कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में कानपुर पुलिस की ओर से मास्टरमाइंड बताई गईं शालू को कोर्ट से राहत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गई हैं. करीब 21 दिन जेल में बिताने के बाद घर पहुंचीं शालू ने इस पूरे दौर को अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल और कष्टदायक वक्त बताया. उन्होंने कहा कि इन 21 दिनों में उन्हें सबसे ज्यादा अपने बेटे की याद सताती थी. शालू ने कहा, "वह 21 दिन मेरी जिंदगी के सबसे बुरे दिन थे. ऐसे दिन जिन्हें मैं अपने जीवनकाल में कभी नहीं भूल पाऊंगी. बहुत मुश्किल वक्त था मेरे लिए. मेरे परिवार ने मेरा बहुत सहयोग किया."
'एक पल में जिंदगी वैसी नहीं रह गई जैसी थी'
उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर एक पल में सब कुछ कैसे बदल गया. शालू के मुताबिक, "मैं खुद नहीं समझ पा रही हूं कि क्या हुआ, कैसे हुआ. एक पल में सब कुछ खत्म हो गया. मेरी गृहस्थी, मेरा घर, मेरा परिवार, सब कुछ छूट गया."
शालू ने कहा कि मुश्किल वक्त में उन्हें भगवान, अपने गुरु और परिवार पर पूरा भरोसा था. उन्होंने अपने वकील शिवाकांत जी का भी आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उनका साथ दिया और न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा, "मुझे अपने भगवान पर भरोसा था, गुरुजी महाराज पर भरोसा था. अपने वकील और परिवार पर भरोसा था. मेरे वकील शिवाकांत जी ने मुझे न्याय दिलाया, सच का साथ दिया और मुझे जस्टिस दिलाया. सच की जीत हुई. मैं इन सबकी बहुत आभारी हूं."
सुब्रत के सवाल पर बोलीं- 'मैं कुछ नहीं कहना चाहती'
मामले में सुब्रत की भूमिका को लेकर सवाल पूछे जाने पर शालू ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि इस बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहतीं और पुलिस-प्रशासन अपना काम कर रहा है. शालू ने कहा, "मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती कि सुब्रत का क्या रोल है. मैं कुछ नहीं कहना चाहती. पुलिस प्रशासन अपना काम कर रहा है और वह न्याय और सच का हिस्सा देगा. बाकी इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना."
बेटे को याद कर भावुक हुईं शालू
जेल में बिताए 21 दिनों के बारे में बात करते हुए शालू अपने बेटे को याद कर भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि सुबह से शाम तक उन्हें अपने बेटे की याद सताती थी और हर वक्त उसकी तस्वीर आंखों के सामने रहती थी.
उन्होंने कहा, "हर पल, हर वक्त, सुबह-शाम मुझे अपने बेटे की याद सताती थी. बिना उसके मैं सो नहीं पाती थी. हर समय मेरी आंखों के सामने उसकी तस्वीर दिखती थी."
शालू ने कहा कि उन्हें अब तक यह समझ नहीं आया कि उनका नाम इस मामले में कैसे और क्यों आया. उन्होंने कहा, "मुझे खुद ही नहीं पता कि मेरा नाम आगे क्यों आया, कैसे आया, किस लिए मुझे फंसाया गया. मैं अब तक यह समझ नहीं पा रही हूं. क्योंकि मैं अपने पूरे परिवार को साथ लेकर हमेशा चलती थी. कोई भी औरत अपना परिवार, अपना घर खराब नहीं करती है."
'मैं उन 21 दिनों को दोबारा याद नहीं करना चाहती'
जेल में बिताए दिनों को लेकर शालू ने कहा कि वह उस दौर को बार-बार याद नहीं करना चाहतीं. उन्होंने कहा कि वह समय उनके साथ था और अब खत्म हो चुका है.
"वह 21 दिन मेरी जिंदगी के सबसे बुरे दिन थे, जो मैंने फेस किए हैं. मैं बार-बार उनका जिक्र करके खुद को तकलीफ नहीं देना चाहती और न ही उन लम्हों को ज्यादा याद करना चाहती हूं. जो था, वह मेरे साथ था और मेरे साथ ही खत्म हो गया. मैं उन पलों को कभी अपने जीवन में दोबारा याद नहीं करना चाहूंगी."
विधायक, वकील और परिवार का जताया आभार
शालू ने इस मुश्किल दौर में साथ खड़े रहने वाले अपने परिवार और अन्य लोगों का भी शुक्रिया अदा किया. उन्होंने स्थानीय विधायक नीलिमा जी के सहयोग के लिए भी आभार जताया.
उन्होंने कहा, "मेरे परिवार ने मेरा बहुत सपोर्ट किया है. यहां तक कि स्थानीय विधायक नीलिमा जी ने भी मेरा बहुत सहयोग किया है. मैं हाथ जोड़कर उनका शुक्रिया अदा करना चाहूंगी. जो भी लोग मेरे साथ खड़े रहे, मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करती हूं."
आगे की जिंदगी को लेकर अभी कोई फैसला नहीं
जेल से बाहर आने के बाद आगे की जिंदगी को लेकर शालू ने कहा कि उन्होंने अभी कुछ तय नहीं किया है. फिलहाल वह खुद को संभालने के लिए थोड़ा वक्त चाहती हैं. उन्होंने कहा, "आगे के जीवन के बारे में मैंने अभी तक कुछ भी विचार नहीं किया है. मुझे थोड़ा वक्त दीजिए, संभलने के लिए. मैं आप सब से यही गुजारिश करती हूं."
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