कमाल की बात है कि टोक्यो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास कायम करने वाली चैंपियन मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ में हैट्रिक गोल्ड के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप का भी गोल्ड मेडल जीता है, मगर एशियाड के पदक के लिए तरसती रही हैं. दो महीने पहले कॉमनवेल्थ का हैट्रिक गोल्ड जीतकर इतिहास कायम करने वाली मीरा ग्लासगो से खुश होकर तो लौटीं, लेकिन उन्हें इतने भर से संतोष नहीं था.
हैट्रिक गोल्ड के अगले दिन से ही प्रैक्टिस शुरू
मीरा ने साल 2013 में पेनांग कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में (48 किलोग्राम वर्ग में) अपना पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय पदक जीता. फिर 2017 में अमेरिका के एन्हैम वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड, टोक्यो ओलिंपिक में 2021 में सिल्वर और इस बीच कॉमनवेल्थ गेम्स-CWG में एक सिल्वर लगातार हैट्रिक गोल्ड जीते.
इन 14-15 सालों में मीरा लगातार 48 और 49 किलोग्राम वर्ग में मेडल जीतती रहीं है. लेकिन एशियाड का मेडल अपने नाम नहीं कर सकी हैं. इसलिए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स ले लौटते ही मीराबाई ने बिना वक्त गंवाए अपने कोच विजय शर्मा के साथ मुरादनगर ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गईं और जमकर मशक्कत शुरू कर दी.
एशियाड का पदक इसलिए ज़रूरी
मीरा कहती हैं, 'एशिया में वेटलिफ़्टिंग का स्तर बेहद अच्छा है. यहां चीन, चाइनीज़ ताइपेई, कोरिया, जापान जैसे देशों के वेटलिफ़्टर पावरफुल हैं. लेकिन इसबार मैंने भी अच्छी तैयारी की है. मेरे लिए ये जीतना बहुत ज़रूरी है. मेरे पास एशियाड का पदक नहीं है.'
और भी हैं मीरा
मुरादनगर में मीराबाई के साथ कई छोटे बच्चे और युवा वेटलिफ़्टर तैयारी करते दिख जाते हैं. यहां ट्रेनिंग कर रहे कई छोटे बच्चे ऐसे गांव से यहां आए हैं कि इन्होंने पहली बार यहीं आकर सड़क देखी है. मीरा इन सबके लिए बड़ी बहन हैं. मीरा इन सबको सिखाती हैं, रोते बच्चों को ढाढस बंधाती हैं और उन्हें ख़्वाब देखना बताती हैं.
मीरा कहते हैं, 'यहां कई बच्चे अच्छी ट्रेनिंग कर रहे हैं. इनमें जीतने की भूख जग रही है. ये आने वाले टाइम में देश के लिए बड़े पदक जीत सकेंगे.'
लग जा गले कि ये हंसी..
मीरा हर वेटलिफ़्टर के लिए प्रेरणा की बड़ी वजह हैं. अपने खाने-पीने र प्रैक्टिस को उन्होंने इस कदर साध लिया है कि पिछले 15 साल से अपने वज़न को 48-49 किलोग्राम से बढ़ने नहीं दिया है.
मीरा का फ़ोकस फ़िलहाल 49 किलोग्राम में एशियाड का पदक जीतना है और (फिट रहीं तो) 53 किलोग्राम वर्ग में लॉस एंजेल्स 2028 ओलिंपिक का पदक भी. मगर वो ज़िन्दगी और खेल को अपने ही अंदाज़ में जीती हैं. उनके लिए सामने का हर पहला टूर्नामेंट जैसे आख़िरी ही होता है.
NDTV पर वो दर्शकों से अपील करती हैं कि फ़ैन्स उनकी टीम के लिए दुआएं मांगे और उन्हें आशीर्वाद दें. वो लता मंगेशकर का सुरीला गीत, सुरीले अंदाज़ में गाती हैं, 'लग जा गले कि ये हंसी रात हो ना हो....'
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