एशियन गेम्स 2026 में गुरवार को भारत के सबसे होनहार पहलवानों में से एक सोनीपत के सुजीत कलकल ने तजाकिस्तान के ओलंपिक चैंपिय तजाकिस्तान के अब्दुल मजीद को चित करते हुए भारत को 14वां स्वर्ण पदक दिलाया. हरियाणा के इमलोटा गांव के एक साधारण अखाड़े से लेकर सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में भारत के सबसे होनहार फ्रीस्टाइल पहलवानों में से एक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. कुछ साल पहले उन्हें जोर का झटका भी लगा, जब वह दुबई की बाढ़ के कारण ओलंपिक क्वालीफायर मुकाबलों में भाग नहीं ले पाए थे, लेकिन एशियाड में सुजीत ने स्वर्ण से इतर 2-9 से पिछड़ने के बावजूद अब्दुल मजीद को धूल चटा दी. स्वर्ण पदक विजेता सुजीत कुमार का एक पहलू यह भी है कि हर रोज गीता पढ़ते हैं, तो पढ़ाई में भी बहुत तेज रहे हैं. सुजीत ने 10वीं और 12वीं दोनों ही क्लास में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा नंबरों से पास की. चलिए आप डिटेल से पहलवान के बारे में जान लीजिए
जब दुबई की बाढ़ ने दिया जोर का झटका
साल 2022 में सुजीत ने अंडर-23 और अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और फिर ट्यूनीस में आयोजित यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण पदक जीतकर सीनियर सर्किट में भी अपनी छाप छोड़ी. हालांकि, उनका सफर बाधाओं से अछूता नहीं रहा. साल 2024 में दुबई में आई बाढ़ के कारण उड़ानों के बाधित होने से वह वहां फंसने के कारण और एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर से चूक गए. वह बिश्केक तब पहुंचे जब वजन तौलने (वेइ-इन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी.
इस असफलता से टूटने के बजाय, सुजीत ने और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ वापसी की. उनके करियर की सबसे बड़ी सीनियर सफलता 65 किलोग्राम वर्ग में 2026 की एशियाई चैंपियनशिप का खिताब रहा, एक ऐसी जीत जिसने उन्हें यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग में दुनिया के नंबर 1 पहलवान के पायदान पर पहुंचा दिया. सीमित शुरुआत और कठिन बाधाओं को पहले ही पीछे छोड़ चुके सुजीत अब 2026 में पहली बार एशियाई खेलों के मंच पर उतरने के लिए तैयार है. और अब उन्होंने ओलंपिक चैंपियन को मात देकर इतिहास रच दिया.

पिता खुद रह चुके हैं पहलवान, बताई बेटे की यूएसपी
5 नवंबर 2002 को जन्मे सुजीत को कुश्ती से परिचय उनके पिता दयानंद कलकल ने कराया था, जो खुद एक राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं. उन्होंने अपने शुरुआती प्रशिक्षण की शुरुआत गांव के अखाड़े से की. यहां सीमित सुविधाओं और विशेष कोचिंग के अभाव ने उनके शुरुआती विकास की कड़ी परीक्षा ली. साल 2021 में उनका सोनीपत जाना, जहा उन्होंने अनुभवी पहलवानों के साथ अभ्यास किया जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इसके बाद उन्हें जल्द ही सफलता भी मिलने लगी.
पिता दयानंद ने सुजीत की जीत के बाद एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा, 'सुजीत की सबसे खास बात यही है कि वह आखिरी राउंड में इसी अंदाज में कुश्ती लड़ते हैं. उसकी कुश्ती के दौरान हम टीवी सेट से चिपके हुए थे. परिवार के सभी लोगों के दिल धड़क रहे थे, लेकिन हमें उसकी जीत का पूरा भरोसा था.' पिता ने बताया, 'बेटे की जीत के साथ ही आस-पास पटाखे फूटने शुरू हो गए. और हम जीत को गांव में रसगुल्ले बांटकर उनके साथ खुशी साझा करेंगे.'
पूर्व द्रोणाचार्य अवार्डी को ओलंपिक पदक का भरोसा
कुश्ती के और दिग्गज और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता और टीम इंडिया के पूर्व कोच महावीर बिश्नोई ने सुजीत कलकल की इस जीत को अदभुत बताते हुए कहा कि जो मैंने देखा, वह अविश्वसनीय है. अगर 2-9 से पिछड़ने के बाद कोई पहलवान वापसी करते हुए जीता है. और जिस मनोदशा का परिचय सुजीत ने दिया है, उस देखते हुए मैं पूर भरोसे का साथ कह सकता हूं कि वह विश्व चैंपियन भी बनेगा और ओलंपिक में भी पदक जीतेगा. यह मेरे अपने करियर में देखी गई सर्वश्रेष्ठ कुश्तियों में से एक रही है. हमारे लड़के ने बहुत ही अच्छा किया है और मुझे उस पर गर्व है. '
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