्मीद थी कि ग्रीको-रोमन को प्रो रेसलिंग लीग में शामिल किया जाएगा. नितेश ने कहा,"मैं प्रो रेसलिंग लीग के आयोजकों से ग्रीको-रोमन को शामिल करने का अनुरोध करूंगा." अपनी रोज़ाना की डाइट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा,"मुझे घर पर बना चूरमा (एक मीठी डिश) खाना पसंद है. मैं ज़्यादातर शाकाहारी खाना खाता हूं. मैं घर का बना पनीर, मक्खन, चूरमा खाता हूं और दूध पीता हूं. मैं कभी-कभी चिकन भी खाता हूं."
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