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ISSF World Championship: एशियन गेम्स में मिली निराशा, अब भारतीय निशानेबाजों की अग्निपरीक्षा, ओलंपिक कोटा दांव पर

एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों ने बेहद खराब प्रदर्शन किया था लेकिन वह आईएसएसएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में इस हार को भुलाकर आगे बढ़ना चाहेंगे.

ISSF World Championship: एशियन गेम्स में मिली निराशा, अब भारतीय निशानेबाजों की अग्निपरीक्षा, ओलंपिक कोटा दांव पर

एशियाई खेलों में उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रहे भारत के शीर्ष निशानेबाजों के सामने रविवार से शुरू हो रही आईएसएसएफ विश्व चैंपियनशिप (राइफल, पिस्टल और शॉटगन) में दमदार वापसी कर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती होगी. इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी के साथ 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है. ऐसे में भारतीय निशानेबाज एशियाई खेलों की निराशा को पीछे छोड़कर ओलंपिक अभियान की मजबूत शुरुआत करने के इरादे से उतरेंगे.

एशियाई खेलों में भारत के निशानेबाजी पदकों की संख्या में इस बार उल्लेखनीय गिरावट आई. हांगझोऊ में 2023 में भारतीय निशानेबाजों ने सात स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य सहित कुल 22 पदक जीते थे, लेकिन आइची-नागोया में यह संख्या घटकर 15 रह गई. इस बार भारत को केवल तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य पदक मिले. यह प्रदर्शन भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए.

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, ईशा सिंह और एलावेनिल वलारिवान जैसी दिग्गज निशानेबाज स्वर्ण पदक जीतने में नाकाम रहीं. दोहा में होने वाली इस प्रतियोगिता की 12 व्यक्तिगत ओलंपिक स्पर्धाओं में कुल 36 कोटा स्थान उपलब्ध होंगे. प्रत्येक स्पर्धा में तीन ओलंपिक कोटा दांव पर होंगे. पूरे क्वालीफिकेशन चक्र के दौरान किसी एक प्रतियोगिता में ओलंपिक कोटा हासिल करने का यह सबसे बड़ा अवसर है.

भारतीय निशानेबाज अगर शुरुआती दौर में ही ओलंपिक कोटा हासिल करने में सफल रहते हैं तो उन्हें आगे की तैयारियों के लिए पर्याप्त समय और राहत मिलेगी. इससे खिलाड़ियों को घरेलू चयन ट्रायल और ओलंपिक की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा. भारत की नजरें 2036 ओलंपिक की मेजबानी पर भी हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विशेष निगाह रहेगी, क्योंकि भारत विश्व खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करना चाहता है.

दोहा में भारत की पदक उम्मीदों में एशियाई खेलों की दोहरी स्वर्ण पदक विजेता नीरू ढांडा प्रमुख होंगी. इस ट्रैप निशानेबाज ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते थे. इसके अलावा महिला टीम स्पर्धा में रजत पदक भी उनके नाम रहा था. अब उनसे विश्व चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी.

विश्व कप प्रतियोगिताओं में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली सुरुचि इंदर सिंह पर भी निगाहें रहेंगी. उन्होंने एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी. एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या भले ही घटी, लेकिन कुछ खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद जगाने वाला भी रहा. एलावेनिल और ईशा सहित कई निशानेबाज स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गए.

उनके इस प्रदर्शन ने पियरे ब्यूशां के नेतृत्व वाले निशानेबाजी के हाई परफॉर्मेंस कोचिंग कार्यक्रम को सवालों के घेरे में ला दिया है. कोचिंग व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों को दबाव की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना और पदक जीतने की मजबूत स्थिति को स्वर्ण पदक में बदलना होगा.

इस बीच खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (आईएसएसएफ) ने भी सतर्कता बरतने की बात कही है. महासंघ ने कहा है कि वह क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखेगा और घटनाक्रम के अनुसार स्थिति का आकलन करेगा.

भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत तीन नवंबर को पुरुष और महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धाओं से करेगी. इसी दिन इन दोनों स्पर्धाओं के पदकों का फैसला होगा. पुरुष वर्ग में पार्थ माने, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ मखीजा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि महिला वर्ग में शांभवी क्षीरसागर, सोनम मस्कर और एलावेनिल वलारिवान चुनौती पेश करेंगी.

(इनपुट- भाषा)

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