अनुभवी भारतीय मिडफील्डर नीलाकांता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि वह चल रही एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लेंगे, ताकि उनकी जगह युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सके. इस महीने की शुरुआत में, इस तरह की रिपोर्ट्स आई थीं कि नीलाकांता के साथ-साथ जरमनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह और अमित रोहिदास का यह आखिरी टूर्नामेंट होगा. चारों दिग्गज ओलंपिक और आइची-नागोया एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली टीमों का हिस्सा थे.
माना जा रहा है कि यह कदम हॉकी इंडिया की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक है. भारत ने हाल ही में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है. 31 वर्षीय नीलाकांता ने बताया कि आइची-नागोया एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, उन्होंने खुद ही संन्यास लेने का फैसला किया.
A SPECIAL MOMENT FOR A SPECIAL PLAYER! ❤️🇮🇳 As Nilakanta Sharma announces his retirement from international hockey after the Hero Asian Champions Trophy Punjab 2026, his teammates celebrate him with all the love he deserves! 🇮🇳❤️ #HockeyIsBack #HACT2026 #SatSriAkalAsia #IndiaKaGame
— Hockey India (@TheHockeyIndia) October 27, 2026
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के अपने पहले मैच में बांग्लादेश को 13-0 से हराने के बाद, नीलाकांता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा,"यह फैसला मैंने एशियाई खेलों के बाद खुद लिया है, किसी ने मुझ पर कोई दबाव नहीं डाला. जाहिर है, मुझे खेलना याद आएगा, लेकिन मैंने यह फैसला आने वाली पीढ़ी के लिए लिया है. कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौके का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें आगे आने का मौका मिलना चाहिए." उन्होंने आगे कहा,"एशियाई खेलों के ठीक बाद और इस टूर्नामेंट से पहले, मैंने कोच (क्रेग फुल्टन) को अपने फैसले के बारे में बता दिया था."
ONE LAST TIME IN INDIAN COLOURS. 🇮🇳❤️ After years of giving his all for Team India, Nilakanta Sharma will bid farewell to international hockey after the Hero Asian Champions Trophy Punjab 2026. One final chapter. Let's give him the farewell he deserves. 🥹🇮🇳 #HockeyIsBack #HACT2026 #SatSriAkalAsia #IndiaKaGame
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मणिपुर के रहने वाले 31 वर्षीय खिलाड़ी ने बताया कि उन्होंने संन्यास के बाद की अपनी योजनाएं पहले ही तैयार कर ली हैं. उन्होंने आगे कहा,"मैं पूरी तरह तैयार हूं. जब भी मैं घर जाता हूं, तो नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को कोचिंग देता हूं. टोक्यो ओलंपिक के बाद, जब मेरे राज्य ने मुझे नौकरी की पेशकश की, तो मैंने खेल विभाग को चुना ताकि मैं आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को कोचिंग दे सकूं. मैंने यहां से बहुत कुछ सीखा है." "भविष्य के लिए मेरी यही योजना है. मैं बस अपना अनुभव साझा करना चाहता हूं और जूनियर खिलाड़ियों को अगले स्तर तक ले जाना चाहता हूं."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भविष्य में पूर्णकालिक कोचिंग (फुल-टाइम कोचिंग) करने की सोच रहे हैं, तो नीलाकांता ने कहा,"जब मैं खेल रहा होता हूं, तो मेरा पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर होता है." "अगर मैं ऐसा कोई फैसला लेता हूँ, तो मैं आपको इसके बारे में बता दूंगा."
नीलाकांता ने कहा कि वह 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक तक खेल सकते थे, लेकिन उन्होंने जूनियर्स के लिए जगह खाली करने का फैसला किया. उन्होंने कहा,"90 फीसदी लोग यही कहते हैं. फिर भी, मेरा मानना है कि जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए ही होता है. अगर कोई और आता है, तो वह भारत के लिए ही होगा." उन्होंने आगे कहा,"मैंने 9-10 साल तक नेशनल टीम के लिए खेला है, लेकिन हमारे पीछे कई और खिलाड़ी भी हैं. हर किसी का सपना ओलंपिक में खेलने का होता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ मैं ही खेलता हूं. हर कोई खेलने के लिए ही आता है."
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