आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाई कोर्ट ने केजरीवाल की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस निर्देश को रद्द करने वाले आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री का खुलासा करने को कहा गया था. हाई कोर्ट ने केजरीवाल पर लगाए गए 25,000 रुपए के जुर्माने को बरकरार रखा. मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 31 मार्च, 2023 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया.
पीठ ने कहा कि चुनौती दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं है और बिना कोई अतिरिक्त जुर्माना लगाए अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपीलकर्ता की किसी भी दलील में चुनौती दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई जा सकती. तदनुसार, अपील खारिज की जाती है और जुर्माने के संबंध में कोई और आदेश नहीं दिया जाता है.
एकल न्यायाधीश ने मार्च 2023 में गुजरात विश्वविद्यालय की सीआईसी के 2016 के निर्देश को चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी प्रदान करने के आदेश को रद्द कर दिया था. अदालत ने केजरीवाल पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
अपील की कार्यवाही के दौरान, केजरीवाल के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माने के आधार को चुनौती दी. उन्होंने तर्क दिया कि केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री प्राप्त करने के लिए 'लगातार प्रयास' नहीं किया था, जैसा कि एकल न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी. सिंघवी ने यह भी तर्क दिया कि सीआईसी ने 'स्वतः संज्ञान' लिया था और केजरीवाल को औपचारिक आरटीआई आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर प्रतिवादी बनाया था.
अदालत के समक्ष एक अन्य मुद्दा गुजरात विश्वविद्यालय का यह दावा था कि डिग्री पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध थी. केजरीवाल के वकीलों ने एकल न्यायाधीश के समक्ष एक पुनर्विचार याचिका में तर्क दिया था कि डिग्री वास्तव में कभी भी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई थी, लेकिन इस दलील को खारिज कर दिया गया था. सिंघवी ने तर्क दिया कि यदि डिग्री वास्तव में ऑनलाइन उपलब्ध थी तो सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई का आधार नहीं बचता.
गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपील का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि केजरीवाल ने इस मामले को लगातार आगे बढ़ाया और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कीं, जिनसे विश्वविद्यालय के अनुसार संस्थान की बदनामी हुई.
मेहता ने सुझाव दिया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने और सरकारी अधिकारियों को ऐसे अनुरोधों से निपटने में उत्पादक कार्य समय बर्बाद करने से बचाने के लिए जुर्माना लगाया जाना चाहिए जो अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति नहीं करते.
यह विवाद 2016 का है, जब केजरीवाल ने सीआईसी को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री का खुलासा करने की मांग की थी और कहा था कि उन्हें अपने से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी क्यों 'छिपाई' जा रही है.
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