नीरू ढांडा अब किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. उन्होंने आईची-नागोया में महिला ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण जीतते हुए इतिहास रच दिया है. जिसके बाद उनकी चारों तरफ सराहना हो रही है. विशेष उपलब्धि हासिल करने के बाद 26 स्टार ने NDTV के साथ खास बातचीत की है. उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्हें पता है कि एक लड़की ने ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण लाया है. इसके बारे में आपको किसी ने बताया है? तो उन्होंने जवाब में कहा, 'हां, आज जीतने के बाद पता चला कि पहला है. अगर पहले पता होता तो शायद कहीं ना कहीं भटक जाती. अच्छा था कि नहीं पता था. जिससे मैं और अंदर से फाइट कर पाई. मुकाबले के दौरान यह था कि अपने देश के लिए गोल्ड जीतना है, पर अपने प्रोसेस में रहकर जीतना है. ऐसा था.'
नीरू से जब पूछा गया कि उन्हें शूटिंग में आए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुए हैं. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'नहीं 2019 में शुरू किया था. अभी टाइम हो गया है. मेन ट्रेनिंग कोविड के बाद शुरू की थी रेगुलर.'
Asian Games 2026 | डबल ट्रैप इवेंट में गोल्ड जीतने वालीं शूटर नीरू ढांडा ने NDTV से खास बातचीत में क्या कहा? सुनिए #AsianGames2026 #NeeruDhanda #GoldMedal | @cheerica pic.twitter.com/dSHvH7S2ik
— NDTV India (@ndtvindia) September 29, 2026
जब उनकी सफलता के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, 'प्रोसेस तो हर खिलाड़ी करते हैं. मगर मेरे साथ मेरे कोच का अच्छा सपोर्ट था. मेरे कोच हर बार मुझे मोटिवेट रखते थे. चाहे परिवार की समस्या रही हो या खेल को लेकर, उन्होंने हमेशा मुझे मोटिवेट रखा.'
नीरू खेल से तीन हफ्ते पहले ट्रेनिंग नहीं कर पाई थी. बीमार थीं और अस्पताल में थी. जब इसपर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'पता तो किसी को दिन का नहीं रहता है कि अगले दिन क्या होने वाला है. पर ये पता था कि अपने आप को कंट्रोल में रखूंगी तो ये दिन भी सच हो जाएगा. जो मैंने सोच रखा है. बस वही था अपने आप को मोटिवेट रखना था. इस समय पर मेरे कोच मनशेर सिंह ने काफी हेल्फ की थी कि मोटिवेट रहना है. तू पक्का जाएगी और जीतकर आएगी.'
एशियाड में नीरू ने गोल्ड ही नहीं ट्रैप टीम स्पर्धा में सिल्वर भी नाम किया. उनसे पूछा गया कि वहां गोल्ड हो सकता था. जिसपर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'देखो उसे हम थोड़ा लक पर भी छोड़ देते हैं. हमारे टीम मेट ने भी बहुत अच्छा खेला है. ऐसा नहीं है. उनके हाथ में जो था उन्होंने बहुत अच्छा किया. मेरे हाथ में जो था मैंने किया. वो तो टीम का एफर्ट होता है. हमने तीनों ने एफर्ट डाले हैं. तभी यहां तक पहुंचे हैं. अगली बार और तैयार होकर आएंगे.'
नीरू से जब पूछा गया कि आप अपनी पदक को किसे डेडिकेट करेंगी, तो उन्होंने कहा, 'इस पदक को मैं अपनी फैमिली, माता, अपने कोच मनशेर सिंह, टीम, पीटर विल्सन कोच, विक्रम सर और सेपोर्ट स्टाफ... सबको डेडिकेट करना चाहती हूं. यह पदक पूरे इंडिया का है. अकेले मेरे का नहीं.'
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